बेलमुंडी में अखंड नवधा रामायण: “श्री राम–सीता राम” नाम की अलख से जागृत हुआ जनमानस

बेलमुंडी में अखंड नवधा रामायण: “श्री राम–सीता राम” नाम की अलख से जागृत हुआ जनमानस


बिलासपुर।
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत बेलमुंडी में श्री पंचमुखी हनुमान धाम के तत्वावधान में आयोजित अखंड नवधा रामायण के पंचम दिवस पर “श्री राम–राम, सीता–राम” नाम की अलख से समूचा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
इस पावन आयोजन का संचालन जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस, बोदरी तहसील इकाई के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम में पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्रशास्त्री’ वरिष्ठ पत्रकार एवं अमर स्तंभ आरजे रमझाझर द्वारा विशेष संवाद एवं प्रश्नकाल का आयोजन किया गया, जिसमें जनसमस्याओं पर चर्चा करते हुए शासन स्तर पर शीघ्र समाधान का आश्वासन भी दिया गया।


श्री चाणक्य चैतन्यपुरी उर्फ सर्किट पुरी बाबा जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत 11 सूत्रीय कार्य-योजना के माध्यम से सामाजिक एवं धार्मिक सेवा को सुदृढ़ करने का संकल्प लिया गया। इसी क्रम में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के नव-निर्वाचित पदाधिकारियों को “ऑन जॉब ट्रेनिंग” के माध्यम से संगठनात्मक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्रशास्त्री’ ने श्रीरामचरितमानस के अयोध्याकांड से प्रसंग प्रस्तुत करते हुए जीवन में संयम, धैर्य और मर्यादा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के चरित्र को समझ लेने से जीवन की सभी कठिनाइयाँ सरल हो जाती हैं।
धार्मिक विचार-सत्र में उन्होंने बताया कि मनुष्य को परिस्थितियों के बजाय प्रभु के आदर्शों को समझने का प्रयास करना चाहिए, जिससे जीवन में संतुलन और सकारात्मकता बनी रहती है।


इस अवसर पर मंदिर परिसर में भगवान शिव परिवार, संकटमोचन हनुमान जी एवं मां भगवती की विशेष पूजा-अर्चना की गई। आयोजन में सरस्वती रामेश्वर कौशिक, बलराम कौशिक, बालाराम कौशिक, भुनेश्वर साहू, मनीष कौशिक, देवी केवट, चिंटू कौशिक, मुकेश कौशिक एवं नंद कुमार यादव सहित अनेक श्रद्धालुओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विप्र समाज, सामाजिक कार्यकर्ता, पत्रकारगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। सभी ने इस आयोजन को सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाला बताया।


अखंड नवधा रामायण के माध्यम से ग्राम बेलमुंडी में भक्ति, सेवा और संस्कार का संदेश जन-जन तक पहुँचाया गया, जिससे क्षेत्र में सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ।

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