बिलासपुर खाद्य शाखा और कोटा SDM कार्यालय पर उचित मूल्य दुकानों के आवंटन में हेर-फेर छिपाने का गंभीर आरोप।
सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की खुली अवहेलना: बिलासपुर खाद्य शाखा और कोटा SDM कार्यालय पर उचित मूल्य दुकानों के आवंटन में हेर-फेर छिपाने का गंभीर आरोप।
बिलासपुर / रतनपुर
भारतीय लोकतंत्र की मूल आत्मा—”पारदर्शिता और जवाबदेहिता”—को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किस प्रकार दरकिनार किया जा रहा है, इसका एक जीवंत और चिंताजनक उदाहरण सामने आया है। रतनपुर निवासी प्रबुद्ध नागरिक प्रदीप सिंह ठाकुर द्वारा दायर सूचना के अधिकार (RTI) के आवेदन को बिलासपुर खाद्य शाखा और कोटा अनुविभागीय दंडाधिकारी (SDM) कार्यालय के जन सूचना अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से खारिज किए जाने पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। आरोप है कि यह प्रशासनिक लीपापोती क्षेत्रीय उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन में हुए व्यापक भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को छिपाने के लिए की जा रही है।
प्रकरण का वृत्तांत:
रतनपुर वार्ड क्रमांक 4 निवासी प्रदीप सिंह ठाकुर ने क्षेत्र की 12 उचित मूल्य (राशन) दुकानों की वैधता, पंजीयन, पारदर्शी आवंटन प्रक्रिया और उनके संचालन सत्र से जुड़े सत्यापित दस्तावेजों की मांग विधिवत रूप से RTI अधिनियम के तहत की थी।
कानूनन 30 दिवस की समय-सीमा बीत जाने के पश्चात भी जब कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हुआ, तो दोनों ही उत्तरदायी कार्यालयों ने एक सा और भ्रामक जवाब प्रेषित कर पल्ला झाड़ लिया कि—”आपकी जानकारी प्रश्नवाचक है, अतः इसे प्रदान नहीं किया जा सकता।” प्रशासनिक तंत्र का यह टालमटोल वाला रवैया न केवल सूचना के अधिकार अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है, बल्कि प्रथम दृष्टया संदिग्ध प्रतीत होता है।
”घोटाले और मिलीभगत पर पर्दा डालने का कुत्सित प्रयास”: प्रार्थी
शिकायतकर्ता प्रदीप सिंह ठाकुर ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि क्षेत्र की कई उचित मूल्य दुकानों के आवंटन में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। महिला स्वयं सहायता समूहों के आड़ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए दुकानें संचालित कराई जा रही हैं तथा अपात्र व्यक्तियों को बंदरबांट के तहत लाभ पहुँचाया गया है।”

उन्होंने आगे प्रखर शब्दों में कहा कि यदि इन 12 दुकानों के मूल दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए जाते हैं, तो शासन को चूना लगाने वाला लाखों-करोड़ों रुपये का राशन घोटाला और प्रशासनिक मिलीभगत का काला चिट्ठा बेनकाब हो जाएगा। यही मुख्य कारण है कि जन सूचना अधिकारी अपने पदीय दायित्वों से विमुख होकर दस्तावेजों को छिपाने में जुटे हैं।
कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता के विरुद्ध मुखर होते हुए प्रार्थी प्रदीप सिंह ठाकुर ने 24 जुलाई 2026 को जिला बिलासपुर के कलेक्टर महोदय के समक्ष एक उच्चस्तरीय लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। अपनी इस शिकायत में उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख माँगे रखी हैं:
दंडात्मक कार्रवाई: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20 के प्रावधानों के अंतर्गत उदासीन और भ्रष्ट जन सूचना अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक व आर्थिक दंड लगाया जाए।
सत्यनिष्ठ प्रदाय: विवादित 12 उचित मूल्य दुकानों से संबंधित सभी दस्तावेज एवं आस्तियों की संपूर्ण जानकारी अविलंब निःशुल्क उपलब्ध कराई जाए।
उच्चस्तरीय जाँच: खाद्य शाखा बिलासपुर और कोटा SDM कार्यालय के मध्य कथित संलिप्तता व मिलीभगत की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच सुनिश्चित की जाए।
प्रशासनिक सुशासन पर मंडराता प्रश्नचिह्न
एक ओर जहाँ शासन-प्रशासन “सबका साथ, सबका विकास” और पारदर्शी सुशासन के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं धरातल पर बैठे कुछ शासकीय अधिकारी लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोंटने में लगे हैं। यदि सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसी संवेदनशील व्यवस्था में ही इस प्रकार की धांधली और पर्दाफाश से बचने के हथकंडे अपनाए जाएंगे, तो आम जनता का व्यवस्था से विश्वास उठना स्वाभाविक है।
अब संपूर्ण जिले की निगाहें कलेक्टर बिलासपुर की त्वरित और निष्पक्ष कार्यवाही पर टिकी हुई हैं कि वे कब तक इन आरोपों की तह तक पहुँचकर राशन माफिया और उनके संरक्षकों का सच जनसमक्ष लाते हैं।

