|

आदर्श मुक्ति धाम बोदरी में ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ का भव्य आयोजन; समुद्र शास्त्री ने मजदूरों के सम्मान में किया 11 सूत्रीय कार्यक्रम का आह्वान

आदर्श मुक्ति धाम बोदरी में ‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ का भव्य आयोजन; समुद्र शास्त्री ने मजदूरों के सम्मान में किया 11 सूत्रीय कार्यक्रम का आह्वान

बोदरी, छत्तीसगढ़

‘अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस’ के पावन अवसर पर आदर्श मुक्ति धाम बोदरी तहसील के अंतर्गत एक गरिमामयी और ऊर्जावान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में मजदूरों के त्याग और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को नमन करते हुए उनके उज्जवल भविष्य के लिए 11 सूत्रीय कल्याणकारी कार्यक्रम के माध्यम से जनमानस को सशक्त करने का संकल्प लिया गया।

श्रम और मातृशक्ति का वंदन

कार्यक्रम में मुख्य रूप से विश्व हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पालफक्कड़ बाबा (गौ प्रभारी, छत्तीसगढ़) सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने शिरकत की। समुद्र शास्त्री ने इस अवसर पर ‘मातृशक्ति’ का विशेष अभिनंदन किया और सभी माताओं से आह्वान किया कि वे इस पावन राष्ट्र-निर्माण के कार्य में अपना सक्रिय सहयोग दें।

समुद्र शास्त्री की कलम से: “श्रम की वेदी पर सृजन का शंखनाद”

इस अवसर पर समुद्र शास्त्री जी ने अपने विशेष लेख के माध्यम से समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने कहा:

“श्रम केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का जागरण है। जब श्रमिक के हाथ चलते हैं, तो सभ्यता के पहिये आगे बढ़ते हैं। श्रमिक एक मशीन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक इकाई है। हमें उस हाथ को सम्मान देना होगा जो हमारे सपनों की नींव भरता है।”

प्रौढ़ अनुराग: रूहानी धरातल पर प्रेम की व्याख्या

श्रमिक दिवस के साथ-साथ समुद्र शास्त्री ने मानवीय संवेदनाओं पर प्रकाश डालते हुए ‘प्रौढ़ अनुराग’ पर भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि कैसे परिपक्व उम्र का प्रेम देह की सीमाओं को तोड़कर उपासना बन जाता है, जहाँ केवल समर्पण और विश्वास के पारिजात खिलते हैं।

प्रमुख उपस्थिति एवं संकल्प

कार्यक्रम में ज्वालामुखी ऊर्जा के साथ सामाजिक संस्थाओं के प्रमुखों ने भाग लिया।

  • लक्ष्मण पाल (प्रदेश अध्यक्ष, छत्तीसगढ़): उन्होंने श्रमिकों के स्वाभिमान की रक्षा और उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान करने पर जोर दिया।
  • फक्कड़ बाबा (गौ प्रभारी): उन्होंने श्रम को ‘ईश्वर की सच्ची अर्चना’ बताते हुए सामाजिक एकता का संदेश दिया।

अन्य खबरें