कोरबा पाली के अंतर्गत पौराणिक शिव मंदिर में सामाजिक संस्थाओं साधु संतो केक गरिमामई उपस्थित के बीच समुद्र शास्त्री के द्वारा आयोजित हुआ शिव चर्चा
कोरबा पाली के अंतर्गत पौराणिक शिव मंदिर में सामाजिक संस्थाओं साधु संतो केक गरिमामई उपस्थित के बीच समुद्र शास्त्री के द्वारा आयोजित हुआ शिव चर्चा
जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउसबोदरी जिला बिलासपुर के तहत कार्यक्रम के दौरान युवा प्रकोष्ठ फिल्मी कलाकार भोजपुरी सिंगर रितेश दुबे वरिष्ठ पत्रकार राष्ट्रीय संरक्षक अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्रनर्माण सेना कार्यक्रम में हुआ सम्मान ।
इस बीच पाली कटघोरा कोरबा केअतर्गत इस बड़े आयोजन में भारी संख्या में जाम, मेला क्षेत्र का बेहद खस्ताहाल व्यवस्था प्रदर्शन देखने को मिला
कोरबा,पाली कटघोरा में पौराणिक शिव मंदिर में जाकर पूजा अर्चना के साथ आम जनमानस के कल्याण की प्रार्थना पंडित श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री वरिष्ठ पत्रकार हमारे स्तंभ राज रमजान राष्ट्रीय संरक्षक अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना , जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस बोदरी के सअनुक्रम में में सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित किया गया समुद्र शास्त्री द्वारा शिव चर्चा।
संस्था के पदाधिकारियों द्वारा संचालित कार्यक्रम आयोजित की शुरुआत में सामाजिक संस्थाओं में उत्कृष्ट कार्य व पत्रकारों को सम्मानित करते हुए देश में इनकी महत्व को बहुत बड़ा बलिदान व योगदान बताते हुए समुद्र शास्त्री वरिष्ठ पत्रकार अमर स्तंभ आर जे रमझाझर छत्तीसगढ़ मीडिया हाउस जनकल्याण पुनर्वास केंद्र बोदरी, सामाजिक संस्थाओं द्वारा बैठक होगा मुख्य रूप से कई विषय पर चर्चा करते हुए मेला क्षेत्र का परिभ्रमण के साथ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, एवं नवनियुक्त पदाधिकारी द्वारा संविधान सदस्यता अभियान चलाते हुए मुख्य रूप से विश्व महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह को विशेष जिम्मेदारी सौंपी।

-धर्म संसद की कार्यवाही शुरू हुई बैठक संयुक्त कार्यक्रम द्वारा संचालित
गोष्ठी के द्वारा समापन किया जिसमे क्राइम फ्रीइडिया विश्व मानव परमार्थ ट्स्ट ,
लीगल एंड सोशल ग्रुप प्रकोष्ठ की महिलाओं ने किया जल्द ही विश्व मानव परमार ट्रस्ट संपूर्ण भारतीय चैरिटेबल ट्रस्ट के नेतृत्व में 11 सूत्रीय 16.2 के आधार पर ग्राम पंचायत स्तर तक महिला जन जागरण केंद्र का हुआ शुभारंभ के घोषणा करते हुए कार्यक्रम स्थल पर आश्रम गौ शाला पर जोर देते हुए संयुक्त कार्यक्रम द्वारा संचालित गोष्ठी के द्वारा समापन किया ।
धर्म संसद की कार्यवाही शुरू हुई बैठक संयुक्त कार्यक्रम द्वारा संचालित *धर्म संसद: विचार, विस्तार और आत्मनिष्ठ संकल्प*
आज जब समाज अनेक प्रकार की वैचारिक, सांस्कृतिक और नैतिक चुनौतियों से जूझ रहा है, तब “धर्म संसद” जैसे मंच की आवश्यकता और भी अधिक महसूस होती है। यह केवल एक व्हाट्सएप समूह या संगठनात्मक प्रयास नहीं है, बल्कि एक वैचारिक साधना है एक ऐसा प्रयास जो धर्म, मर्यादा और संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिए हुए है।
धर्म संसद किसी प्रचार का माध्यम मात्र नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का अवसर है। यहाँ साझा की जाने वाली विषयवस्तु केवल संदेश नहीं होती, बल्कि वह हमारे आचरण और विचारों को दिशा देने वाली प्रेरणा होती है। जब हम इन संदेशों को पढ़ें, तो हमें अपने कर्तव्यों, अपने संस्कारों और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का स्मरण होता है।
वर्तमान समूह शीघ्र ही 1024 सदस्यों की अधिकतम सीमा तक पहुँचने वाला है। यह केवल एक संख्या नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि समाज में धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। सीमा पूर्ण होते ही नया समूह प्रारंभ किया जाएगा, ताकि यह विचारधारा रुकने न पाए, बल्कि निरंतर आगे बढ़ती रहे।
हमें यह अनुभव होता है कि किसी भी विचार की शक्ति उसके अनुशासन और एकरूपता में निहित होती है। जब प्रत्येक समूह में एक ही विषयवस्तु और आधिकारिक सामग्री साझा की जाती है, तो विचारों की शुद्धता और स्पष्टता बनी रहती है। इससे अनावश्यक भ्रम या मतभेद की संभावना कम होती है और उद्देश्य पर केंद्रित रहना सरल हो जाता है।
इस धर्मयज्ञ में प्रत्येक सदस्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। हम यह मानते हूँ कि जिन लोगों को हम जानते है हमारे मित्र, पड़ोसी और रिश्तेदार उन्हें इस अभियान से जोड़ना हमारा नैतिक दायित्व है। उन्हें हम जानते हैं, उनके संस्कारों और चरित्र से परिचित हैं। यदि वे धर्मनिष्ठ और जागरूक हैं, तो उन्हें इस मंच से जोड़कर हम केवल संख्या नहीं बढ़ा रहे, बल्कि एक विचारधारा को सुदृढ़ कर रहा हैं।
हमारा लक्ष्य केवल हजारों तक सीमित नहीं है हमारा लक्ष्य लाखों हृदयों तक पहुँचना है और यह अनवरत प्रक्रिया अगले 25 वर्षों (2050) तक चलता रहेगा। हम छोटी दौड़ में शामिल नहीं है हम एक मैराथन दौड़ जिससे भारत के साथ-साथ अपने धर्म का प्रचार प्रसार और विकास हो उसके लिए तत्पर हैं। यह विस्तार केवल डिजिटल माध्यम से नहीं, बल्कि आत्मीय संबंधों के माध्यम से होगा। जब हम अपने परिचितों को इस धर्म कल्याण से जोड़ते हैं, तो हम उन्हें एक सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।
हमारे लिए धर्म संसद का हिस्सा होना एक उत्तरदायित्व है संयमित भाषा, मर्यादित व्यवहार और सक्रिय सहभागिता के साथ। हम यह अनुभव करता हैं कि यदि हम सब एक ही धागे से जुड़े हुए हैं, तो हमारी सामूहिक शक्ति असीम है।
अंततः यह केवल एक समूह का विस्तार नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में छोटा सा कदम है। यदि हमें यहाँ साझा किए गए विचार अच्छे लगते हैं, तो मेरा कर्तव्य है कि हम दूसरों को भी इस कल्याण से वंचित न रखें।
यही हमारा आत्मनिष्ठ संकल्प है धर्म संसद के विचारों को अपने जीवन में उतारना और यथासंभव अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना।
कार्यक्रम के अंत में सामाजिक संस्थाओं के सदस्यों के साथ मुख्य रूप से नयन कुलदीप ,आरती जैस्वाल शांति ,मीना ,योगेश, तरुण , राघव,प्रिंस के साथ तमाम भक्तों ने शिव मंदिर के साधु संतों ने सामाजिक संस्थाओं के सदस्य पदाधिकारी के साथ समुद्र शास्त्री का सम्मानित करते हुए प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम समापन किया।
