रतनपुर का ‘चपोरा आश्रम’ विवाद: साध्वी के आरोपों की खुली पोल, छत्तीसगढ़ के मुख्य संतों ने नगर पंचायत अध्यक्ष को बताया बेदाग धर्म की आड़ में जमीन हड़पने के पुराने खेल का खुलासा; विक्टिम कार्ड खेल फंसाने की साजिश उजागर।
रतनपुर का ‘चपोरा आश्रम’ विवाद: साध्वी के आरोपों की खुली पोल, छत्तीसगढ़ के मुख्य संतों ने नगर पंचायत अध्यक्ष को बताया बेदाग
धर्म की आड़ में जमीन हड़पने के पुराने खेल का खुलासा; विक्टिम कार्ड खेल फंसाने की साजिश उजागर

बिलासपुर। शांत और धार्मिक नगरी रतनपुर की फिजा में भूचाल लाने वाले ‘चपोरा आश्रम विवाद’ में एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आ गया है, जिसने कथित पीड़िता साध्वी को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। कल तक जो मामला ‘महिला संत के उत्पीड़न’ का नजर आ रहा था, आज वह करोड़ों की कीमती जमीन पर अवैध कब्जे और ब्लैकमेलिंग के खतरनाक खेल में तब्दील होता दिख रहा है। बिलासपुर पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंची इस हाई-प्रोफाइल जंग में अब नगर पंचायत अध्यक्ष को संत समाज और जनता का भारी समर्थन मिला है, वहीं साध्वी के विवादित अतीत के काले पन्ने खुलने शुरू हो गए हैं।
बेदाग छवि के अध्यक्ष के समर्थन में उतरा संत समाज
इस पूरे विवाद के केंद्र में घसीटे गए रतनपुर के लोकप्रिय भाजपा नेता और नगर पंचायत अध्यक्ष लवकुश कश्यप की छवि को धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश बेनपकाब हुई है। क्षेत्र के विकास और जनसेवा में सदैव अग्रणी रहने वाले अध्यक्ष जी के समर्थन में छत्तीसगढ़ के तमाम शीर्ष और मुख्य साधु-संत खुलकर सामने आ गए हैं। संतों ने दो टूक शब्दों में कहा है कि राजनीतिक रसूख और केंद्रीय मंत्रियों के नाम का झूठा भय दिखाकर अध्यक्ष जी पर कीचड़ उछाला जा रहा है, ताकि जनभावनाओं को भड़काया जा सके।
साध्वी का पुराना ‘ट्रैक रिकॉर्ड’: जमीन हड़पने के कई मामले आए सामने
इस मामले में सबसे बड़ा धमाका साध्वी पद्मिनी पुरी के अतीत को लेकर हुआ है। स्थानीय सूत्रों और दस्तावेजों के अनुसार, साध्वी का इतिहास पहले भी कई संदिग्ध भूमि विवादों से जुड़ा रहा है। उन पर आरोप है कि वे ‘साधु’ चोले की आड़ में भोले-भाले लोगों को डरा-धमकाकर आश्रमों और कीमती जमीनों को हड़पने का काम करती रही हैं।
साध्वी के इसी विवादित ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए छत्तीसगढ़ के सभी मुख्य और प्रामाणिक संतों ने इस मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया है। मुख्य संतों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा:
”इस विवाद में साधु समाज या किसी धार्मिक परंपरा का कोई लेना-देना नहीं है। कोई भी संवैधानिक या असली साधु पद्मिनी पुरी के साथ खड़ा नहीं है। यह धर्म की आड़ में निजी स्वार्थ साधने और जमीनों पर गिद्ध दृष्टि रखने का व्यक्तिगत मामला है।”
वीडियो साक्ष्य ने खोली पोल, ‘विक्टिम कार्ड’ हुआ फेल
साध्वी ने आरोप लगाया था कि स्व. दयाराम दास महाराज के भंडारे में उनका अपमान हुआ और उन्हें प्रताड़ित किया गया। लेकिन 24 घंटे के भीतर श्री रमेश दास महाराज की अगुवाई में संतों ने जो वीडियो साक्ष्य जारी किए, उसने साध्वी के दावों की हवा निकाल दी। वीडियो में साध्वी पूरे सम्मान के साथ भंडारे में मौजूद दिखाई दे रही हैं, जहाँ उन्हें पूर्ण आदर और दक्षिणा भी दी गई। इस अकाट्य सबूत के बाद साध्वी का ‘इमोशनल कार्ड’ पूरी तरह फेल साबित हो गया है।
पुलिस की रडार पर साध्वी का अतीत, गहन जांच शुरू
बिलासपुर पुलिस अब इस मामले को सिर्फ एकतरफा शिकायत के रूप में नहीं देख रही है। पुलिस की एक विशेष टीम अब साध्वी पद्मिनी पुरी के पुराने इतिहास को खंगालने में जुट गई है कि इससे पहले उन्होंने कहाँ-कहाँ जमीनों पर अवैध कब्जे की कोशिशें की हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, “मामला बेहद संवेदनशील है। एक प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधि (अध्यक्ष जी) की छवि और आश्रम की जमीनों से जुड़े पुराने विवादों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। चपोरा आश्रम के गवाहों और वीडियो फुटेज के आधार पर जल्द ही इस पूरे खेल का पर्दाफाश किया जाएगा।”
रतनपुर की जनता और संत समाज अब एक सुर में इस साजिश के खिलाफ खड़ा है। अब देखना यह है कि पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद जमीन हड़पने के इस खेल के मास्टरमाइंड पर कानून का डंडा कब चलता है।
