आदर्श मुक्तिधाम बोदरी अंतर्गत मनाया गया शमशान में मसानी की शांतिपूर्ण
होली का पर्व पर बोदरी आदर्श मुक्ति धाम में शमशान में मसान की होली
संरक्षण
उज्जैन से आए हुए बाबा महाकाल के भक्ति का सभी नाम मसानी आदर्श मुक्ति धाम में किया स्वागत।
पंडित श्राद्ध में समुद्र शास्त्री राष्ट्रीय संरक्षक अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र सी ने सभी सदस्य पदाधिकारी का स्वागत किया वह आदर्श मुक्ति धाम में शमशान मिशन की होली खेलते हुए जीवन मृत्यु के समागम के प्रतीक होलिका महोत्सव पर भक्त प्रहलाद को याद करते हुए होलिका के बारे में सभी को बताया साथ ही भोलेनाथ महेश्वर सूत्र के बौद्धिक गोष्ठी का आयोजन भी किया गया अंत में सभी ने स्वल्पाहार के साथ शांति रूप से होली का पर्व मनाते हुए एक प्रतीक बनाया की होली शांति से ऐसे मने भी जाती है
🌹छाया और प्रकाश🌹
“महादेव, यह जो छाया है, क्या यह भी सच है या केवल प्रकाश का अभाव?
कभी लगता है कि छाया केवल धोखा है, क्योंकि जैसे ही प्रकाश आता है, वह मिट जाती है।
और कभी लगता है कि छाया भी अपनी एक पहचान रखती है।
सत्य क्या है?”
शिव ने धीरे से मुस्कुराते हुए उत्तर दिया।
शिव:
“देवी, छाया भी उतनी ही सच है जितना प्रकाश।
छाया, प्रकाश की भाषा है।
वह हमें याद दिलाती है कि सत्य केवल उजाले में नहीं, अंधकार में भी छिपा है।
छाया का होना ही प्रकाश के अस्तित्व को पूर्ण करता है।
यदि छाया न होती, तो हम प्रकाश का मूल्य भी न समझ पाते।”
पार्वती:
“परंतु स्वामी, छाया तो हमेशा अंधकार का प्रतीक मानी जाती है।
क्या यह केवल भय और भ्रम नहीं है?”
शिव:
“नहीं devi,
छाया भय नहीं, संकेत है।
सोचो — जब तुम छाया देखती हो, तब क्या तुम्हें यह याद नहीं आता कि पास ही प्रकाश है?
छाया स्वयं में कुछ नहीं, वह प्रकाश का ही प्रतिबिंब है।
जहाँ प्रकाश है, वहाँ छाया भी है।
और जहाँ छाया है, वहाँ निश्चित जान लो कि प्रकाश भी निकट है।”
पार्वती:
“तो छाया हमें प्रकाश की उपस्थिति का प्रमाण देती है?”
शिव:
“हाँ।
छाया यह बताती है कि हर चीज़ का दूसरा पहलू है।
प्रकाश हमें दिखाता है, छाया हमें छिपाता है।
प्रकाश हमें आगे बढ़ाता है, छाया हमें भीतर झाँकने को मजबूर करती है।
यदि केवल प्रकाश हो, तो आँखें चौंधिया जाएँगी।
यदि केवल अंधकार हो, तो जीवन ठहर जाएगा।
दोनों मिलकर ही जीवन का संगीत रचते हैं।”
पार्वती ने हाथ से अपनी ही परछाई पर नज़र डाली, जो शिला पर पड़ रही थी।
पार्वती:
“स्वामी, क्या हमारी आत्मा की भी कोई छाया होती है?”
शिव:
“आत्मा शुद्ध प्रकाश है।
पर मन और अहंकार उसकी छाया रचते हैं।
जब आत्मा का प्रकाश शरीर और मन से टकराता है, तब छाया बनती है।
यही कारण है कि कभी हम पवित्र विचारों से भर जाते हैं, और कभी इच्छाओं व भय से घिर जाते हैं।
यह सब आत्मा की छाया है।
पर याद रखो, छाया का होना यह साबित करता है कि भीतर प्रकाश है।
यदि भीतर प्रकाश न होता, तो छाया कहाँ से आती?”
पार्वती:
“अर्थात छाया भी हमें यह याद दिलाती है कि हमारे भीतर उजाला है?”
शिव:
“सही कहा।
छाया हमें अपने भीतर के प्रकाश की ओर ले जाने वाली सीढ़ी है।
जो व्यक्ति केवल छाया से डरता है, वह कभी प्रकाश तक नहीं पहुँच पाता।
पर जो छाया को समझता है, वह प्रकाश का रहस्य जान लेता है।”
पार्वती:
“महादेव, क्या छाया केवल चेतावनी है, या उसमें कोई उपकार भी है?”
शिव:
“छाया का उपकार बहुत गहरा है।
जब धूप तेज़ होती है, तब छाया ही हमें विश्राम देती है।
जब जीवन कठिनाइयों से भर जाता है, तब अंधकार हमें भीतर झाँकने का अवसर देता है।
छाया हमें बाहरी आकर्षण से हटाकर आत्मा की ओर मोड़ती है।
यह याद दिलाती है कि बाहरी जगत बदलता है, पर भीतर का प्रकाश स्थिर है।
छाया हमें धैर्य सिखाती है, विनम्रता सिखाती है।
वह यह कहती है कि हर उपलब्धि और वैभव क्षणभंगुर है, केवल आत्मा का उजाला शाश्वत है।”
पार्वती:
“और प्रकाश, वह क्या सिखाता है?”
शिव:
“प्रकाश दिशा देता है।
वह आगे बढ़ने की प्रेरणा है।
यदि छाया आत्मा की ओर झाँकना सिखाती है, तो प्रकाश जगत को देखना सिखाता है।
प्रकाश के बिना ज्ञान संभव नहीं।
प्रकाश ही दृष्टि है, चेतना है, मार्गदर्शन है।
पर ध्यान रहे —
यदि केवल प्रकाश हो और छाया न हो, तो ज्ञान अधूरा रह जाएगा।
क्योंकि छाया ही प्रकाश के मूल्य को गहराई देती है।”
पार्वती:
“तो क्या यह कहना सही होगा कि छाया और प्रकाश विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं?”
शिव:
“बिल्कुल।
यह दोनों विरोधी नहीं, बल्कि दो ध्रुव हैं।
जैसे दिन और रात, जैसे जन्म और मृत्यु।
यदि केवल दिन हो, तो जीवन थक जाएगा।
यदि केवल रात हो, तो जीवन सो जाएगा।
दोनों का संतुलन ही पूर्णता है।
उसी तरह छाया और प्रकाश मिलकर ही सत्य का रूप गढ़ते हैं।
एक बाहर की ओर ले जाता है, दूसरा भीतर की ओर।
एक दिखाता है, दूसरा छिपाता है।
एक प्रेरित करता है, दूसरा गहराई देता है।”
सूरज अब पूरी तरह ढल चुका था। आकाश लालिमा से काला होता जा रहा था। छायाएँ लंबी होकर अंधकार में मिल रही थीं।
पार्वती:
“अब समझ गई, महादेव।
छाया झूठ नहीं है।
वह प्रकाश की भाषा है।
वह हमें सिखाती है कि सत्य केवल उजाले में नहीं, अंधकार में भी छिपा है।
जो छाया को समझता है, वही प्रकाश का सही मूल्य जानता है।”
शिव:
“सत्य यही है, devi।
छाया और प्रकाश दोनों ही जीवन की धड़कन हैं।
जो दोनों को स्वीकार करता है, वही जीवन के रहस्य को जानता है।
छाया हमें भीतर झाँकने का साहस देती है, प्रकाश हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
दोनों मिलकर ही अस्तित्व का सम्पूर्ण रूप बनाते हैं।”
अंत में आदर्श मुक्ति धाम के संरक्षक अहिल्याबाई होल्कर समिति व संयुक्त सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ लक्ष्मण पाल के तत्वाधान में मसानी आदर्श मुक्तिधाम की होली के उपलक्ष में सभी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारी का धन्यवाद अभिवादन कार्यक्रम के साथ में फोटो सेशन किया गया वह होली के अवसर पर सभी आम जनमानस को भोलेनाथ की कृपा बरसती के साथ में एक स्वच्छ सौहार्द सुंदर होली का आयोजन किया गया और एक संदेश दिया गया आपसी भाईचारे पानी बचाएं वह नशा का प्रयोग नहीं करें ।सभी का सहयोग करें
