कोरबा के हरदी बाजार की नाबालिग मुस्कान चौहान आत्महत्या प्रकरण में न्याय की मांग तेज: राज्यपाल और राष्ट्रपति सचिवालय ने दिए जांच के निर्देश

कोरबा / हरदी बाजार:

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के हरदी बाजार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बहुचर्चित नाबालिग मुस्कान चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में न्याय की मांग अब जोर पकड़ती जा रही है। मामले में निष्पक्ष जांच और कथित पुलिस लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर प्रशासनिक और संवैधानिक स्तर पर बड़ी पहल सामने आई है। ‘सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़’ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे द्वारा की गई शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए महामहिम राज्यपाल और राष्ट्रपति सचिवालय ने उच्च स्तरीय प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

​प्रमुख बिंदु एवं प्रशासनिक पत्र:

​राज्यपाल सचिवालय का निर्देश: राज्यपाल सचिवालय, छत्तीसगढ़ ने 30 सितंबर 2026 को पुलिस महानिदेशक (DGP), पुलिस मुख्यालय, नया रायपुर को पत्र (क्रमांक I/666600/2026/6902/शि.प्र.) जारी किया है। इसमें हरदी बाजार थाना पुलिस की कथित लापरवाही की निष्पक्ष जांच और कठोर वैधानिक कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। साथ ही, की गई कार्रवाई से आवेदक प्रमोद कुमार बंजारे और सचिवालय को अवगत कराने को कहा गया है।

​राष्ट्रपति सचिवालय की पहल: राष्ट्रपति सचिवालय के लोक शिकायत अनुभाग ने 27 सितंबर 2026 को पत्र (क्रमांक P2/L/202609215861) के माध्यम से इस याचिका को छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को उचित ध्यानार्थ भेजा है। सचिवालय ने निर्देश दिए हैं कि याचिका पर की गई कार्रवाई की सूचना सीधे याचिकाकर्ता को दी जाए।

​क्या है पूरा मामला?

​सर्व पत्रकार एकता महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेशाध्यक्ष प्रमोद कुमार बंजारे (निवासी ग्राम मुड़ापार, पोस्ट कोरबी धतूरा, थाना हरदी बाजार) ने गत 7 सितंबर 2026 को महामहिम राज्यपाल और देश के राष्ट्रपति को अलग-अलग आवेदन और याचिकाएं प्रेषित की थीं।

​शिकायत में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें उठाई गई हैं:

​संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच: नाबालिग मुस्कान चौहान की मौत से जुड़े सभी तथ्यों, साक्ष्यों और परिस्थितियों की पारदर्शी और उच्च स्तरीय जांच।

​पुलिसिया लापरवाही की पड़ताल: हरदी बाजार थाना पुलिस की कथित कार्यप्रणाली और लापरवाही की जांच कर जवाबदेही तय करना।

​दोषियों पर कठोर कार्रवाई: यदि जांच में किसी भी प्रकार के अपराध या अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधितों के विरुद्ध कानून सम्मत कड़ी वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना।

​न्याय की आस और आगे की प्रक्रिया

​राष्ट्रपति और राज्यपाल सचिवालय से पत्र जारी होने के बाद अब मामले की फाइल राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की टेबल तक पहुंच चुकी है। इन पत्रों से यह स्पष्ट होता है कि शिकायत को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। हालांकि, जानकारों का यह भी मानना है कि ये पत्र प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और आवेदन संबंधित विभागों तक प्रेषित करने से जुड़े हैं; इन्हें अंतिम जांच रिपोर्ट या दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता है।

​अब सबकी निगाहें छत्तीसगढ़ शासन, मुख्य सचिव कार्यालय और पुलिस मुख्यालय पर टिकी हैं कि वे इस संवेदनशील मामले में कब और क्या ठोस कदम उठाते हैं तथा पीड़ित परिवार व आवेदक को न्याय दिलाने के लिए कितनी पारदर्शिता दिखाते हैं।

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