आधुनिक तकनीक और खाकी का पराक्रम; 10 वर्षीय मासूम से दुष्कर्म का आरोपी रंजीत यादव उर्फ दउआ घने जंगलों में ‘ऑपरेशन ड्रोन’ के जरिए गिरफ्तार
आर जे रमझाझर,
कोटा/बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | 26 मई, 2026
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले चौकी बेलगहना क्षेत्र में मानवता को कलंकित करने वाली एक अत्यंत संवेदनशील और जघन्य घटना सामने आई है। एक 10 वर्षीय अबोध नाबालिग बच्ची के साथ हुए अनाचार के मामले में बिलासपुर पुलिस ने त्वरित न्याय और कानून के इकबाल को बुलंद करते हुए, घटना के महज कुछ ही घंटों के भीतर आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा आधुनिक तकनीक (ड्रोन कैमरों) और रणनीतिक घेराबंदी के समन्वय से चलाए गए इस त्वरित खोजी अभियान की चारों ओर सराहना हो रही है।
दिल दहला देने वाला घटनाक्रम और पुलिस की तत्परता
विवरण के अनुसार, दिनांक 23 मई 2026 की शाम आरोपी रंजीत यादव उर्फ दउआ (उम्र 20 वर्ष), पिता मुन्ना यादव उर्फ तीरथराम, निवासी सक्तीबहरा ने मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर अपनी मोटरसाइकिल पर बिठाया। आरोपी उसे सुनसान खेत की ओर ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म की इस घृणित घटना को अंजाम दिया। घटना के बाद आरोपी ने अगले दिन सुबह बच्ची को डरा-धमकाकर उसके घर के पास छोड़ दिया था।
डरी-सहमी पीड़िता ने जब अपने परिजनों को इस विभीषिका की जानकारी दी, तब परिजनों ने तत्काल थाना कोटा पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 तथा POCSO एक्ट की धारा 4 एवं 6 के तहत गैर-जमानती अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना बेलगहना चौकी पुलिस को सौंपी।
घने जंगलों में ‘ऑपरेशन ड्रोन’ और रणनीतिक घेराबंदी
वरिष्ठ अधिकारियों के कड़े रुख के बाद, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) मधुलिका सिंह और अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) नुपुर उपाध्याय के कुशल मार्गदर्शन में बेलगहना पुलिस ने आरोपी की धरपकड़ के लिए चौतरफा छापेमारी शुरू की।
कानून को चकमा देने का प्रयास: पुलिस की सक्रियता देखकर आरोपी रंजीत यादव गिरफ्तारी के डर से बेलगहना के घने और दुर्गम जंगलों की ओर भाग निकला।
तकनीकी प्रहार: जंगल अत्यधिक घना होने के कारण पैदल सर्चिंग में आ रही बाधाओं को भांपते हुए पुलिस ने तुरंत हाई-टेक ड्रोन कैमरों को हवा में उतारा।
सफलतापूर्वक दबोचा: आसमान से ड्रोन द्वारा की जा रही सटीक निगरानी और थर्मल मैपिंग की मदद से आरोपी की छिपने की सही लोकेशन ट्रैक कर ली गई। चारों तरफ से पुलिस की रणनीतिक घेराबंदी के चलते आरोपी को आत्मसमर्पण करना पड़ा।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल को भी साक्ष्य (Exhibits) के रूप में विधिवत जब्त कर लिया है। आरोपी को 25 मई 2026 को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों की सराहना एवं संपादकीय दृष्टिकोण
इस बेहद चुनौतीपूर्ण और त्वरित सफलता पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह एवं उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) ने बेलगहना चौकी प्रभारी और समस्त पुलिस स्टाफ के उल्लेखनीय योगदान व अदम्य साहस की भूरि-भूरि सराहना की है।
इस संवेदनशील विषय पर आर जे रमझाझर चैनल छत्तीसगढ़ के माध्यम से सामाजिक व संवैधानिक दृष्टिकोण साझा करते हुए वरिष्ठ पत्रकार श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने कहा:
”भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक, विशेषकर बच्चों और महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन और सुरक्षा की विधिक गारंटी (अनुच्छेद 21) देता है। ऐसी जघन्य प्रवृत्तियां सभ्य समाज के माथे पर कलंक हैं। बिलासपुर पुलिस ने जिस तरह आधुनिक तकनीक ‘ड्रोन’ का इस्तेमाल कर चंद घंटों में दरिंदे को दबोचा है, वह अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा करने के लिए जरूरी था। जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस पुलिस प्रशासन की इस मुस्तैदी का स्वागत करता है।”
नोट: विधिक प्रावधानों एवं सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत पीड़िता की निजता और गोपनीयता को पूर्णतः अक्षुण्ण रखा गया है।
