आदि गुरु शंकराचार्य जन्मोत्सव के पावन पर्व पर परशुराम जन्म महोत्सव पर आम जनमानस को दिया साधुवाद शुभ कामनाएं।
आदि गुरु शंकराचार्य जन्मोत्सव एवं परशुराम जयंती का भव्य आयोजन
स्थान: जोगीपुर रंहगी,बोदरी, बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
तिथि: वैशाख शुक्ल पंचमी
सनातन धर्म के पुनरुत्थान के नायक आदि गुरु शंकराचार्य की जयंती हर्षोल्लास के साथ संपन्न
छत्तीसगढ़। सनातन धर्म के पुनरुत्थान के सूत्रधार और अद्वैत वेदांत के प्रणेता श्री आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती (प्राकट्योत्सव) के पावन अवसर पर, विश्व हिंदू महासभा एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में बिलासपुर के बोदरी में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
वैदिक मंत्रोच्चार और वैचारिक संगोष्ठी
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्व हिंदू महासभा के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव, पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ एवं प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। पंडित श्रवण दुबे ने सस्वर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
”आदि गुरु शंकराचार्य का व्यक्तित्व अलौकिक था। मात्र 8 वर्ष की आयु में चारों वेदों का ज्ञान और 16 वर्ष की आयु में उपनिषदों पर भाष्य लिखना उनकी अद्वितीय विद्वत्ता का प्रमाण है। वे साक्षात भगवान शंकर के अवतार थे।”
— पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’
सांस्कृतिक अखंडता का संदेश
प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल ने संबोधित करते हुए कहा कि आदि गुरु ने भारत की चारों दिशाओं में मठों की स्थापना कर देश को सांस्कृतिक एकता के सूत्र में पिरोया। कार्यक्रम में आदि गुरु रचित ‘निर्वाण षट्कम’ की महत्ता पर विशेष चर्चा हुई, जहाँ “शिवोऽहम्” के माध्यम से आत्म-बोध का संदेश दिया गया।
भगवान परशुराम जन्मोत्सव पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मण पाल और समुद्र शास्त्री ने भगवान परशुराम जन्मोत्सव के विषय में भी चर्चा की। उन्होंने समाज को शस्त्र और शास्त्र के समन्वय का संदेश देते हुए समस्त जनमानस को परशुराम जयंती की हार्दिक बधाई दी।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु:
अद्वैत वेदांत की व्याख्या: आदि गुरु के सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला गया।
सामूहिक पाठ: उपस्थित जनसमूह द्वारा ‘निर्वाण षट्कम’ का सस्वर पाठ।
संकल्प: सनातन धर्म की सेवा और अखंडता को बनाए रखने का सामूहिक प्रण।
उपस्थिति: इस अवसर पर मुख्य रूप से नारायण सिंह, गुरुदेव दशरथ सिंह, सतीश पांडे, मुकेश कौशिक, लाल कौशिक, दीपक यादव, संतोष पाल सहित क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
