14 साल बाद भी मुंगेली जिला विकास को तरसा: लोरमी में करोड़ों के काम, पथरिया की जर्जर सड़क और ठहरे शहर विस्तार पर मोहले–कौशिक के लंबे राजनीतिक वर्चस्व पर उठे सवाल

पथरिया की जर्जर सड़क से उठे बड़े सवाल: लोरमी में करोड़ों के काम, पर मोहले–कौशिक के क्षेत्रों में विकास क्यों ठहरा?

मुंगेली।

मुंगेली जिले में विकास के असंतुलन को लेकर अब जनता के सवाल तीखे होते जा रहे हैं। एक ओर Arun Sao के विधानसभा क्षेत्र लोरमी में हाल ही में 53 गांवों के लिए लगभग 4.21 करोड़ रुपये के सीसी सड़क, नाली, पुलिया और स्टॉप डेम जैसे कार्यों को स्वीकृति मिली है, वहीं पथरिया और जिला मुख्यालय मुंगेली में बुनियादी समस्याएँ अब भी जस की तस दिखाई दे रही हैं।

पथरिया ब्लॉक मुख्यालय की केंद्रीय सड़क, जिसके आसपास लगभग सभी सरकारी कार्यालय स्थित हैं, लंबे समय से जर्जर बताई जा रही है। प्रतिदिन हजारों ग्रामीण, छात्र, व्यापारी और शासकीय कर्मचारी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन सड़क की मरम्मत तक स्पष्ट रूप से शुरू नहीं हो पाई है।

यह स्थिति इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि पथरिया क्षेत्र लंबे समय तक वरिष्ठ भाजपा नेता Dharamlal Kaushik के राजनीतिक प्रभाव में रहा है। कई बार विधायक और प्रदेश राजनीति में प्रभावशाली चेहरा होने के बावजूद यदि ब्लॉक मुख्यालय की सड़क ही बदहाल रहे, तो जनता यह पूछने लगी है कि इतने वर्षों के राजनीतिक वर्चस्व का लाभ आखिर क्षेत्र को क्यों नहीं मिला।

उधर जिला मुख्यालय मुंगेली, जिसका प्रतिनिधित्व Punnulal Mohle करते हैं, वहाँ भी शहरी विकास को लेकर असंतोष कम नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से एक ही नेतृत्व का दबदबा रहने के बावजूद शहर का विस्तार और बुनियादी ढांचा अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया। कई विकास योजनाएँ कागजों में ही सीमित रह गईं या ठंडे बस्ते में चली गईं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक एकछत्र राजनीतिक प्रभाव रहने के कारण स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही कम होती दिखती है। जनता के बीच यह कटाक्ष भी सुनाई देने लगा है कि चुनाव के समय बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में वही वादे धीरे-धीरे राजनीतिक नारों में बदल जाते हैं।

मुंगेली को जिला बनाने में पुन्नूलाल मोहले की भूमिका को लोग स्वीकार करते हैं, लेकिन “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे” का नारा जमीन पर उतना प्रभावी दिखाई नहीं देता। मुंगेली को जिला बने लगभग 14 साल से अधिक समय हो चुका है, फिर भी शहर का विस्तार आज भी बेहद सीमित माना जाता है।

स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय का दायरा लगभग दो किलोमीटर से अधिक प्रभावी रूप से नहीं बढ़ पाया है। कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और कई प्रमुख सरकारी संस्थान आज भी ऐसे क्षेत्र में स्थित हैं जो पहले ग्राम पंचायत क्षेत्र का हिस्सा रहे हैं। नगर पालिका के विस्तार पर हर वर्ष चर्चा होती है, लेकिन ठोस निर्णय अब तक सामने नहीं आया।

स्थानीय नागरिक बताते हैं कि जिला मुख्यालय से लगे रामगढ़ और करही जैसे गांवों को नगर पालिका में शामिल करने की चर्चा वर्षों से होती रही है, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक केवल घोषणाओं और चर्चाओं तक ही सीमित है।

तुलनात्मक रूप से देखें तो नजदीकी Bilaspur शहर का विस्तार पिछले वर्षों में लगभग 30 किलोमीटर तक फैल चुका है, जबकि मुंगेली आज भी 5 किलोमीटर के दायरे में नगर पालिका का विस्तार तक नहीं कर पाया है।

इसी कारण अब स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या विकास की प्राथमिकताएँ वास्तव में जनता की जरूरतों से तय हो रही हैं, या फिर लंबे समय से स्थापित राजनीतिक समीकरणों के भरोसे ही क्षेत्र की राजनीति चल रही है।

जनता की नजर अब इस बात पर है कि क्या पथरिया की जर्जर सड़क, मुंगेली शहर का सीमित विस्तार और लंबित परियोजनाएँ केवल चर्चाओं तक सीमित रहेंगी या वास्तव में जमीन पर बदलाव भी दिखाई

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