मुंगेली का ‘स्विट्जरलैंड’ पीपरपारा: कुदरत की अनमोल सौगात, पर सरकारी उपेक्षा का शिकार
मुंगेली का ‘स्विट्जरलैंड’ पीपरपारा: कुदरत की अनमोल सौगात, पर सरकारी उपेक्षा का शिकार

मुंगेली। आज सुबह लगभग 10:30 बजे जिले के ग्राम पीपरपारा (पालचुवा) में सड़क से लगे खेत के पार दो हिरणों को स्वच्छंद रूप से अटखेलियां करते देखा गया। आगर नदी की गोद में बसे इस खूबसूरत गांव के लिए वन्यजीवों की मौजूदगी नई बात नहीं है।
यह वही गांव है जहां:
* 2 साल पहले: हिरणों के एक बिछड़े हुए समूह से 2 हिरण देखे गए थे।
* साल 2019: पीपरपारा, नुनियाकछार और जमाहा के खेतों में दुर्लभ ‘वन भैंसा’ (राज्य पशु) का समूह विचरण करता पाया गया था।
* साल 2016-17: कड़ाके की ठंड में एक चीता देखा गया था, जिसे ग्रामीणों ने बाघ समझकर दहशत और कौतूहल का अनुभव किया था।
अचानकमार टाइगर रिजर्व और अमरकंटक के घने जंगलों की सीमा से सटा होने के कारण यह पूरा क्षेत्र प्राकृतिक रूप से वन्यजीवों के लिए एक आदर्श और सुरक्षित गलियारा (Corridor) साबित हो रहा है। यही वजह है कि अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के कारण ग्राम पीपरपारा को “मुंगेली जिले का स्विट्जरलैंड” भी कहा जाता है।
उपेक्षा का शिकार मुंगेली का प्राकृतिक सौंदर्य
तमाम संभावनाओं के बावजूद शासन और प्रशासन की मंशा पर सवाल उठना लाजमी है। आज तक इस पूरे क्षेत्र में न तो कोई इको-टूरिज्म रिजॉर्ट विकसित किया गया, न ही किसी जैव-विविधता उद्यान या संरक्षित क्षेत्र (Protected Zone) का निर्माण हुआ। संरक्षण के अभाव में मुंगेली जिला प्रकृति प्रेमियों के लिए एक राष्ट्रीय पहचान बनते-बनते रह गया।
मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा और संरक्षण का संदेश
सड़कों और आबादी वाले खेतों के पास हिरणों की यह मौजूदगी जितनी सुखद है, उतनी ही चिंताजनक भी है।
* इंसानों से वन्यजीवों का बचाव: निर्दोष बेजुबान अक्सर सड़क हादसों, आवारा कुत्तों के हमलों या शिकारियों का शिकार बन जाते हैं।
* वन्यजीवों से इंसानों का बचाव: बड़े हिंसक वन्यजीवों (जैसे तेंदुआ/चीता) की मौजूदगी ग्रामीणों और मवेशियों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
वक्त की मांग: मुंगेली को मिले ‘टूरिस्ट हब’ का दर्जा
आज दिखे हिरणों के जोड़े ने एक बार फिर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, वन विभाग और समाजसेवी संस्थाओं को नींद से जागने का संकेत दिया है।
यदि समय रहते मुंगेली जिले के इस बेल्ट को एक संरक्षित अभयारण्य (Sanctuary) या इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाए, तो न केवल वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, बल्कि क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए साधन भी पैदा होंगे।
शासन-प्रशासन को चाहिए कि वे पीपरपारा और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बाड़, वन्यजीव कॉरिडोर गाइडलाइन्स और टूरिज्म कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर गंभीरता से काम शुरू करें—ताकि मुंगेली की इस प्राकृतिक धरोहर को एक नई पहचान मिल सके।
