मुंगेली जनसंपर्क अधिकारी विवाद: रायपुर में समाप्त हुआ पत्रकार खेमेश्वर पुरी का अनशन, अब दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामूहिक सत्याग्रह की तैयारी!
मुंगेली जिले में तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी (PRO) पर लगे कथित 35 लाख रुपये के वित्तीय घोटाले और पत्रकारों के साथ किए गए अमर्यादित व्यवहार व अपमानजनक टिप्पणियों का मामला अब राज्य की सीमाएं लांघकर देश की राजधानी दिल्ली की ओर अग्रसर हो गया है।
*पत्रकार के अनशन का चौथा दिन ग्राउंड रिपोर्ट जरूर देखिए*👆

नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल पर विगत दिनों से एकल अनशन पर बैठे पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी का अनशन मुंगेली से पहुंचे तीन दर्जन से अधिक मीडिया प्रतिनिधियों ने धरना स्थल पर उपस्थित होकर जूस पिलाकर समाप्त करवाया। हालांकि, पत्रकारों ने बुलंद आवाज़ में यह स्पष्ट कर दिया है कि यह आंदोलन का अंत नहीं, बल्कि इस संवैधानिक लड़ाई को अधिक व्यापक और आक्रामक स्वरूप देने की रणनीति का अगला पड़ाव है।
तूता से दिल्ली कूच का ऐलान: जंतर-मंतर पर होगा विशाल प्रदर्शन

धरना स्थल पर जुटे मुंगेली के मीडिया प्रतिनिधियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनदर्शन, जिला प्रशासन, पीएम-पीजी पोर्टल और महामहिम राज्यपाल तक विधिवत ज्ञापन व साक्ष्य सौंपे जाने के बावजूद तय समय-सीमा में राज्य सरकार या जिला प्रशासन ने कोई निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की।

प्रशासनिक उपेक्षा से व्यथित होकर पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने निर्णय लिया है कि अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा:
राष्ट्रपति से मुलाकात की तैयारी: मीडिया प्रतिनिधि राष्ट्रपति भवन पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति महोदय से सीधे मुलाकात करेंगे और चौथे स्तंभ की गरिमा व प्रशासनिक भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाएंगे।
जंतर-मंतर पर सामूहिक सत्याग्रह: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर मुंगेली और प्रदेश भर के सैकड़ों पत्रकार एकत्रित होकर सामूहिक सत्याग्रह करेंगे।

क्या है पूरा विवाद? (मामले की पृष्ठभूमि)
35 लाख का गबन: मुंगेली पदस्थापना के दौरान तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी पर शासकीय विज्ञापनों एवं आयोजनों के नाम पर विभागों से 32 से 35 लाख रुपये की अवैध उगाही व गबन के आरोप हैं।
गाली-गलौज और अपमान: स्थानांतरण के बाद सामने आई ऑडियो रिकॉर्डिंग में अधिकारी द्वारा मुंगेली के पत्रकारों को “बिकाऊ” और “गांजा तस्कर” जैसी अति-अपमानजनक शब्दावली से संबोधित करने के आरोप लगे हैं।
तूता में एकल अनशन: राज्य स्तर पर 10 दिनों का अल्टीमेटम बीत जाने पर भी कार्रवाई न होने पर पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी 7 अक्टूबर से तूता में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठ गए थे।
प्रशासनिक विश्लेषकों का मत: ‘न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करना है’
विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से जब किसी लोक सेवक पर शासकीय आचरण संहिता और वित्तीय धांधली के गंभीर आरोप लगते हैं, तो समयबद्ध जांच बिठाना प्रशासनिक विश्वसनीयता के लिए अनिवार्य होता है। मुंगेली के पत्रकारों का स्पष्ट मत है कि राज्य प्रशासन के ढुलमुल रवैये के कारण ही उन्हें अब केंद्रीय नेतृत्व और संवैधानिक प्रमुखों के द्वार पर दस्तक देने के लिए विवश होना पड़ रहा है।

शायराना अंदाज़ में पूरे घटनाक्रम का सार:
तूता का अनशन थमा सही, पर संघर्ष का आगाज़ अभी बाकी है,
गालियों और गबन के हिसाब का अंजाम अभी बाकी है।
ना दबे हैं, ना झुकेंगे सच के सिपाही मुंगेली के,
राजभवन से उठी आवाज़ का अब जंतर-मंतर पर वार बाकी है!
