मुंगेली जिला उपभोक्ता आयोग के नियमित संचालन की मांग: पत्रकार अरविंद बंजारा ने खाद्य सचिव को भेजा पत्र
अधिकारियों-कर्मचारियों की मूल पदस्थापना पर उपलब्धता और कवर्धा पर निर्भरता खत्म करने की उठी मांग
मुंगेली (छत्तीसगढ़)। जिले के आम नागरिकों एवं उपभोक्ताओं को स्थानीय स्तर पर सुलभ, त्वरित और प्रभावी न्याय दिलाने के उद्देश्य से मुंगेली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के नियमित संचालन की मांग जोर पकड़ने लगी है। इस संबंध में पत्रकार अरविंद बंजारा ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के सचिव को आधिकारिक ईमेल के माध्यम से पत्र भेजकर तत्काल हस्तक्षेप व आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुंगेली जिले में वर्ष 2014 से जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का गठन किया गया है। इसके बावजूद, आयोग के नियमित रूप से संचालित न होने के कारण स्थानीय उपभोक्ताओं, आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कवर्धा पर निर्भरता से उपभोक्ताओं को हो रही असुविधा
पत्रकार अरविंद बंजारा ने अपने आवेदन में ध्यान आकर्षित कराया कि स्थायी भवन के अभाव में जून 2025 तक आयोग का संचालन कलेक्टरेट परिसर में महीने में मात्र एक दिन ‘लिंक कोर्ट’ के रूप में किया जाता था। इसके बाद 26 जून 2025 को राज्य उपभोक्ता आयोग, रायपुर के अध्यक्ष द्वारा मुंगेली में अस्थायी भवन का शुभारंभ किया गया।
हालांकि, शुभारंभ के बाद भी आयोग का नियमित संचालन बहाल नहीं हो सका है। पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों की अन्य जिलों में संलग्नता (अटैचमेंट) तथा नियमित कर्मचारियों की अनुपलब्धता के कारण विभागीय कामकाज ठप पड़ा रहता है। इसके परिणामस्वरूप, लोगों को अपने प्रकरणों से जुड़े कार्यों के लिए कवर्धा जिला जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों का बेवजह नुकसान हो रहा है।
प्रमुख 6 बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग
पत्रकार अरविंद बंजारा ने शासन स्तर से त्वरित समाधान हेतु मुख्य रूप से छह बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग रखी है:
मूल पदस्थापना पर वापसी: मुंगेली आयोग में पदस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों की अन्य जिलों में संलग्नता खत्म कर उन्हें मुंगेली में उपलब्ध कराया जाए।
नियमित संचालन: निर्धारित कार्यदिवसों में आयोग का नियमित रूप से संचालन सुनिश्चित हो।
स्थानीय स्तर पर सुविधाएं: प्रकरणों के पंजीयन, दस्तावेजों की प्राप्ति और अन्य कार्यालयीन प्रक्रियाएं मुंगेली में ही पूरी की जाएं।
मामलों की संख्या का तर्क अमान्य: प्रकरणों की संख्या कम होने का बहाना बनाकर कार्यालय का अनियमित संचालन उचित नहीं है; सुनवाई व निराकरण की स्थायी व्यवस्था बने।
डिजिटल सुविधा एवं प्रशिक्षण: ‘ई-जागृति पोर्टल’ के जरिए ऑनलाइन पंजीयन और ई-हियरिंग (e-Hearing) को सुचारू बनाने हेतु संबंधित कर्मचारियों को आवश्यक तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण दिया जाए।
बाधाओं की समीक्षा: आयोग के नियमित संचालन में आ रही प्रशासनिक व व्यावहारिक बाधाओं की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए जाएं।
”उपभोक्ता आयोग केवल एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों की रक्षा का प्रमुख स्तंभ है। मुंगेली के लोगों को न्याय के लिए दूसरे जिलों का चक्कर न काटना पड़े, इसके लिए शासन को इस विषय पर त्वरित संज्ञान लेकर आयोग का नियमित संचालन शुरू कराना चाहिए।”
