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पूर्व मंत्री एवं विधायक अमर अग्रवाल का ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में आत्मीय संवाद: राजनीतिक यात्रा, प्रशासनिक अनुभव और विकास दृष्टिपत्र पर खुलकर रखे विचार।

पूर्व मंत्री एवं विधायक अमर अग्रवाल का ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में आत्मीय संवाद: राजनीतिक यात्रा, प्रशासनिक अनुभव और विकास दृष्टिपत्र पर खुलकर रखे विचार

बिलासपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित संवाद कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। प्रेस क्लब अध्यक्ष अजित मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी, सचिव संदीप करिहार एवं सह-सचिव हरिकिशन गंगवानी द्वारा अमर अग्रवाल का शॉल-श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने अपने बाल्यकाल से लेकर वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य, प्रशासनिक प्राथमिकताओं एवं जनसेवा के अनुभवों को विस्तार से साझा किया।
​पिता स्व. लखीराम अग्रवाल को बताया जीवन का सर्वोच्च मार्गदर्शक
​संवाद के दौरान अमर अग्रवाल ने अपने राजनीतिक व व्यक्तिगत जीवन में पिता स्व. लखीराम अग्रवाल के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि निष्ठा, सादगी और निस्वार्थ जनसेवा का संस्कार उन्हें अपने पिता से ही प्राप्त हुआ। बाल्यकाल में कुशाभाऊ ठाकरे, सुंदरलाल पटवा, कैलाश जोशी और राजमाता सिंधिया जैसे वरिष्ठ नेताओं के सानिध्य ने उनके राजनीतिक एवं वैचारिक धरातल को सुदृढ़ किया।
​चिकित्सा शिक्षा से सार्वजनिक जीवन तक का सफर
​22 सितंबर 1963 को खरसिया में जन्मे अमर अग्रवाल की प्रारंभिक शिक्षा खरसिया एवं बिलासपुर में हुई। जीव विज्ञान के छात्र के रूप में उनका प्राथमिक लक्ष्य चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाना था, किंतु परिस्थितियों एवं संगठन के निर्देशानुसार उन्होंने सार्वजनिक जीवन का मार्ग चुना। 1996 में भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष से शुरू हुआ यह सफर 1998 में प्रथम बार विधायक निर्वाचित होने के साथ निरंतर जारी है।
​प्रशासनिक कार्यकुशलता एवं नवाचार का परिचय

​वर्ष 2003 से 2018 तक राज्य शासन के विभिन्न मंत्रालयों का दायित्व संभालते हुए उन्होंने कार्यप्रणाली को सहज और पारदर्शी बनाया:
​आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा: नॉर्वे एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अध्ययन दौरे के उपरांत राज्य में ‘संजीवनी एक्सप्रेस 108’ एवं ‘महतारी एक्सप्रेस 102’ जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं की नींव रखी।
​प्रशासनिक दक्षता: निरंतर अध्ययन और प्रक्रियात्मक सुधारों के बल पर त्वरित निर्णय लेने की क्षमता विकसित की, जिससे जनकल्याणकारी फाइलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित हो सका।
​सतत शिक्षण की अवधारणा: प्रशासनिक व्यवस्थाओं और शासकीय प्रोटोकॉल को समझने के लिए सदैव तत्पर रहने को ही अपने प्रशासनिक जीवन का मूल मंत्र स्वीकार किया।
​बिलासपुर के समग्र विकास का दीर्घकालिक दृष्टिपत्र (मास्टरप्लान)
​नगर के विकास और अरपा नदी के संरक्षण पर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:
​30 वर्षीय मास्टरप्लान: बिलासपुर के भावी स्वरूप को ध्यान में रखकर तैयार किए गए 30 वर्षीय मास्टरप्लान के दूरगामी परिणाम आगामी पाँच वर्षों में परिलक्षित होंगे।
​संरक्षण एवं पर्यावरण: अरपा नदी के प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने और जल संवर्धन की चुनौतियों पर तकनीकी एवं नीतिगत सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया।
​समय प्रबंधन और व्यक्तिगत जीवन
​प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने समय प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताया। अपनी जीवनशैली पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे पूर्णतः शाकाहारी एवं सादे भोजन के पक्षधर हैं, जहाँ स्थानीय व्यंजनों के साथ-साथ सुपाच्य आहार उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। कार्यक्रम के समापन पर प्रेस क्लब के पदाधिकारियों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने उनकी जनकल्याणकारी सोच और स्पष्टवादिता की सराहना की।

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