भोजपुरी समाज, बिलासपुर के प्रवक्ता पंडित श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री वरिष्ठ पत्रकार ने 22मार्च होली मिलन समारोह कार्यक्रम को सफल बनाने का आवाहन किया।
होली मिलन समारोह के सादर नेवता
स्नेह, मीतभाव आ प्रेम के महापर्व होली अउर पावन चइत महीना के शुभ अवसर पर आयोजित भव्य होली मिलन समारोह में रउआ सभे के सपरिवार सादर नेवता बा।
स्थान: राजेन्द्र प्रसाद भोजपुरी भवन, इमलीपारा, बिलासपुर
दिनांक: 22 मार्च 2026 (रविवार)
समय: दुपहरिया 2:00 बजे से राति 8:30 बजे तक
मुख्य अतिथि:
माननीय श्री अमर अग्रवाल जी (पूर्व मंत्री आ नगर विधायक, बिलासपुर)
विशिष्ट अतिथि:
माननीय श्री सुशांत शुक्ला जी (विधायक, बेलतरा)
विशेष आकर्षण:
भोजपुरी के मशहूर गायक मंटू गिरी जी (आरा ) अपना पूरा टीम के साथ होली आ चैता के सुरीला प्रस्तुति देइहें।
विशेष व्यवस्था:
कार्यक्रम के समापन के बाद राति भोज के व्यवस्था भी कइल गइल बा।
आइं, हमनी सभे मिलके भाईचारा, स्नेह आ प्रेम के एह पावन पर्व के खुशी-खुशी मनाईं।
रउआ सभे के उपस्थिति से समारोह के शोभा बढ़ी।
अंत में सादर नेवता:
विजय ओझा
अध्यक्ष, भोजपुरी समाज, ने दिया यह जानकारी देते हुए भोजपुरी समाज के प्रवक्ता पंडित श्रवण दुबे समुद्र शास्त्री ने कार्यक्रम को सफल बनाने का आवाहन किया।
बेशर्मी की हदें पार करता बॉलीवुड
हम अक्सर जेन जी पीढ़ी को दोषी ठहराते हैं कि आज की पीढ़ी किस तरह की बेशर्म हो गई है। संवेदनाहीन हो गई है । लाज- शर्म छोड़ चुकी है। अश्लीलता और गाली गलौज करने में एक मिनट की देरी नहीं करती। दरअसल दोष जेन जी पीढ़ी का नहीं है जो जैसा देखता है, वह वैसा ही बनता है। जो जैसा खाता है उसका मन, विचार ठीक वैसा ही बनते है। हम आज तक खान-पान पर बात करते आए हैं कि आज की युवा पीढ़ी के खाने -पीने के तौर -तरीका बदल चुके हैं जैसा यह पीढ़ी खा रही है वैसे ही इनके विचार, इसका आचरण होता जा रहा है लेकिन सोचना यह भी है कि खाने से अंदर का मन, विचार बदल रहा है तो क्या देखने से मन और विचार नहीं बदलते ?
आज का बच्चा समाज में लोगों को जिस तरह की हरकतें देखता है उसी तरह का व्यवहार वह करने लगता है। उसको बुरा भी नहीं लगता है क्योंकि वह इसी तरह के वातावरण और स्थितियों में पल रहा है, बढ़ रहा है। आज के समय में नए-नए सिंगर आ रहे हैं। नए-नए लेखक आ रहे हैं, जो मन चाहे जैसा चाहे लिख रहे हैं, गा रहे हैं। जब यही गाने बच्चे सुनते हैं तो वे ठीक वैसा ही सीखेंगे , बोलेंगे, जाएँगे ।बच्चों का इसमें कोई दोष नहीं है ।हमारा समाज और इसकी मानसिकता पंगु हो चुकी है ।अभिव्यक्ति की आजादी और स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर हम बॉलीवुड की फुहड़ फ़िल्में और अश्लीलता पर यह कहकर चुप हो जाते हैं कि सभी स्वतंत्र हैं किसी को बोलने से नहीं रोका जा सकता लेकिन अगर हम नहीं रोकेंगे तो इसका परिणाम हमारी आने वाली कई पीढ़ियों को निश्चित तौर पर झेलना पड़ेगा ।
अभी हाल ही में बादशाह खान का एक गाना आया था सब ने उनको बहुत ट्रोल किया। करना भी चाहिए क्योंकि इस तरह की अश्लीलता समाज को दिग्भ्रमित करती हैं। ऐसे भ्रमित करने वाले गानों पर इतना विरोध जताना चाहिए कि ये गाने ही बैन हो जाए । बादशाह तो एक पुरुष है महिलाएँ भी सीमाएँ तोड़ने में पीछे नहीं है। आज मैंने एक गाना सुना नोरा फतेही का मुझे उस गाने के बोल लिखते हुए भी शर्म आ रही है किंतु समाज को जागरूक करना मैं अपना दायित्व समझती हूँ इसलिए मैं उस गाने के बोल यहाँ लिख रही हूँ और आप सबसे निवेदन कर रही हूँ कि अपने बच्चों पर ध्यान दीजिए क्योंकि जो गंदगी, अश्लीलता हम नहीं देखते, हम नहीं जानते उससे पहले हमारे बच्चों तक पहुँच जाती है। हम बच्चों को रोक नहीं सकते क्योंकि नेट और सोशल मीडिया आज जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। बिना नेट के बच्चा अपनी पढ़ाई करेगा भी कैसे ? हमें बच्चों को नेटवर्क उपलब्ध कराना ही पड़ता है इसलिए उन्हें दिग्भ्रमित होने से केवल बचाने का प्रयास ही कर सकते हैं।
नोरा फतेही के गाने के बोल कुछ इस प्रकार है :–
“पहले उठा ले
अंदर वो डाले
नीचे एक बूँद भी न गिराए
खाली कर के ही निकाले!
मुझपे न गिराना मुझे लगता है डर
भेद खुल न जाए संभल के जाना घर
चूसेगा या चाटेगा जो करना है कर”
गाने के प्रारंभ के बोल इस तरह के हैं तो सोचिए पूरा गाना कितनी अश्लीलता से, गंदगी से भरा हुआ है। छी है, थू है इस तरह के गानों पर, उन म्यूजिशियन पर जो इनको कंपोज करते हैं। छी है उन लेखकों पर जो समाज के लिए अश्लीलता लिखते हैं। विचाराणीय प्रश्न है कि आखिर आधे कपड़ों में घूमने वाली बॉलीवुड की ये फ़ूहड़ महिलाएँ इतनी बेशर्म होकर समाज को क्या देना चाहती हैं?
क्या हमारा मानव समाज इन पर कोई कार्यवाही नहीं करता ?
क्या हम पंगु हो चुके हैं या हमारी जबान को लकवा मार चुका है कि हम इनका विरोध नहीं जताते ?
क्या हम अपने आने वाले बच्चों के लिए एक गंदे समाज को छोड़कर जाएँगे ? जिस समाज में बच्चों का जीना भी मुश्किल हो जाएगा ?
क्या हम इतने बेशर्म हो चुके हैं कि इस तरह के गाने देखते हैं ,सुनते हैं और इस तरह के लोगों को प्रमोट करते रहते हैं ?
सोचिए मत ऐसे लोगों के खिलाफ आवाज उठाइए। जब सारी आवाजें एक हो जाएगी तो आवाज ताकतवर होगी जिससे इस तरह के लोग समाज से बॉयकॉट है। आइए मिलकर अपने बच्चों के लिए एक बेहतर समाज का निर्माण करते हैं, ऐसे लोगों का विरोध करते हैं।
गोष्टी समापन के बाद सभी पत्रकारों ने 22 मार्च को होली मिलन समारोह भोजपुरी समाज में आकर आम जनमानस का स्वागत करेंगे।

