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​चकरभाठा SBI शाखा की तानाशाही और मनमानी उजागर: पीएमओ, कलेक्टर और महाप्रबंधक तक पहुँची गूंज।

बैंकों में बही भ्रष्टाचार की बयार: बिना आवेदन सतीश वाधवानी के नाम से फर्जी लोन अकाउंट! अफसर बेनकाब, तो आम आदमी का क्या होगा भगवान?


​चकरभाठा SBI शाखा की तानाशाही और मनमानी उजागर: पीएमओ, कलेक्टर और महाप्रबंधक तक पहुँची गूंज

बिलासपुर चकरभाठा शाखा द्वारा बिना आवेदन फर्जी ऋण दर्ज कर ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ बाधित करने एवं पत्रकारों से अभद्रता के संबंध में।
​छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बैंकिंग व्यवस्था की साख, पारदर्शिता और शुचिता को तार-तार करने वाला एक अत्यंत सनसनीखेज मामला सामने आया है। नयापारा स्थित भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शाखा पर विश्व हिंदू सेवा दल के युवा प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रतिष्ठित व्यापारी सतीश कुमार वाधवानी के नाम से बिना किसी आवेदन के फर्जी लोन दर्ज करने का गंभीर आपराधिक आरोप लगा है। जब पीड़ित ने इसका विरोध किया, तो बैंक अधिकारी जवाब देने से पूरी तरह कतराते नजर आए।
​पूरा मामला: फर्जी लोन ने रोकी ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ की राह
​प्राप्त विवरण के अनुसार, पीड़ित सतीश कुमार वाधवानी जब केंद्र सरकार की जनहितकारी ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ की तीसरी किस्त के लिए आवेदन करने पहुँचे, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि बैंक रिकॉर्ड में वर्ष 2023 से उनके नाम पर एक संदिग्ध एवं फर्जी ऋण खाता संचालित दिखाया जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने कभी कोई आवेदन या सहमति दी ही नहीं थी।


​जब पीड़ित ने बैंक से इस फर्जी ऋण का स्टेटमेंट और आउटस्टैंडिंग विवरण मांगा, तो बैंक के शाखा प्रबंधक मनीष त्रिपाठी और सहायक प्रबंधक अमित पांडेय तथा अन्य कर्मचारियों द्वारा पहले तो यह गोलमोल और लिखित भ्रमित जवाब दिया गया कि कोई ऋण संचालित नहीं है, किंतु दस्तावेजों में त्रुटि का हवाला देकर उन्हें योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया।
​पत्रकारों के सवालों पर भड़का बैंक प्रबंधन: “किसने दी पत्रकारिता की अनुमति?”
​इस पूरे भ्रष्टाचार और मनमानी की पोल तब खुली जब 20 तारीख को विभिन्न मीडिया संस्थानों के पत्रकार तथ्यात्मक जानकारी लेने नयापारा स्थित एसबीआई शाखा पहुँचे। बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली इतनी संदेहास्पद थी कि वे ग्राहकों के जायज सवालों के जवाब देने के बजाय उलटा पत्रकारों पर रौब झाड़ने लगे और अभद्र लहजे में यह तक पूछ डाला—
​“आपको पत्रकारिता करने की अनुमति किसने दी?”
​यह अत्यंत विचारणीय और गंभीर प्रश्न है कि जब एक प्रतिष्ठित युवा नेता और सजग पत्रकारों के साथ बैंक अधिकारियों का इतना तानाशाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया है, तो उस बैंक में आने वाले आम, गरीब और बेसहारा इंसान का क्या हाल होता होगा?
​शीर्ष स्तर पर प्रशासनिक एवं विधिक शिकायत दर्ज
​बैंक स्तर पर कोई भी संतोषजनक समाधान या न्याय न मिलने पर पीड़ित श्री सतीश कुमार वाधवानी ने भारतीय संविधान प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए इस गंभीर वित्तीय अनियमितता, फर्जीवाड़े और तानाशाही रवैये की लिखित शिकायत भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), जिला कलेक्टर बिलासपुर, तथा बैंक के महाप्रबंधक व क्षेत्रीय अधिकारियों को भेजकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर त्वरित कठोर विधिक कार्रवाई की मांग की है।
​प्रमुख माँगे एवं विधिक चेतावनियाँ:
​उच्चस्तरीय न्यायिक/प्रशासनिक जाँच: चकरभाठा/नयापारा SBI शाखा के शाखा प्रबंधक मनीष त्रिपाठी, सहायक प्रबंधक अमित पांडेय एवं संलिप्त कर्मियों की कार्यशैली की उच्चस्तरीय जाँच हो।
​फर्जी ऋण का तत्काल विलोपन: पीड़ित के खाते से अवैध व फर्जी ऋण प्रविष्टि को तत्काल निरस्त कर उन्हें ‘प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना’ का यथोचित लाभ प्रदान किया जाए।
​प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान: मीडिया कर्मियों के साथ अभद्रता करने वाले प्रबंधकों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।

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