चेटी चंड पर गूंजा आस्था का उल्लास: छत्तीसगढ़भर में भगवान झूलेलाल जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया, मुंगेली में उमड़ा जनसैलाब
मुंगेली/रायपुर/बिलासपुर। सिंधी समाज के आराध्य देव भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव एवं सिंधी नववर्ष ‘चेटी चंड’ का पर्व पूरे छत्तीसगढ़ में श्रद्धा, उल्लास और भव्यता के साथ मनाया गया। प्रदेश के विभिन्न जिलों—विशेषकर मुंगेली, रायपुर और बिलासपुर—में इस अवसर पर भव्य आयोजन, शोभायात्राएं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें समाज के लोगों की भारी सहभागिता देखने को मिली।
मुंगेली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगवान झूलेलाल की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की और सिंधी समाज को नववर्ष की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे श्रद्धा भाव से भगवान की आराधना की।

कार्यक्रम के अंतर्गत शोभायात्रा, भजन-कीर्तन, आरती और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेकर सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप दिया।
रायपुर और बिलासपुर में भी चेटी चंड के अवसर पर भव्य झांकियां निकाली गईं, जिनमें भगवान झूलेलाल के जीवन प्रसंगों को आकर्षक रूप से प्रस्तुत किया गया। इन झांकियों ने लोगों को अपनी आस्था और संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया। खास बात यह रही कि इन आयोजनों में महिलाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रूप से अधिक रही, जिससे सामाजिक एकता और सशक्तिकरण का संदेश भी प्रसारित हुआ।

चेटी चंड का महत्व और इतिहास
चेटी चंड सिंधी समाज का प्रमुख और पावन पर्व है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन से सिंधी नववर्ष की शुरुआत होती है। मान्यता है कि भगवान झूलेलाल का अवतार इसी दिन हुआ था, जिन्हें जल के देवता वरुण देव का रूप माना जाता है। उन्होंने अन्याय के विरुद्ध संघर्ष कर समाज की रक्षा की और धर्म की स्थापना की।
समाज में उत्साह और एकता का प्रतीक बना पर्व
प्रदेशभर में आयोजित इन कार्यक्रमों ने सिंधी समाज की एकता, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया। लोगों ने हर्षोल्लास के साथ नववर्ष का स्वागत किया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देकर भाईचारे का संदेश दिया।

चेटी चंड का यह पर्व एक बार फिर यह साबित कर गया कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता में एकता और परंपराओं का गहरा महत्व है, जो समाज को जोड़ने का कार्य करती है।
