चकरभाठा में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न।
चकरभाठा में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न
मुख्य अतिथि सरपंच मनोज पांडे ने किया भव्य प्रवेश द्वार का भूमिपूजन, पर्यावरण संरक्षण हेतु वृहद पौधरोपण; ‘समुद्र शास्त्री’ पंडित श्रवण दुबे के ओजस्वी व्याख्यान से प्रबुद्धजन हुए लाभांवित।
बिलासपुर (चकरभाठा) | 31 मई 2026
समुद्र शास्त्री दैनिक (अमर स्तंभ) ब्यूरो:
अहिल्याबाई होल्कर कल्याण समिति के तत्वावधान में न्याय, लोक-कल्याण और सुशासन की अप्रतिम प्रतीक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती चकरभाठा बस्ती में अत्यंत हर्षोल्लास, गरिमामय और भव्य वातावरण में मनाई गई। इस पावन अवसर पर जहाँ एक ओर स्थानीय अधोसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास को गति दी गई, वहीं दूसरी ओर सनातन संस्कृति और पर्यावरण चेतना का अनूठा समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रम के सुव्यवस्थित संचालन और वैचारिक विमर्श में क्षेत्र के प्रबुद्धजीवियों व वरिष्ठ पत्रकारों ने महती भूमिका निभाई।
संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन: भूमिपूजन एवं पर्यावरण संरक्षण
जयंती समारोह के मुख्य आकर्षण के रूप में लोकमाता के सम्मान में निर्मित होने वाले भव्य प्रवेश द्वार (गेट) का वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच भूमिपूजन संपन्न हुआ। यह मांगलिक कार्य कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं स्थानीय ग्राम पंचायत सरपंच श्री मनोज पांडे के कर-कमलों द्वारा संपन्न किया गया।
इस अवसर पर विकास कार्यों की आधारशिला रखने के साथ ही, सरपंच श्री पांडे ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A (g) में वर्णित नागरिकों के मूल कर्तव्य (पर्यावरण संरक्षण) की भावना के अनुरूप परिसर में वृहद स्तर पर पौधरोपण किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर के प्रजा-वत्सल शासनकाल को रेखांकित करते हुए ग्राम विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
वरिष्ठ पत्रकार व ‘समुद्र शास्त्री’ पंडित श्रवण दुबे का बौद्धिक उद्बोधन
समारोह के द्वितीय चरण में, सनातन संस्कृति, ज्योतिष और सामुद्रिक शास्त्र के प्रकांड ज्ञाता व वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। उन्होंने ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) पूर्णिमा के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक महत्व पर अत्यंत सारगर्भित प्रकाश डाला।
पंडित श्रवण दुबे ने अपने ओजस्वी व्याख्यान में मुख्य रूप से निम्नलिखित वैचारिक बिंदु साझा किए:
तप और आत्मबल का संदेश: उन्होंने प्रतिपादित किया कि ‘ज्येष्ठ’ का शाब्दिक अर्थ ही श्रेष्ठता से है। इस मास में सूर्य देव अपनी पूर्ण प्रचंडता के साथ हमें यह संदेश देते हैं कि विपरीत एवं कठिन परिस्थितियों में भी बिना विचलित हुए निरंतर कर्मशील रहकर ही मनुष्य श्रेष्ठता को प्राप्त कर सकता है।
’जल दान’ का वैज्ञानिक एवं मानवीय दृष्टिकोण: शास्त्रों का वैज्ञानिक संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा—
”हमारी सनातन परंपरा पूर्णतः प्रकृति-विज्ञान पर आधारित है। ज्येष्ठ मास की इस भीषण ऊष्मा और लू के समय मूक जीव-जंतुओं की रक्षा करना और उनके लिए जल की व्यवस्था करना सर्वोपरि मानवीय धर्म है। जीवन की रक्षा ही वास्तविक राष्ट्रधर्म है।”
चरित्र निर्माण और संस्कार: उन्होंने युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए कहा कि संयमित जीवन और उच्च नैतिक आचरण से ही चरित्र सुदृढ़ होता है, जो एक आदर्श समाज के निर्माण की प्राथमिक आवश्यकता है।
समिति अध्यक्ष लक्ष्मण पाल के मार्गदर्शन में सफल समापन
इस संपूर्ण गरिमापूर्ण कार्यक्रम का सुचारू संपादन समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल के कुशल मार्गदर्शन व नेतृत्व में संपन्न हुआ। पूरे चकरभाठा क्षेत्र में इस सफल आयोजन के साथ-साथ श्री लक्ष्मण पाल एवं श्री रामेश्वर पांडे (उर्फ फक्कड़ बाबा) के संयुक्त संयोजन में चलाए गए अनुकरणीय वृक्षारोपण अभियान की भूरि-भूरि प्रशंसा की जा रही है।
पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ के ज्ञानवर्धक व्याख्यान के पश्चात, कार्यक्रम का विधिवत समापन अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल के गरिमामय धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने मुख्य अतिथि सरपंच मनोज पांडे, मुख्य वक्ता पंडित श्रवण दुबे सहित सभी आगंतुक प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामवासियों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि समिति लोकमाता के सेवामूलक आदर्शों को आत्मसात करते हुए जनहित के कार्यों के लिए सदैव तत्पर रहेगी।
प्रांतीय संदर्भ: कांकेर में भी झेरिया गड़रिया समाज ने दी श्रद्धांजलि
इसी क्रम में, कांकेर जिले से प्राप्त समाचार के अनुसार, झेरिया गड़रिया समाज द्वारा भी लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की जयंती को सामाजिक समरसता और एकता के भाव के साथ मनाया गया। समाज के जिला अध्यक्ष महेंद्र धनकर, युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष थामेश धनकर एवं वरिष्ठ सदस्य चंद्रभान धनकर के नेतृत्व में आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने शिक्षा के सार्वभौमिकरण, युवाओं की तकनीकी सक्षमता और पारंपरिक कृषि एवं पशुपालन व्यवसायों में आधुनिक तकनीकों के समावेश द्वारा आर्थिक सशक्तिकरण का आह्वान किया।
