35 लाख घोटाले, पत्रकारों से अभद्र व्यवहार व अपमान पर मुंगेली से तूता तक महासंग्राम: कार्रवाई न होने से नाराज पत्रकार खेमेश्वर पुरी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे
35 लाख घोटाले, पत्रकारों से अभद्र व्यवहार व अपमान पर मुंगेली से तूता तक महासंग्राम: कार्रवाई न होने से नाराज पत्रकार खेमेश्वर पुरी अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे

विशेष रिपोर्ट (रायपुर / मुंगेली):
मुंगेली जिले में तत्कालीन जनसंपर्क अधिकारी (PRO) सुजीत कुमार सिंह पर लगे कथित 35 लाख रुपये के वित्तीय घोटाले और पत्रकारों के साथ किए गए अभद्र व्यवहार व अपमानजनक टिप्पणियों का मामला अब राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर सत्याग्रह का रूप ले चुका है।
जिला प्रशासन से लेकर महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने और विभिन्न प्रशासनिक पोर्टलों पर शिकायत के बावजूद तय समय-सीमा में कार्रवाई न होने से क्षुब्ध होकर पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी 7 अक्टूबर 2026 से नवा रायपुर के तूता में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह पर बैठ गए हैं।
अनशन स्थल से पत्रकार की मांगें:
तूता धरना स्थल से जारी संदेश में पत्रकार खेमेश्वर पुरी गोस्वामी ने स्पष्ट किया कि यह अनशन लोकतंत्र की गरिमा और पत्रकारों के स्वाभिमान की रक्षा के लिए है। उनकी मुख्य मांगें हैं:
आरोपी अफसर का निलंबन: तत्कालीन PRO सुजीत कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।
CBI / उच्चस्तरीय जांच: 35 लाख रुपये के कथित घोटाले की निष्पक्ष एजेंसी से जांच हो।
FIR दर्ज हो: पत्रकारों के साथ किए गए अभद्र व्यवहार और अपमानजनक टिप्पणियों के खिलाफ पुलिस आपराधिक मामला दर्ज करे।
डिजिटल साक्ष्य परीक्षण: सौंपे गए ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों की फॉरेंसिक लैब (FSL) से जांच कराई जाए।

राजनीतिक व सामाजिक पृष्ठभूमि:
उल्लेखनीय है कि इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत में ही जिले में राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिली थीं। जहां विपक्ष (कांग्रेस) और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पत्रकारों के अपमान पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी, वहीं सत्तापक्ष (बीजेपी) के स्थानीय नेतृत्व का रुख टालमटोल वाला रहा था।
समय बीत जाने के बाद भी जब प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तब “न्याय में विलंब, न्याय से वंचित करना है” के विधिक सिद्धांत के तहत यह सत्याग्रह शुरू हुआ है। अब सभी की नजरें शासन-प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
अंततोगतवा :-
वादे-दिलासे बीते, पर इंसाफ़ का ना कोई आसार लगा,
सच के सिपाही का अब तूता में सत्याग्रह का वार हुआ।
गालियों और गबन का हिसाब लेने उतरी है कलम,
35 लाख के घोटाले और अपमान पर अब भ्रष्ट तंत्र पर प्रहार हुआ!
