35 लाख घोटाले पर राज्यपाल तक पहुंची मुंगेली की लड़ाई: पूर्व PRO सुजीत सिंह पर CBI/ACB जांच और FIR की मांग, ऑडियो-वीडियो सबूत सौंपे गए
मुंगेली जिले में स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और मुख्यमंत्री के शासकीय विज्ञापनों व आयोजनों के नाम पर हुए कथित 35 लाख रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले और मीडिया पर लांछन लगाने के मामले ने अब अत्यंत गंभीर कानूनी और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। मुंगेली के सजग एवं कर्तव्यनिष्ठ मीडिया प्रतिनिधियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम कलेक्टर (जिलाधीश एवं दण्डाधिकारी) को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर पूर्व सहायक संचालक/PRO सुजीत कुमार सिंह (वर्तमान पदस्थापना रायगढ़) के विरुद्ध तत्काल निलंबन, FIR, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और CBI/ACB से उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ज्ञापन में दर्ज कड़े शब्द: लोक सेवक आचरण और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का उल्लंघन
राज्यपाल को भेजे गए ज्ञापन पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि मुंगेली पदस्थापना के दौरान तत्कालीन सहायक संचालक/PRO सुजीत कुमार सिंह द्वारा पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के नाम पर विभिन्न विभागों के अधिकारियों से शासकीय विज्ञापनों की आड़ में कथित रूप से भारी वित्तीय अनियमितता और अवैध वसूली को अंजाम दिया गया।

कानूनी धाराएं और नियम: ज्ञापन में इस कृत्य को ‘लोक सेवक आचरण संहिता’ तथा ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ के प्रावधानों का खुला उल्लंघन बताया गया है।
गाली-गलौज और लांछन पर न्याय संहिता का प्रहार: रायगढ़ स्थानांतरण के बाद अधिकारी द्वारा मुंगेली के पत्रकारों को सार्वजनिक रूप से “गांजा तस्कर”, “बिकाऊ मीडिया से जुड़े व्यक्ति” तथा “₹50-100 में बिकने वाले” जैसे घृणास्पद और मानहानिकारक शब्दों से संबोधित किया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि यह कृत्य ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के अंतर्गत मानहानि, आपराधिक अभित्रास (धाक-धमकी) और शांति भंग करने के गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध: फॉरेंसिक लैब से जांच की मांग
ज्ञापन में एक सबसे बड़ा खुलासा यह किया गया है कि आरोपी अधिकारी के इस पूरे भ्रष्टाचार और अभद्र भाषा के गंभीर डिजिटल, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स उपलब्ध हैं।
साक्ष्यों को नष्ट करने की आशंका: चूंकि सुजीत कुमार सिंह वर्तमान में भी एक प्रभावशाली शासकीय पद पर पदस्थ हैं, इसलिए वे अपने पद का दुरुपयोग कर गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या रिकॉर्डिंग्स के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।
फॉरेंसिक लैब जांच: पत्रकारों ने मांग की है कि प्रकरण से संबद्ध समस्त डिजिटल साक्ष्यों को तुरंत राज्य या केंद्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (Forensic Science Laboratory) से प्रमाणित कराया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की तकनीकी फेरबदल की गुंजाइश न रहे।
राज्यपाल के समक्ष रखी गईं 5 प्रमुख न्यायोचित मांगें:
तत्काल प्रभाव से निलंबन: प्रशासनिक जांच की निष्पक्षता और साक्ष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों के तहत सुजीत कुमार सिंह को तत्काल शासकीय सेवा से निलंबित किया जाए।
तत्काल FIR दर्ज हो: पत्रकारों के विरुद्ध अमर्यादित व विद्वेषपूर्ण शब्दावली का प्रयोग करने के संबंध में संबंधित धाराओं के तहत तुरंत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज की जाए।
CBI या निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच: विज्ञापनों और शासकीय आयोजनों के नाम पर की गई अवैध वसूली व वित्तीय कदाचार की सच्चाई उजागर करने हेतु केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अथवा राज्य की निष्पक्ष उच्चस्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए।
डिजिटल साक्ष्यों का लैब प्रमाणीकरण: जब्त ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों की फॉरेंसिक लैब से त्वरित जांच सुनिश्चित की जाए।
10 दिवस की समय-सीमा (अल्टीमेटम): ज्ञापन में महामहिम से गुहार लगाई गई है कि 10 दिवस के भीतर त्वरित व कठोर वैधानिक कार्रवाई के निर्देश शासन-प्रशासन को दिए जाएं, क्योंकि “न्याय में विलंब वास्तव में न्याय से वंचित करना है”।
निष्कर्ष: चौथे स्तंभ की साख और विधि के शासन की रक्षा
मुंगेली के निष्पक्ष पत्रकारों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई केवल एक अधिकारी के भ्रष्टाचार की नहीं, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गरिमा, प्रशासनिक शुचिता और प्रेस की संवैधानिक स्वतंत्रता की रक्षा की है। कलेक्टर कार्यालय में मुंगेली के मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा हस्ताक्षरित यह ज्ञापन उन सभी अफसरों और चाटुकारों के लिए करारा जवाब है जो भ्रष्टाचार के इस पूरे खेल को दबाना चाहते थे। अब देखना यह होगा कि राजभवन से निर्देश जारी होने के बाद प्रशासन 10 दिनों के भीतर इस अहंकारी और भ्रष्ट अधिकारी पर क्या कानूनी कार्रवाई करता है।
