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न्यायधानी में रिश्तों का कत्ल: सिरगिट्टी पुलिस के ‘ऑपरेशन क्लीन’ में अंधे कत्ल का पर्दाफाश; टीआई अभय सिंह बैस के अनुभव और तीक्ष्ण अनुसंधान की बड़ी जीत।

न्यायधानी में रिश्तों का कत्ल: सिरगिट्टी पुलिस के ‘ऑपरेशन क्लीन’ में अंधे कत्ल का पर्दाफाश; टीआई अभय सिंह बैस के अनुभव और तीक्ष्ण अनुसंधान की बड़ी जीत

बिलासपुर (छत्तीसगढ़) | विशेष रिपोर्ट कवरेज: आर जे रमझाझर न्यूज़ / मीडिया हाउस

छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में कानून व्यवस्था और तत्परता का एक ऐसा जीवंत उदाहरण सामने आया है, जिसने न केवल अपराधियों के हौसलों को पस्त कर दिया है, बल्कि आम जनता में खाकी के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के अंतर्गत रेलवे ट्रैक के पास मिले झारखंड निवासी युवक विनोद लोमगा के अंधे कत्ल की गुत्थी को पुलिस ने महज कुछ ही घंटों में सुलझा लिया।

इस अत्यंत पेचीदा और संवेदनशील मामले को मुकाम तक पहुँचाने में सिरगिट्टी थाना प्रभारी (TI) अभय सिंह बैस के वर्षों के जमीनी अनुभव, पेशेवर दक्षता और तीक्ष्ण खोजी दृष्टि ने सबसे अहम भूमिका निभाई है।

## साधारण दुर्घटना के पीछे की खूनी साजिश को भांप गया ‘अनुभवी दिमाग’

19 मई की सुबह जब सिरगिट्टी रेलवे ट्रैक के किनारे कीचड़ में सना शव बरामद हुआ, तो प्रथम दृष्टया यह मामला एक आम रेल हादसे का प्रतीत हो रहा था। अमूमन ऐसे मामलों में दुर्घटना मानकर जांच आगे बढ़ाई जाती है, लेकिन यहीं पर थाना प्रभारी अभय सिंह बैस का पुराना और परिपक्व अनुभव काम आया।

बारीक फॉरेन्सिक निरीक्षण: टीआई बैस ने घटनास्थल के सूक्ष्म निरीक्षण के दौरान ही भांप लिया था कि यह महज कोई हादसा नहीं, बल्कि साक्ष्यों को छुपाने के लिए रचा गया एक खौफनाक जाल है। शव की स्थिति और चोट के निशानों को देखकर उनके खोजी दिमाग ने तुरंत भांप लिया कि कत्ल कहीं और हुआ है और लाश को यहाँ लाकर फेंका गया है।

तकनीकी व्यूहरचना (Cyber & CDR Trace): अनुभवी थाना प्रभारी ने बिना वक्त गंवाए अपनी टीम को सक्रिय किया। उन्होंने पारंपरिक पुलिसिंग (Manual Intelligence) के साथ आधुनिक साइबर फॉरेंसिक का ऐसा बेजोड़ समन्वय बिठाया कि महज कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और मोबाइल लोकेशन के तकनीकी विश्लेषण से मृतक की पत्नी पूनम और उसके प्रेमी सुगड़ तोपनो का पूरा खूनी खाका आईने की तरह साफ हो गया।

## मनोवैज्ञानिक पूछताछ और आरोपियों का आत्मसमर्पण

अपराधियों से सच उगलवाना भी एक अनूठी कला है, जिसमें टीआई अभय सिंह बैस माहिर माने जाते हैं। जब संदेही पत्नी पूनम लोमगा को हिरासत में लिया गया, तो वह शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने का प्रयास कर रही थी। परंतु, टीआई बैस के नेतृत्व में की गई मनोवैज्ञानिक और कड़ाई से पूछताछ (Tactful Interrogation) के आगे हत्यारों की चालाकी ज्यादा देर टिक नहीं सकी।

आरोपियों ने टूटकर अपना गुनाह कबूल किया और बताया कि कैसे उन्होंने ₹10,000 का लालच देकर विनोद को बिलासपुर बुलाया, गमछे से गला घोंटा, चाकू से वार किए और कानून की आँखों में धूल झोंकने के लिए शव को रेलवे ट्रैक के पास फेंक दिया।

## वरिष्ठ पत्रकार का दृष्टिकोण: ‘कानून के शासन’ के नायक बने टीआई बैस

इस पूरे सफल ऑपरेशन पर जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस के प्रमुख एवं वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने सिरगिट्टी पुलिस विशेषकर थाना प्रभारी की पीठ थपथपाते हुए कहा:

“हमारा संविधान (अनुच्छेद 21) हर नागरिक को जीवन और सुरक्षा का मौलिक अधिकार देता है। समाज में पनप रही ऐसी चारित्रिक विकृतियाँ सामाजिक ताने-बाने पर गहरा प्रहार हैं। टीआई अभय सिंह बैस जैसे अनुभवी, कड़क और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी का फील्ड में होना ही अपराधियों में खौफ पैदा करने के लिए काफी है। उन्होंने जिस सूझबूझ और व्यावसायिक कुशलता से इस ‘ब्लाइंड मर्डर’ की गुत्थी को सुलझाया है, वह बिलासपुर पुलिस विभाग के लिए एक मिसाल है। यह ‘कानून के शासन’ (Rule of Law) को और सशक्त करता है।”

## विधिक स्थिति एवं अग्रिम कार्रवाई

थाना प्रभारी अभय सिंह बैस के कुशल निर्देशन में सिरगिट्टी पुलिस ने मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क एवं गैर-जमानती धाराओं के तहत माननीय न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए टीआई बैस के नेतृत्व में विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं, और जल्द ही अन्य आरोपी भी सलाखों के पीछे होंगे।

बिलासपुर पुलिस के इस ‘ऑपरेशन क्लीन’ ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, यदि सामने अभय सिंह बैस जैसा अनुभवी और जांबाज अधिकारी खड़ा हो, तो कानून के हाथ उसकी गर्दन तक पहुँच ही जाते हैं।

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