अच्छे दिन का वादा, गरीब की चाय तक छीनने का इरादा!* *शक्कर 25 रु. महंगी, 12 साल की सत्ता के नशे में चूर मंत्री बोले – खुशी की बात है”*

*”अच्छे दिन का वादा, गरीब की चाय तक छीनने का इरादा!*
*शक्कर 25 रु. महंगी, 12 साल की सत्ता के नशे में चूर मंत्री बोले – खुशी की बात है”*

 

_लेखक: *अनूप कुमार चौरसिया, वरिष्ठ संवाददाता, पब्लिक आई न्यूज़*_

देश में एक बार फिर _महंगाई_ को लेकर माहौल गरम हो गया है। _अच्छे दिन_ का वादा करने वाली सरकार आज जनता को महंगाई की चक्की में इस तरह दबा रही है, जैसे कोई कसाई बकरे को काटने से पहले अपने पैरों के नीचे दबाता है। वैसा ही आज सरकार हिंदुस्तान की जनता को _भेड़िया और बकरा_ समझ रही है।

*गरीबी खत्म करने के नाम पर गरीबों को ही खत्म कर रही सरकार*
सरकार कहती है गरीबी खत्म करेंगे, लेकिन हालात देखकर लगता है मानो _गरीबी खत्म करने के नाम पर गरीबों को ही खत्म_ करने पर लगी है। गैस, पेट्रोल, डीजल एवं अन्य सामानों के दाम पहले ही आसमान पर हैं। अब अचानक _20 से 25 रुपये शक्कर के दाम_ बढ़ा दिए गए हैं।

*किसानों की दूसरी फसलों पर दाम क्यों नहीं बढ़ रहे?*
मंत्री जी कह रहे हैं – किसानों की फसल के दाम बढ़ते हैं तो खुशी होती है। सवाल ये है कि किसानों की _अन्य फसलें भी तो होती हैं_, सरकार उन पर दाम क्यों नहीं बढ़ा रही है? _हर फसल को MSP पर खरीदना चाहिए_, लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है।

*12 साल की सत्ता का नशा सर चढ़कर बोल रहा है*
इसका मुख्य कारण है _लगातार 12 साल से सत्ता में एक ही पार्टी का रहना_। भाजपा के नेताओं और मंत्रियों का _सत्ता का नशा सर चढ़कर बोल रहा है_। सरकार अपनी _नाकामियों को छिपाने के लिए तरह-तरह के बहाने_ बना रही है।

*मंत्री जी बोले – ‘शक्कर महंगी तो खुशी की बात’*
बिहार की भाजपा सरकार के एक मंत्री का बयान सुनकर हर किसी का खून खौल उठेगा। मंत्री जी कह रहे हैं –
*”यह बहुत खुशी की बात है। लोग डायबिटीज से परेशान हैं, शक्कर महंगा हो गया है, अब डायबिटीज नहीं होगी।”*

*आम आदमी के मुंह से एक कप चाय भी छीनने की मंशा*
देश एक तरफ _महंगाई, बेरोजगारी, भुखमरी_ से परेशान है। लोग जो _एक कप चाय 10 रुपये में पीते थे, अब वही चाय 15 से 20 रुपये_ में मिलेगी। _मोदी सरकार की मंशा है कि आम आदमी के मुंह से एक कप चाय भी छीन लिया जाए_।

*केंद्रीय मंत्री चुप, क्या यही हैं अच्छे दिन?*
अभी तक _किसी भी केंद्रीय मंत्री ने इस पर दो शब्द तक नहीं बोले हैं_। सवाल उठता है – _क्या अच्छे दिनों की शुरुआत 12 साल बाद हुई है? क्या यही अच्छे दिन हैं?_

_अच्छे दिन का वादा और गरीबों को खत्म करने का इरादा, मोदी सरकार की यही है मंशा_।
उपरोक्त लेख को जबरदस्त शानदार जानदार बना कर दिखाए

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