संवैधानिक दायित्वों और जन-आकांक्षाओं की पूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, विकास कार्यों में कदापि स्वीकार्य नहीं शिथिलता: केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोख़न साहू।
संवैधानिक दायित्वों और जन-आकांक्षाओं की पूर्ति हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता, विकास कार्यों में कदापि स्वीकार्य नहीं शिथिलता: केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोख़न साहू
दिशा समिति की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न: केंद्रीय मंत्री, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं जिला दंडाधिकारी की गरिमामयी उपस्थिति में लोक-कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर हुआ गहन विमर्श
बिलासपुर।
न्यायधानी बिलासपुर स्थित मंथन सभागार में आज जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की अत्यंत महत्वपूर्ण, नीतिगत एवं उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक विधिमान्य रूप से संपन्न हुई। इस गरिमामयी बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोख़न साहू ने की। बैठक में विशिष्ट अतिथि के रूप में बिल्हा क्षेत्र के माननीय विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष श्री धरमलाल कौशिक तथा प्रशासनिक प्रमुख के रूप में बिलासपुर कलेक्टर (जिला दंडाधिकारी) विशेष रूप से उपस्थित रहे।
सभागार में आयोजित इस विमर्श के दौरान केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित लोक-कल्याणकारी तथा लोक-हितैषी योजनाओं, विकासात्मक परियोजनाओं एवं अधोसंरचना निर्माण कार्यों की प्रगति की बिंदुवार, न्यायसंगत एवं विस्तृत समीक्षा की गई।
प्रशासनिक शुचिता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोख़न साहू ने कार्यपालिका के अधिकारियों को संवैधानिक मर्यादाओं और लोक-जवाबदेही का स्मरण कराया। उन्होंने कड़े लहजे में निर्देशित किया कि लोक-धन (सार्वजनिक धन) का सदुपयोग पूर्णतः पारदर्शी, न्यायोचित और निर्धारित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता, लालफीताशाही या गुणवत्ताहीनता को कदापि स्वीकार नहीं किया जाएगा।
”संवैधानिक लोकतंत्र में हमारा अंतिम ध्येय समाज के अंतिम छोर पर खड़े नागरिक तक लोक-कल्याणकारी नीतियों का नियमानुसार एवं शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है। बिलासपुर संभाग और संपूर्ण क्षेत्र का समावेशी, सतत एवं सर्वांगीण विकास हमारी नीतिगत प्राथमिकताओं में शीर्ष पर है।”
— श्री तोख़न साहू, केंद्रीय राज्य मंत्री
सार्थक नीतिगत विमर्श एवं सुधारात्मक सुझाव
समीक्षा बैठक के अंतर्गत संबंधित विभागों के वरिष्ठ प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के साथ जनहित से जुड़े संवेदनशील एवं नीतिगत विषयों पर अत्यंत सार्थक और वैचारिक विमर्श हुआ। जनप्रतिनिधियों ने लोक-महत्व के विभिन्न विषयों पर ध्यानाकर्षण कराया और कार्यपालिका को कार्य-प्रणाली में सुधार लाने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने तथा जन-समस्याओं के त्वरित एवं वैधानिक निराकरण हेतु आवश्यक मार्गदर्शन और अमूल्य नीतिगत सुझाव दिए।
समीक्षा बैठक के प्रमुख वैधानिक व प्रशासनिक बिंदु:
लोक-कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन: सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और कृषि अधोसंरचना से जुड़ी लोक-नीतियों की जमीनी हकीकत और उनके क्रियान्वयन के स्तर का वास्तविक और कड़ा मूल्यांकन किया गया।
गुणवत्ता और मानक निर्धारण: निर्माणाधीन सार्वजनिक संपत्तियों और नागरिक सुविधाओं के विकास में उच्च स्तरीय तकनीकी मानकों को अक्षुण्ण रखने हेतु कड़े दिशा-निर्देश दिए गए।
अंतर्विभागीय समन्वय और सुशासन: प्रशासनिक गतिरोधों को दूर करने के लिए विभिन्न विभागों के मध्य बेहतर अंतर्विभागीय तालमेल (को-ऑर्डिनेशन) स्थापित करने और लंबित फाइलों व परियोजनाओं को शीघ्रता से स्वीकृत करने की हिदायत दी गई।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, तकनीकी विशेषज्ञ एवं समिति के अन्य सम्मानीय और गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

