मुंगेली जनपद में आदेशों की धज्जियां: 11 अगस्त को जारी स्थानांतरण आदेश के बावजूद सचिवों ने नहीं दिया प्रभार, CEO के निर्देश बेअसर
मुंगेली। जिला पंचायत मुंगेली द्वारा पंचायत सचिवों के तबादले को लेकर जारी किए गए सख्त प्रशासनिक आदेश जनपद पंचायत मुंगेली में केवल कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत द्वारा आदेश जारी किए जाने के बाद लंबा समय बीत जाने के बावजूद संबंधित पंचायत सचिवों ने न तो नए पदस्थापना स्थल पर प्रभार ग्रहण किया है और न ही एक-दूसरे को प्रभार सौंपा है। प्रशासनिक आदेश की इस खुली अवहेलना से जनपद पंचायत प्रशासन की कार्यशैली और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या था स्थानांतरण आदेश?
जिला पंचायत मुंगेली द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/जि.पं./सचिव स्था./2026/3766) के तहत प्रशासनिक दृष्टिकोण से दो पंचायत सचिवों का परस्पर स्थानांतरण किया गया था:
श्रीमती जागृति कश्यप: ग्राम पंचायत धारभाठा से बदलकर नवागांव धु किया गया था।
श्री आत्माराम साहू: ग्राम पंचायत नवागांव धु से बदलकर धारभाठा किया गया था।
3 दिवस की समय सीमा खत्म, फिर भी डटे हैं सचिव
आदेश पत्र की प्रतिलिपि में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि स्थानांतरित पंचायत सचिवों को 03 दिवस के भीतर प्रभार का आदान-प्रदान करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि नियत समय सीमा में प्रभार न सौंपने की स्थिति में संबंधितों के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई संस्थित की जाएगी।
हालांकि, आदेश जारी होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है:
न तो प्रभार सौंपा गया, न ही लिया गया: दोनों ही सचिवों ने अब तक एक-दूसरे को पंचायतों का प्रभार नहीं सौंपा है।

आदेश की खुलेआम अवहेलना: जनपद पंचायत सीईओ और उच्च अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों और समय सीमा को नजरअंदाज कर सचिव अपनी पुरानी जगहों पर ही जमे हुए हैं।
विकास कार्य प्रभावित, ग्रामीणों में नाराजगी
प्रशासनिक स्तर पर प्रभार के इस लेन-देन न होने के कारण संबंधित ग्राम पंचायतों (धारभाठा और नवागांव धु) में शासकीय व विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि जब जिला प्रशासन के आदेशों का ही पालन नहीं हो रहा है, तो आम जनता की समस्याओं का निराकरण कैसे होगा?
अब देखने वाली बात यह होगी कि उच्चाधिकारियों के आदेशों को ठेंगा दिखाने वाले इन सचिवों पर जिला पंचायत और जनपद पंचायत प्रशासन क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई करता है या यह मामला यूं ही ठंडे बस्ते में पड़ा रहेगा।
