बिलासपुर के चकरभाठा स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी दवाओं और एंटी-रेबीज इंजेक्शन का टोटा, दावों और धरातल की विसंगति आई सामने।
बिलासपुर के चकरभाठा स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी दवाओं और एंटी-रेबीज इंजेक्शन का टोटा, दावों और धरातल की विसंगति आई सामने।
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)। राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना’ के अंतर्गत बिलासपुर निवासी श्री चंद्रांशु साहू के उपचार हेतु ₹5,02,918 की संवेदनशील सहायता राशि की स्वीकृति प्रशासनिक सजगता का स्वागत योग्य उदाहरण है। जनहितैषी दावों के अनुसार, आर्थिक अभाव के कारण कोई भी नागरिक उपचार से वंचित न रहे, यह सुशासन की प्राथमिक प्रतिबद्धता होनी चाहिए। किंतु, इसी जिले के ग्रामीण व उपनगरीय क्षेत्रों से आ रही जमीनी रिपोर्टें इन दावों और धरातलीय यथार्थ के बीच एक गंभीर विसंगति को रेखांकित करती हैं।
अति-विशिष्ट (VIP) क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्र में बुनियादी सुविधाओं का अभाव
उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) और हवाई अड्डे (एयरपोर्ट) जैसे अति-विशिष्ट संस्थानों के मध्य स्थित चकरभाठा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जब मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा औचक निरीक्षण किया गया, तो वहां स्वास्थ्य सेवाओं की अत्यंत चिंताजनक स्थिति उजागर हुई। इस महत्वपूर्ण केंद्र में आवारा पशुओं के काटने पर दिया जाने वाला अनिवार्य ‘एंटी-रेबीज इंजेक्शन’ (ARV) विगत कई दिनों से अनुपलब्ध है। गोपनीयता की शर्त पर अस्पताल के संविदा व नियमित स्टाफ ने स्वीकार किया कि दवाओं की मांग (इंडेंट) भेजने के उपरांत भी लंबे समय से आपूर्ति बाधित है, जिससे आवश्यक दवाओं का स्टॉक समाप्त हो चुका है।
इसके विपरीत, जब समीपवर्ती बिल्हा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति देखी गई, तो वहां एंटी-रेबीज इंजेक्शन तो उपलब्ध था, किंतु प्रशासनिक अनुशासन का अभाव नजर आया। वहां सुरक्षाकर्मियों व अन्य स्टाफ के कार्य के प्रति उदासीन रवैये के कारण सुदूर क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
सार्वजनिक मंचों से भी उठ चुके हैं व्यवस्था पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग की इस ढांचागत विफलता पर न केवल आम जनता, बल्कि स्वयं सत्तारूढ़ व्यवस्था के वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने भी चिंता व्यक्त की है। हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय शासकीय कार्यक्रम में, मुख्यमंत्री की गरिमामयी उपस्थिति में, वरिष्ठ राजनेताओं ने सार्वजनिक मंच से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की घोषणाएं तब तक बेमानी हैं, जब तक ग्रामीण और ब्लॉक स्तर के प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर ली जाती।
संवैधानिक और नीतिगत अपेक्षाएं
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अंतर्गत स्वास्थ्य का अधिकार प्रदान करता है। लोक कल्याणकारी राज्य की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाए।
एक ओर जहां गंभीर बीमारियों के लिए लाखों रुपये की सहायता राशि स्वीकृत कर सरकार अपनी संवेदनशीलता प्रदर्शित कर रही है, वहीं दूसरी ओर चकरभाठा जैसे संवेदनशील केंद्रों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन जैसी अत्यंत बुनियादी दवाओं का न होना जनस्वास्थ्य प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल विज्ञापनों और घोषणाओं तक सीमित न रहकर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को तत्काल सुदृढ़ करे, ताकि सुशासन का लाभ धरातल पर दिखाई दे।

