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विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता हाई कोर्ट राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व हिंदू महासभा विकास दुबे ने संयुक्त रूप से घोषणा की।

विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ एवं वरिष्ठ अधिवक्ता हाई कोर्ट विकास दुबे ने संयुक्त रूप से घोषणा की।

शंकराचार्य धर्मशासन के सर्वोच्च शिखर, संसद् का कोई कानून इस पद को समाप्त नहीं कर सकता: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती।

​मैनपुरी की ‘गविष्ठि यात्रा’ में उमड़ा जनसैलाब; सर्वधर्म समाज ने सुर में सुर मिलाकर की ‘गौ माता’ को राष्ट्र-माता घोषित करने की मांग।
​उत्तर प्रदेश की ८१ दिवसीय परिक्रमा के उपरांत, आगामी जुलाई से छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर आरंभ होगा पूज्यपाद का भव्य ‘८१ दिवसीय चातुर्मास प्रवास’।
​विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ एवं विशेष कोर कमेटी संभालेगी छत्तीसगढ़ चातुर्मास की संपूर्ण जिम्मेदारी।
​मैनपुरी/बिलासपुर, 05 जून 2026
​सनातन धर्म एवं संस्कृति के सर्वोच्च नीति-निर्देशक, उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्री: अविमुक्तेश्वरानन्द: सरस्वती ‘१००८’ महाराज की ऐतिहासिक ८१ दिवसीय ‘गविष्ठि (गौ रक्षार्थ धर्मयुद्ध) संकल्प यात्रा’ आज उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जनपद में संतों और सर्वसमाज के अभूपूर्व स्वागत के साथ संपन्न हुई। महाराजश्री के आधिकारिक मीडिया प्रभारी संजय पांडे तथा विश्व हिंदू महासभा के गौ प्रकोष्ठ प्रभारी छत्तीसगढ़ रामेश्वर पांडे उर्फ समसानी फक्कड़ बाबा एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ द्वारा जारी संयुक्त विवरण के अनुसार, इस महा-अभियान का मूल मंत्र “अहं हनं वृत्रं गविष्ठौ” देश में संवैधानिक गौ-संरक्षण का नया अध्याय लिख रहा है।
​मुख्य समाचार बिंदु (Short & Clear Points):
​शंकराचार्य शासकों के भी शासक: मैनपुरी की धर्मसभा में महाराजश्री ने कहा कि शंकराचार्य केवल संन्यासी नहीं, बल्कि धर्मशासन के सर्वोच्च शिखर हैं। ब्रिटिश काल में राजाओं की रियासतें भले समाप्त हो गईं, लेकिन भारतीय संसद् का कोई भी कानून शंकराचार्य के पद और संप्रभु अधिकारों को समाप्त नहीं कर सकता। धर्मदण्ड के बिना कोई भी राज्यसत्ता समाज को नहीं संभाल सकती।
​असली बनाम नकली हिंदुत्व का परीक्षण: महाराजश्री ने स्पष्ट किया कि काशी में ४० दिनों तक प्रवास के बाद भी सरकार द्वारा गाय को राष्ट्र-माता घोषित न करना राजनीतिक मौन को दर्शाता है। मुख्यमंत्री कभी शंकराचार्य नहीं बन सकते, क्योंकि शंकराचार्य संपूर्ण विश्व के गुरु हैं।
​मुस्लिम समाज ने उठाई गौ-संरक्षण की आवाज़: मैनपुरी में मदीन इलाही और मोहम्मद खालिद सहित दर्जन भर मुस्लिम प्रतिनिधियों ने महाराजश्री से भेंट कर प्रधानमंत्री तक ‘गाय को राष्ट्र-माता घोषित करने’ का संदेश पहुंचाने की गुहार लगाई। महाराजश्री ने कहा कि आज देश का सजग मुसलमान वह सत्य कह रहा है, जिसे तथाकथित हिंदूवादी राजनेता अपनी राजनीतिक विवशताओं के कारण बोल नहीं पा रहे हैं।
​सत्य सनातन की राजनीति का आह्वान: पूज्यपाद ने कहा कि देश का ७५ करोड़ सनातनी हिंदू समाज राजनीतिक शोरशराबे से दूर और बेआवाज़ है। इसी बेआवाज़ी को दूर करने के लिए अब ‘सत्य सनातन की राजनीति’ का उदय अनिवार्य है। मांगों पर ठोस कदम न उठाए जाने पर २४ जुलाई २०२६ को लखनऊ में एक अक्षौहिणी सेना (२,१८,७०० धर्म सैनिक) के साथ आंदोलन के अगले चरण का उद्घोष किया जाएगा।
​छत्तीसगढ़ में ८१ दिवसीय ऐतिहासिक चातुर्मास: ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के अवसर पर विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ एवं पंडित विकास दुबे ने संयुक्त रूप से घोषणा की कि उत्तर प्रदेश की यात्रा संपन्न कर पूज्य शंकराचार्य जी महाराज आगामी जुलाई माह में छत्तीसगढ़ पधार रहे हैं। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर महाराज श्री का ८१ दिवसीय ऐतिहासिक चातुर्मास प्रवास सुनिश्चित हुआ है, जिसकी सुरक्षा और संचालन की पूर्ण जिम्मेदारी महासभा की नवगठित ‘विशेष कोर कमेटी’ प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल एवं समुद्र शास्त्री की संयुक्त भी संभालेगी।
​प्रशासनिक हठधर्मिता पर अखिलेश-डिम्पल यादव ने मांगी क्षमा: कन्नौज में प्रशासनिक तानाशाही के कारण शंकराचार्य जी को रात में सड़क पर बिताने पड़े समय पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए सपा प्रमुख श्री अखिलेश यादव और सांसद श्रीमती डिम्पल यादव ने सनातनी समाज से सार्वजनिक क्षमा याचना की। सांसद डिम्पल यादव ने कहा कि संतों का अपमान संपूर्ण सनातन का अपमान है, जिसका न्याय स्वयं प्रकृति करेगी।
​पर्यावरण दिवस संदेश: विज्ञप्ति के अंत में संदेश दिया गया कि वृक्ष इस धरा पर परमात्मा के निर्बाध संवाहक हैं। प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनकर ही मानवता विनाश से बच सकती है। संपूर्ण सनातनी समाज से छत्तीसगढ़ में होने वाले इस ऐतिहासिक चातुर्मास महाअभियान में तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया गया है।


​भवदीय,
केंद्रीय मीडिया डेस्क,
विश्व हिंदू महासभा (राष्ट्रीय एवं छत्तीसगढ़ इकाई)
एवं
आधिकारिक मीडिया प्रभारी,
ज्योतिष्पीठ सचिवालय।

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