राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मीडिया हाउस बोदरी का शंखनाद: ‘मानवता ही सर्वोपरि धर्म’, पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने आपसी सद्भाव और नैतिक मूल्यों का किया महा-आह्वान।
राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मीडिया हाउस बोदरी का शंखनाद: ‘मानवता ही सर्वोपरि धर्म’, पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने आपसी सद्भाव और नैतिक मूल्यों का किया महा-आह्वान
बोदरी/बिलासपुर (छत्तीसगढ़):
भारतीय अस्मिता, राष्ट्रीय चेतना और निष्पक्षता के गौरवमयी प्रतीक ‘राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता दिवस’ के पावन अवसर पर जन कल्याण पुनर्वास केंद्र एवं मीडिया हाउस बोदरी के प्रांगण में एक अत्यंत गरिमामयी और वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह दिवस समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र की शुचिता का महापर्व है। इसी पावन पाथेय को आत्मसात करते हुए जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस बोदरी के तत्वावधान में संस्थान की मुख्य संचालिका ज्योति कुलदीप एवं देश के प्रख्यात वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ की गरिमामयी उपस्थिति में समस्त आम जनमानस को इस ऐतिहासिक दिवस की आत्मीय बधाई और शुभकामना संदेश संप्रेषित किया गया।
ऐतिहासिक उद्गम और वैचारिक यात्रा:
इस अवसर पर पत्रकारिता के गौरवशाली सफर को रेखांकित करते हुए ‘अमर स्तंभ’ राष्ट्रीय दैनिक और विशेषकर ‘आर जे रमझाझर’ के उन ऐतिहासिक स्तंभों को याद किया गया जिन्होंने इस वैचारिक क्रांति की नींव रखी। मुंगेली की पावन धरा से काफी समय पूर्व इसकी दृढ़ शुरुआत करने वाले मुख्य सूत्रधार पुखराज सिंह जी के अप्रतिम योगदान का विशेष उल्लेख किया गया, जिनकी दूरगामी सोच के बदौलत आज यह अभियान वटवृक्ष बन चुका है। वर्तमान में इस गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाते हुए बिलासपुर संभाग की कमान स्वयं वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ संभाल रहे हैं, जिनके ओजस्वी नेतृत्व में आज बिलासपुर संभाग सहित संपूर्ण क्षेत्र में आम जनमानस की जागृति और निःस्वार्थ समाज सेवा की एक अभूतपूर्व बाढ़ आ गई है।
मानवता ही सबसे बड़ा धर्म – समुद्र शास्त्री का महा-आह्वान:
राष्ट्रीय हिंदी पत्रकारिता दिवस के इस ऐतिहासिक मंच से प्रख्यात समुद्र शास्त्री जी ने समाज को झकझोरने वाला वैचारिक पाथेय दिया। उन्होंने जाति, वर्ण और संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठने का आह्वान करते हुए कहा:
”हमारी पत्रकारिता और समाज सेवा का एकमात्र मूल मंत्र ‘मानव सेवा’ है। यदि हम सच्चे अर्थों में केवल मानव बन जाएं, तो हम सारे धर्म, जाति और वर्ण की सीमाओं से परे होकर समूचे संसार की सेवा कर सकते हैं। विडंबना यह है कि आज लोग सब कुछ बन रहे हैं, पर इंसान (मानव) बनने से चूक रहे हैं। जब तक हम भीतर से सच्चे मानव नहीं बनेंगे, तब तक समाज में धर्म, नीति या शुचितापूर्ण राजनीति की कल्पना बेमानी है। इसलिए पत्रकारिता दिवस के इस पावन मौके पर मैं संपूर्ण जनमानस से आह्वान करता हूँ कि वर्ण-जाति के संकीर्ण चक्रव्यूह को तोड़कर आपसी सद्भावना स्थापित करें। मानवता से बड़ा कोई मजहब नहीं और इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं।”
पुनर्वास और सामाजिक सुदृढ़ीकरण हेतु महा-आह्वान:
इस वैचारिक अनुष्ठान में संस्थान की मुख्य संचालिका ज्योति कुलदीप ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में मीडिया हाउस की भूमिका केवल समाचारों के संप्रेषण तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका मुख्य ध्येय समाज के पीड़ित, शोषित और वंचित वर्गों को संबल प्रदान कर उन्हें मुख्यधारा में पुनर्वासित करना है। उन्होंने आम जनता को हर स्तर पर सुदृढ़, मजबूत और मानसिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए संस्थान की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।
इस गरिमामयी आयोजन के समापन पर पत्रकारिता जगत की शुचिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखने का सामूहिक संकल्प लिया गया और पत्रकारिता दिवस पर पुनः समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की गईं।
विशेष विधिक सूचना / चेतावनी (ALL INDIA REGISTERED COPYRIGHT NOTICE):
यह उत्कृष्ट समाचार विज्ञप्ति वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ द्वारा विशेष रूप से तैयार और प्रेषित की गई है। अखिल भारतीय स्तर पर यह संपूर्ण लेख व इसके वैचारिक शब्द पूर्णतः पंजीकृत हैं। इस समाचार सामग्री, विशिष्ट शब्दावली, या प्रारूप की किसी भी अन्य मीडिया संस्थान, पोर्टल या सोशल मीडिया हैंडल द्वारा बिना लिखित अनुमति हूबहू नकल (कॉपी-पेस्ट) करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने वाले तत्वों के विरुद्ध कॉपीराइट एक्ट और विधिक प्रावधानों के तहत कठोरतम दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
— मुख्य संपादक/ब्यूरो चीफ, मीडिया हाउस बोदरी

