स्थानांतरण के 21 महीने बाद भी मुंगेली में VDO राजीव तिवारी का जमावड़ा: जनपद सीईओ संतोष घोसले की ‘खास मेहरबानी’ या बड़ा प्रशासनिक खेल?
शासन-मंत्रालय के आदेशों को ठेंगे पर रखकर अधिकारी को कुर्सी से चिपकाए रखने में सीईओ संतोष घोसले की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल; निष्पक्ष जांच की मांग
विशेष रिपोर्ट – मुंगेली:
मुंगेली जनपद पंचायत में नियमों की धज्जियां उड़ाने और शासकीय आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेंकने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। विकास विस्तार अधिकारी (वी.डी.ओ.) राजीव कुमार तिवारी का स्थानांतरण हुए 21 महीने (पौने दो साल) से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन वे आज भी मुंगेली जनपद में डटे हुए हैं। सूत्रों और प्राप्त शासकीय दस्तावेजों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि राजीव तिवारी को इतने लंबे समय तक नियम विरुद्ध तरीके से मुंगेली की सरजमीं पर जमाए रखने में जनपद सीईओ संतोष घोसले का ही मुख्य योगदान और प्रशासनिक संरक्षण रहा है।

सीईओ संतोष घोसले का संरक्षण: आखिर क्या है मजबूरी या सांठगांठ?
छत्तीसगढ़ शासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय (नया रायपुर) द्वारा जारी आदेश (क्रमांक एफ 1-34/2024/22-1, दिनांक 24.10.2024) के तहत राजीव कुमार तिवारी का स्थानांतरण प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जनपद पंचायत कोटा (जिला बिलासपुर) के पद पर किया गया था। नियम के अनुसार 10 दिवस के भीतर उन्हें कार्यमुक्त (रिवील) किया जाना अनिवार्य था।

सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अविनाश चंपावत के सख्त निर्देशों के बावजूद, मुंगेली जनपद सीईओ संतोष घोसले द्वारा राजीव तिवारी को भारमुक्त नहीं किया गया। शासन के इतने स्पष्ट और कड़े आदेशों के बाद भी एक स्थानांतरित अधिकारी को महीनों तक पद पर बनाए रखना सीधे तौर पर जनपद सीईओ संतोष घोसले की कार्यशैली और मंशा पर गहरा संदेह पैदा करता है।

शिकायतों को दरकिनार कर दिया प्रशासनिक संरक्षण
ग्राम जमकोर निवासी शिकायतकर्ता देवीप्रसाद द्वारा शासन और जिला प्रशासन के उच्च अधिकारियों को भेजे गए शिकायती पत्रों में सीधा आरोप लगाया गया है कि बिना किसी संशोधित आदेश या निरस्तीकरण के अधिकारी को रोककर रखा गया है।
शिकायत पत्र में सीधा आरोप है कि जनपद ceo और संबंधित अधिकारी के बीच आपसी गहरी सांठगांठ है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं में वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार को अंजाम देने की नीयत से ही राजीव तिवारी को मुंगेली से रिलीव नहीं किया गया। सवाल यह उठता है कि क्या सीईओ संतोष घोसले शासन के नियमों से भी ऊपर हैं, जो वे मंत्रालय के आदेशों की सरेआम अनदेखी कर रहे हैं?
नियम विरुद्ध वेतन आहरण और वित्तीय अनियमितता
नियमों को ताक पर रखकर राजीव तिवारी का वेतन भी मुंगेली जनपद से ही लगातार आहरित होता रहा, जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। हाल ही में जिला पंचायत मुंगेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) गोकुल राम रावटे ने मामले का संज्ञान लेते हुए जनपद पंचायत मुंगेली को पत्र जारी कर 10 दिवस के भीतर नियमानुसार कड़ा रुख अपनाने और भारमुक्त करने की चेतावनी दी है।

सीओ संतोष घोसले और पूरी व्यवस्था से उठते तीखे सवाल:
स्थानांतरण आदेश के 21 महीने बाद भी राजीव तिवारी को कार्यमुक्त न करके जनपद सीईओ संतोष घोसले किसे और क्यों फायदा पहुंचा रहे हैं?
क्या मुंगेली जनपद में योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय लेन-देन में ऐसा कोई खेल चल रहा है, जिसे छिपाने के लिए राजीव तिवारी का रहना ‘जरूरी’ बना दिया गया है?
शासन और मंत्रालय के आदेशों का सरेआम उल्लंघन करने पर क्या सीईओ संतोष घोसले और संबंधित आहरण-संवितरण अधिकारी पर सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
प्रशासनिक गलियारों में अब यह चर्चा जोरों पर है कि जिला पंचायत सीईओ के सख्त रुख के बाद क्या जनपद सीईओ संतोष घोसले स्थानांतरित अधिकारी को भारमुक्त करेंगे या फिर अपने चहेते अधिकारी को बचाने के लिए नियमों की बलि चढ़ाने का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
