बिलासपुर: आंधी-तूफान ने कुशाभाऊ ठाकरे कॉलोनी में मचाई तबाही; बिजली गुल, व्यापारियों का भारी नुकसान

बिलासपुर | न्यायधानी में आज सुबह मौसम के बदले मिजाज ने भारी तबाही मचाई है। धूल भरी आंधी और घनघोर बारिश की वजह से शहर के कई हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे बुरा हाल मंगला क्षेत्र स्थित कुशाभाऊ ठाकरे कॉलोनी का है, जहां आंधी के कारण सड़कों और घरों के गार्डन में लगे विशालकाय पेड़ धराशायी होकर बिजली के तारों पर गिर गए हैं।

​अंधेरे में डूबी कॉलोनी, व्यापार पड़ा ठप

​पेड़ गिरने से बिजली के तार और खंभे क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिसके कारण पूरी कॉलोनी में घंटों से बिजली आपूर्ति ठप है। बिजली न होने का सबसे बड़ा खमियाजा स्थानीय छोटे और मंझोले दुकानदारों को भुगतना पड़ रहा है।

​डेयरी और आइसक्रीम व्यवसायी पस्त: दूध, दही और आइसक्रीम जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के विक्रेताओं को खासा नुकसान हो रहा है। फ्रीजर बंद होने के कारण कीमती सामान खराब होने की कगार पर है।

 

​आम जनमानस परेशान: उमस और बिजली-पानी की किल्लत ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है।

​प्रशासनिक उदासीनता पर भड़के नागरिक

​कॉलोनी वासियों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं है। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि:

​”यहाँ बिजली, पानी और नाली जैसी बुनियादी समस्याओं के लिए जिम्मेदार अधिकारी कभी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते। आंधी-तूफान आने पर पेड़ों का गिरना यहाँ आम बात हो गई है, लेकिन प्रशासन कभी भी पूर्व संधारण (Maintenance) पर ध्यान नहीं देता।”

​विकराल होती जा रही हैं समस्याएँ

​अक्सर देखा गया है कि कुशाभाऊ ठाकरे कॉलोनी में एक बार बिजली गुल होने के बाद उसे बहाल करने में कई दिन लग जाते हैं। जलभराव और गंदगी की पुरानी समस्याओं के बीच अब बिजली संकट ने स्थिति को विकराल बना दिया है।

​मुख्य चुनौतियां:

​सड़कों पर पड़े पेड़ों की वजह से आवाजाही बाधित।

​बिजली के टूटे तारों से करंट फैलने का खतरा।

​लंबे समय तक बिजली बंद रहने से पेयजल संकट की आहट।

​स्थानीय निवासियों ने नगर निगम और विद्युत विभाग से मांग की है कि युद्ध स्तर पर कार्य कर पेड़ों को हटाया जाए और बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि आम जनता और व्यापारियों को और अधिक आर्थिक चपत न लगे।

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