बिलासपुर में ‘थाना गोद’ व्यवस्था लागू: थानों की सीधी निगरानी से पुलिसिंग में आएगी तेजी — वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने संभाली सिविल लाइन की कमान —

बिलासपुर में ‘थाना गोद’ व्यवस्था लागू: थानों की सीधी निगरानी से पुलिसिंग में आएगी तेजी
— वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने संभाली सिविल लाइन की कमान —
10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके भारतीय पुलिस सेवा एवं राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को मिली थानों के पुनर्गठन और सीधी निगरानी की कमान
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सिविल लाइन थाने में विवेचकों की ली बैठक; लंबित प्रकरणों में अकारण विलंब पर अर्थदंड व विभागीय कार्रवाई की चेतावनी

भारतीय न्याय संहिता के तहत समय-सीमा में जांच पूरी करने, इलेक्ट्रॉनिक समंस व मेडिकल रिपोर्ट के त्वरित निस्तारण के सख्त निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। राज्य शासन के निर्देशों के परिपालन में 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके वरिष्ठ भारतीय पुलिस सेवा एवं राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को एक-एक थाना गोद देकर वहां की पुलिसिंग, लंबित मामलों और प्रशासनिक व्यवस्था की सीधी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी कड़ी में बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने सिविल लाइन थाना गोद लेकर समीक्षा शुरू कर दी है।
अभिलेखों का सूक्ष्म निरीक्षण और गहन समीक्षा

थाना गोद लेने के तत्काल बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह सोमवार शाम सिविल लाइन थाने पहुंचे। उन्होंने थाने के रोजनामचा (दैनिक डायरी), अपराध रजिस्टर, मालखाना एवं अन्य वैधानिक अभिलेखों का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। तत्पश्चात उन्होंने थाने में दर्ज लंबित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।
विवेचकों की बैठक, तय हुई प्रशासनिक जवाबदेही
लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण हेतु वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने विवेचना अधिकारियों के साथ लगभग 45 मिनट तक समीक्षा बैठक की। प्रत्येक प्रकरण में विलंब के कारणों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय न्याय संहिता के नए प्रावधानों के तहत प्रकरणों का अकारण लंबित रहना स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने सख्त लहजे में हिदायत दी कि यदि जांच में बिना किसी उचित कारण के देरी पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध अर्थदंड सहित दंडात्मक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इलेक्ट्रॉनिक समंस, मेडिकल रिपोर्ट और साक्ष्य संकलन पर जोर
समीक्षा के दौरान इलेक्ट्रॉनिक समंस, वारंटों की तामीली की स्थिति और डिजिटल पोर्टल के माध्यम से प्राप्त होने वाली मेडिकल रिपोर्टों की प्रगति की समीक्षा की गई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने निर्देशित किया कि किसी भी दशा में चिकित्सकीय साक्ष्यों या आवश्यक दस्तावेजों के अभाव में विवेचना लंबित न रहे। इसके लिए संबंधित विभागों से निरंतर समन्वय बनाकर समय-सीमा के भीतर दस्तावेज प्राप्त किए जाएं।
डिजिटल रिकॉर्ड संधारण की सराहना व जनसंवाद पर बल
निरीक्षण के दौरान थाने में अपराध एवं अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क प्रणाली के तहत ऑनलाइन डेटा संधारण और रिकॉर्ड प्रबंधन की स्थिति बेहतर पाए जाने पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने पुलिसकर्मियों की सराहना की तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाली टीम को पुरस्कृत करने की घोषणा की।
इसके साथ ही उन्होंने थाना परिसर के रख-रखाव, रंग-रोगन और नए प्रवेश द्वार के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि “थाना केवल पुलिस का कार्यस्थल नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान केंद्र है। अतः फरियादियों के साथ पुलिस का व्यवहार अत्यंत संवेदनशील, पारदर्शी और सहयोगात्मक होना चाहिए।”
वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा गोद लिए गए प्रमुख थानों का विवरण:
सिविल लाइन थाना: रजनेश सिंह (वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक)
तारबाहर थाना: पंकज पटेल (अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, नगर)
महिला थाना: डी.आर. टंडन (उप पुलिस अधीक्षक)
सरकंडा थाना: अनिता प्रभा मिंज (उप पुलिस अधीक्षक)
कोटा थाना: शिव चरण परिहार (उप पुलिस अधीक्षक)
चकरभाठा थाना: पंकज अवस्थी (उप पुलिस अधीक्षक)
सकरी थाना: मंजूलता कुजूर (उप पुलिस अधीक्षक)
निरीक्षण एवं समीक्षा के दौरान नगर पुलिस अधीक्षक परमेश्वर तिलकवार, थाना प्रभारी किशोर केंवट सहित थाने के समस्त अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। वरिष्ठ अधिकारियों की इस सीधी निगरानी से लंबित अपराधों के निस्तारण में तेजी आने के साथ ही जिले की कानून-व्यवस्था में व्यापक सुधार की उम्मीद है।

