न्यायधानी बिलासपुर अंतर्गत सकरी थाना में रक्षक ही बने भक्षक?
सकरी थाना की कार्यप्रणाली पर गहराया सवालिया निशान: परिजनों का आरोप सकरी थाना में रक्षक ही बने भक्षक?
सकरी थाना प्रभारी पर पीड़ित परिवार को धमकाने का संगीन आरोप; नाबालिग बच्चे को जेल भेजने की धमकी देकर बनाया जा रहा ‘समझौते’ का दबाव
बिलासपुर | 13 अप्रैल, 2026
न्यायधानी के सकरी थाना क्षेत्र से खाकी को शर्मसार कर देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहाँ एक ओर शासन-प्रशासन पुलिस को जन-हितैषी बनाने का दावा करता है, वहीं आसमा सिटी (सकरी) निवासी सतीश मिश्रा के आरोपों ने पुलिसिया तंत्र के काले चेहरे को उजागर कर दिया है। आरोप है कि सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी और उनके अधीनस्थ, न्याय दिलाने के बजाय पीड़ित परिवार को ही ‘दहशत’ का उपहार दे रहे हैं।
नाबालिग को ढाल बनाकर ‘कॉम्प्रोमाइज’ की गंदी राजनीति
प्रार्थी सतीश मिश्रा ने सीधे तौर पर थाना प्रभारी विजय चौधरी और दो अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पुलिस अब आरोपियों को संरक्षण देने के लिए अनैतिक हथकंडों पर उतर आई है। प्रार्थी का कहना है कि पुलिस द्वारा उन पर शिकायत वापस लेने और समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब पुलिस ने प्रार्थी के मासूम नाबालिग बच्चे को मामले में मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेजने की धमकी दे डाली।
“न्याय माँगने गए थे, बदले में मिली प्रताड़ना”
अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए प्रार्थी सतीश मिश्रा ने कहा:
“हम पुलिस की चौखट पर न्याय की आस लेकर पहुँचे थे, लेकिन वहाँ हमें ही अपराधी की तरह डराया-धमकाया जा रहा है। मेरे नाबालिग बच्चे को जेल भेजने की धमकी देकर पुलिस आरोपियों का बचाव कर रही है। आज मेरा पूरा परिवार खाकी के खौफ और मानसिक प्रताड़ना के कारण दहशत में है।”
प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल और मांगें:
मामले के तूल पकड़ते ही प्रार्थी ने पुलिस के उच्चाधिकारियों (IG/SP) से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है और निम्नलिखित माँगें रखी हैं:
- उच्चस्तरीय जांच: थाना प्रभारी विजय चौधरी और संलिप्त पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल निष्पक्ष जाँच बैठाई जाए।
- कठोर दंड: पद का दुरुपयोग करने और एक नाबालिग को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के जुर्म में दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई हो।
- पारदर्शी न्याय: मूल मामले में आरोपियों के विरुद्ध बिना किसी दबाव के वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
निष्कर्ष: क्या सुरक्षित है आम नागरिक?
यदि कानून के रखवाले ही रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका में नज़र आएँगे, तो आम आदमी न्याय के लिए किसके पास जाएगा? बिलासपुर पुलिस के उच्चाधिकारियों की चुप्पी अब जन-चर्चा का विषय बन चुकी है। शहर की जनता की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ‘दागी’ खाकी पर कार्रवाई होगी या पीड़ित परिवार इसी तरह दहशत के साये में घुटता रहेगा?

