बिलासपुर: सेंवार के अस्थायी गोठान में भुखमरी व अव्यवस्था के चलते 5 मवेशियों की मौत, विश्व हिंदू महासभा ने जताई गहरी नाराजगी; उच्चस्तरीय जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग।

बिलासपुर: सेंवार के अस्थायी गोठान में भुखमरी व अव्यवस्था के चलते 5 मवेशियों की मौत, विश्व हिंदू महासभा ने जताई गहरी नाराजगी; उच्चस्तरीय जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग

बिल्हा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सेंवार स्थित अस्थायी गोठान में प्रशासनिक उपेक्षा और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण 5 मवेशियों की दर्दनाक मौत का मामला सामने आया है। खेतों में खड़ी फसलों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए ग्रामीणों की सहमति से भाठा क्षेत्र में बनाए गए इस अस्थायी गोठान में चारे-पानी और नियमित देखभाल की कमी के चलते मवेशियों ने दम तोड़ दिया। इस अमानवीय एवं दुखद घटना से स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ विभिन्न संगठनों में भी भारी आक्रोश व्याप्त है।
विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का कड़ा रुख एवं सुधारात्मक प्रस्ताव:

इस अत्यंत संवेदनशील और हृदयविदारक घटना पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित विकास दुबे ने घोर निंदा व्यक्त की है। उन्होंने छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल को निर्देशित किया है कि इस घटना के पीछे जो भी दोषी अधिकारी-कर्मचारी या व्यक्ति हैं, उन पर कठोर से कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पंडित विकास दुबे ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह बहुत बड़ी विडंबना है कि समाज में लोग नवदुर्गा और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान तो धूमधाम से मनाते हैं, जबकि ऐसी सनातन मान्यता है कि समस्त देवी-देवता गौ माता के शरीर मेंि विराजते हैं। इसके बावजूद आज गौ माता की उपेक्षा हो रही है। स्थिति यह है कि गोपालक भी दूध देना बंद करने पर गायों को सड़कों पर छोड़ देते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि यद्यपि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गोठान व गौधाम के नाम पर कई योजनाएं संचालित करने के दावे किए जाते हैं, परंतु धरातल पर रिपोर्ट यह है कि गोवंश गोठानों में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहा है। ऐसी स्थिति में यह एक बड़ा प्रश्नचिह्न है कि इन मौतों का जिम्मेदार कौन है? भविष्य में इस तरह की अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े कदम उठाना बेहद आवश्यक है।
इस संबंध में विश्व हिंदू महासभा जल्द ही पूरे छत्तीसगढ़ में गुरुकुल आधारित गौशालाओं के संवैधानिक रूप से निर्माण व संचालन हेतु एक ठोस प्रस्ताव शासन के समक्ष रखेगी और छत्तीसगढ़ के संबंधित जिला कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर नकेल कसने की मांग करेगी।
घटना का विवरण एवं मुख्य बिंदु:
* समय पर इलाज का अभाव: ग्रामीणों के अनुसार, गोठान में बीमार गायें दिनभर तड़पती रहीं, परंतु शाम तक कोई भी पशु चिकित्सक या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
* निगरानी तंत्र पूरी तरह विफल: घटना के दो घंटे बाद तक ग्राम पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी। सरपंच और उपसरपंच ने स्वीकार किया कि उन्हें देरी से सूचना प्राप्त हुई, जिससे गोठान के संचालन और निगरानी में लगी टीम की गंभीर लापरवाही उजागर होती है।
* पूर्व में भी हो चुकी हैं घटनाएं: क्षेत्रवासियों का कहना है कि सीपत के ग्राम झलमला और जैतपुर स्थित श्रीधाम गोधाम में भी कीचड़, भूख-प्यास और अव्यवस्था के कारण पूर्व में दर्जनों मवेशियों की मौत हो चुकी है।
प्रशासनिक एवं जनप्रतिनिधियों के वक्तव्य:
> दिलहरण रजक (सरपंच, ग्राम पंचायत सेंवार):
> “गोठान में गायों की मौत की जानकारी करीब दो घंटे बाद मिली। व्यवस्थाओं में कहां चूक हुई, इसकी पूरी समीक्षा की जाएगी। चारा-पानी और बीमार पशुओं के नियमित इलाज के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय होगी。”
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> धीरेंद्र दुबे (जिला अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग, बिलासपुर):
> “सेंवार गोठान में गोवंश की मौत की सूचना मिली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पशु चिकित्सालय की टीम गठित कर तत्काल मौके पर भेजी जाएगी। पूरी रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी。”
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> नंद कुमार चौधरी (एसडीएम, बिल्हा):
> “पशु चिकित्सा विभाग के मैदानी अमले को तुरंत मौके पर भेजकर बीमार गायों के समुचित इलाज और मौतों के वास्तविक कारणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच प्रतिवेदन के आधार पर लापरवाहों पर विधिवत अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की जाएगी。”
>
ग्रामीणों एवं महासभा की प्रमुख मांगें:
* निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच: गोठान प्रबंधन, पंचायत समन्वय एवं पशु चिकित्सा विभाग के मैदानी अमले की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
* दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई: ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों एवं जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
* बुनियादी सुविधाओं की बहाली: प्रदेश के समस्त गोठानों में नियमित हरा चारा, साफ पेयजल, छाया और पशु चिकित्सकों की दैनिक उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।

