संजीत बर्मन की अग्रिम जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज, मामले में बढ़ी कानूनी सख्ती
बिलासपुर/तखतपुर।
तखतपुर में कथावाचन के दौरान सतनामी समाज पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दर्ज प्रकरण में आरोपी संजीत बर्मन को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय से भी खारिज कर दी गई है।
कथावाचक की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद
उल्लेखनीय है कि ढोंगी कथावाचक आशुतोष चैतन्य द्वारा तखतपुर में आयोजित कथा के दौरान सतनामी समाज को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। कथावाचक ने समाज को लेकर “गाय काटने वाला” और “मूर्ख” जैसे शब्दों का प्रयोग किया था, जिससे समाज में भारी आक्रोश फैल गया।
इस घटना के विरोध में समाज के लोगों ने विभिन्न चरणों में आंदोलन किया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य धाराएं जोड़ीं और अंततः आशुतोष चैतन्य की गिरफ्तारी हुई।

न्यायालय परिसर में विवाद के बाद नया मामला दर्ज
जब आरोपी आशुतोष चैतन्य को जिला न्यायालय में पेश किया गया, उस दौरान न्यायालय परिसर में बजरंग दल के पदाधिकारी राजीव शर्मा द्वारा विवाद उत्पन्न करने और लोगों को उकसाने की घटना सामने आई।
इसी दौरान हुई झड़प और तनाव के बाद पुलिस द्वारा सिविल लाइन थाना, बिलासपुर में संजीत बर्मन सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
अनय टंडन जेल में, संजीत को नहीं मिली राहत
इस मामले में आरोपी अनय टंडन पिछले करीब 75 दिनों से केंद्रीय जेल बिलासपुर में बंद हैं। वहीं, संजीत बर्मन ने गिरफ्तारी से बचने के लिए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे दोनों अदालतों ने खारिज कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब संजीत बर्मन की गिरफ्तारी की संभावना बढ़ गई है।
संगठनों ने फैसले का किया स्वागत
सतनामी समाज एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है। संगठनों का कहना है कि इस प्रकरण से समाज में नफरत फैलाने वालों के खिलाफ सख्त संदेश जाएगा।
प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने की हिम्मत न हो।
