छत्तीसगढ़ बिलासपुर स्ट्राइक2025- कर्मचारियों का आंदोलन: स्कूलों और दफ्तरों पर ताला, बोर्ड परीक्षा से पहले बढ़ी मुश्किलें।

 

छत्तीसगढ़ बिलासपुर स्ट्राइक2025- कर्मचारियों का आंदोलन: स्कूलों और दफ्तरों पर ताला, बोर्ड परीक्षा से पहले बढ़ी मुश्किलें।

आंदोलनकारी कर्मचारियों ने स्थानीय जिला कार्यालय के समीप नेहरू नगर चौक एकत्र होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। फेडरेशन का मुख्य आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने ‘मोदी की गारंटी’ के तहत कर्मचारियों से जो वादे किए थे, उन्हें सरकार बनने के बाद भुला दिया गया है।छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर प्रदेशव्यापी आंदोलन के दूसरे दिन राजनांदगांव जिले में सरकारी कामकाज और शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
-अपनी मांगों को लेकर अड़े कर्मचारी और अधिकारी ‘मोदी की गारंटी’ लागू करने के संकल्प के साथ राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। मंगलवार को आंदोलन के दूसरे दिन जिले के सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा, वहीं स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति के कारण अध्यापन कार्य पूरी तरह से ठप हो गया। कलेक्टोरेट परिसर और विभिन्न विभागों में काम रुकने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारी फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी जायज मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलनकारी कर्मचारियों ने स्थानीय नेहरू नगर चौक पर जिला कार्यालय के एकत्र होकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। फेडरेशन का मुख्य आरोप है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने ‘मोदी की गारंटी’ के तहत कर्मचारियों से जो वादे किए थे, उन्हें सरकार बनने के बाद भुला दिया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें आश्वासन दिया गया था कि नई सरकार बनने पर उनके हितों को लेकर कोई टकराव की स्थिति पैदा नहीं होने दी जाएगी, लेकिन वर्तमान में सरकार केवल “शब्दों का जाल” बुनकर समय व्यतीत कर रही है। फेडरेशन के जिला संयोज ब ने बताया कि मुख्यमंत्री को जुलाई माह में ही इन मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी सरकार ने इस पर कोई सार्थक विचार नहीं किया, जिससे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।

इस हड़ताल का सबसे गंभीर प्रभाव शिक्षा क्षेत्र पर पड़ रहा है। फरवरी माह से बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और ऐसे महत्वपूर्ण समय में स्कूलोंस्कूलों में पढ़ाई का रुकना छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय बन गया है। शिक्षकों के हड़ताल पर चले जाने से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों का सिलेबस और रिवीजन कार्य बीच में ही अटक गया है।

अभिभावकों और छात्रों में इस बात को लेकर बेचैनी है कि यदि हड़ताल लंबी खिंचती है, तो परीक्षाओं की तैयारी पर इसका गहरा असर पड़ेगा। इधर, कलेक्टोरेट के लगभग सभी विभागों में कामकाज बंद होने से जरूरी फाइलें और जनहित के कार्य अटक गए हैं, जिससे प्रशासन की रफ्तार धीमी पड़ गई है।

कर्मचारियों की मांगों की सूची लंबी है, जिसमें मुख्य रूप से प्रदेश के शासकीय सेवकों और पेंशनरों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता (DA/DR) देना और लंबित एरियर्स की राशि को जीपीएफ खाते में समायोजित करना शामिल है। इसके अलावा, फेडरेशन अनियमित, संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण की मांग कर रहा है।

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