कार्यमुक्ति के 8 महीने बाद जॉइनिंग! सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, आखिर किसकी शह पर हुआ बिना काम वेतन का खेल?
मुंगेली:
सरकारी नौकरी और प्रशासनिक अनुशासन को ठेंगा दिखाने का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। (24dailynewstimes.blogspot.com) की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, जिला शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले मामलों में नियमों की धज्जियां किस प्रकार उड़ाई जाती हैं, इसकी बानगी मुंगेली जिले में देखने को मिली है। मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांकी में पदस्थ व्याख्याता (अंग्रेजी) लीला श्रीवास्तव के स्थानांतरण, कार्यमुक्ति और संदिग्ध वेतन आहरण से जुड़ा है।

‘24 डेली न्यूज़ टाइम्स’ की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वे प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए काफी हैं। यह पूरा मामला गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है:
1. आठ महीने का लंबा अंतराल—कार्यमुक्ति जनवरी में, जॉइनिंग अक्टूबर में!
रिपोर्ट के मुताबिक, 30 सितंबर 2022 को लीला श्रीवास्तव का प्रशासनिक स्थानांतरण बांकी (मुंगेली) से गोढ़ीकला (बेमेतरा) के लिए किया गया था। न्यायालय से राहत न मिलने और उच्च स्तर पर अभ्यावेदन खारिज होने के बाद, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय मुंगेली ने 19 जनवरी 2023 को उन्हें तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया था।
नियमों और आदेशों के अनुसार उन्हें तय समयसीमा में नए स्थान पर कार्यभार संभालना था, लेकिन हैरत की बात यह है कि उन्होंने गोढ़ीकला विद्यालय में 7 अक्टूबर 2023 को जाकर कार्यभार ग्रहण किया। यानी सीधे तौर पर करीब 8 महीने का अंतर!
2. बिना कार्यभार संभाले वेतन का आहरण?
सबसे तीखा और गंभीर सवाल इस बात पर उठता है कि जब शिक्षिका को जनवरी 2023 में ही कार्यमुक्त कर दिया गया था और उन्होंने अक्टूबर 2023 तक नए स्थान पर कार्यभार नहीं संभाला था, तो इन 8 महीनों के दौरान उनकी उपस्थिति कहाँ दर्ज थी? ‘24 डेली न्यूज़ टाइम्स’ की खबर के अनुसार, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांकी के प्राचार्य द्वारा फरवरी 2023 में सूचना देने के बावजूद, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुंगेली के आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा 25 फरवरी 2023 को बिल क्रमांक 733 के माध्यम से वेतन आहरित किए जाने का गंभीर आरोप है।
यदि बिना सेवा दिए या बिना वैध उपस्थिति के सरकारी खजाने से वेतन का आहरण हुआ है, तो यह सीधे तौर पर शासकीय धन के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार का खुला मामला है।
3. एक ही पद पर दो शिक्षकों को भुगतान का पेच
वेबसाइट की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि लीला श्रीवास्तव के स्थानांतरación के बाद उनके स्थान पर दूसरे शिक्षक (नवल किशोर साहू) ने अक्टूबर 2022 में ही अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी थीं। ऐसी स्थिति में एक ही पद पर दो लोगों की उपस्थिति और वेतन समायोजन को लेकर विभाग की भूमिका पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।
निष्कर्ष और तीखा सवाल
यह पूरा प्रकरण शिक्षा विभाग के भीतर बैठे लापरवाह और भ्रष्ट तंत्र की कलई खोलता है। क्या सरकारी वेतन अब बिना काम किए सिर्फ फाइलों की हेराफेरी पर मिलता रहेगा? ‘24 डेली न्यूज़ टाइम्स’ द्वारा उजागर किए गए इन गंभीर दस्तावेजों और तारीखों के हेरफेर की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच होना अनिवार्य है। यदि इन 8 महीनों के दौरान अनियमित तरीके से वेतन का भुगतान किया गया है, तो न केवल उस राशि की वसूली होनी चाहिए, बल्कि इस खेल में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि प्रशासनिक व्यवस्था की गरिमा बची रह सके।
