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बिलासपुर में रेत माफिया का भयावह तांडव: 13 वर्षीय मासूम की मौत के बाद पत्रकारों पर जानलेवा हमले से दहला क्षेत्र।

बिलासपुर में रेत माफिया का भयावह तांडव: 13 वर्षीय मासूम की मौत के बाद पत्रकारों पर जानलेवा हमले से दहला क्षेत्र, कानून के शासन पर खड़े हुए गंभीर सवाल!
बिलासपुर,
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में रेत माफिया का दुस्साहस इस कदर बढ़ चुका है कि अब यह केवल अवैध उत्खनन तक सीमित न रहकर मानवीय संवेदनाओं को कुचलने और लोकतंत्र के प्रहरी पत्रकारों की जान लेने पर उतारू हो गया है। बेलगहना और ग्राम पंचायत पोड़ी क्षेत्र में माफिया का ‘नग्न तांडव’ जारी है, जहाँ एक ओर मासूम अभय पटेल की मौत ने सिस्टम पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, वहीं दूसरी ओर सच उजागर करने वाली मीडिया टीम पर हुए जानलेवा हमलों ने पूरे प्रशासन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
​1. ‘सिस्टम’ की बलि चढ़ा 13 वर्षीय मासूम अभय
​27 जून को रतखंडी में एक बिना नंबर के ‘नीले पावर ट्रैक ट्रैक्टर’ ने 13 वर्षीय अभय पटेल को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैक्टर एक नाबालिग (‘पब्बजी’) चला रहा था। लीपा-पोती का खेल तब सामने आया जब ट्रैक्टर मालिक सुनील नायक ने पुलिस रिकॉर्ड में असली नाबालिग चालक को छुपाते हुए ‘खेतन नायक’ का नाम दर्ज करवा दिया। यही नहीं, कंचनपुर में 15 दिन पूर्व हुई इसी परिवार के ट्रैक्टर से तीन बच्चों की दुर्घटना के बावजूद अब तक किसी की गिरफ्तारी न होना, माफिया के हौसलों को और अधिक मजबूती दे रहा है।

​2. पत्रकारिता पर हमला: क्या अब सच बोलना भी अपराध है?
​पोड़ी की अरपा नदी में अवैध रेत उत्खनन की पड़ताल करने पहुंची ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ की टीम के साथ जो हुआ, वह किसी अपराध-कथा से कम नहीं है। ट्रैक्टर (CG10CA0534) के चालक ने कैमरे पर स्वीकार किया कि वे अवैध संचालन हेतु सरपंच को ₹300 का ‘टैक्स’ देते हैं। सवाल पूछते ही माफिया ने पत्रकार को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया। घटना के उपरांत उपसरपंच के फोन से पत्रकार को सुनसान घाट पर बुलाना और वहां 15-16 लोगों की मौजूदगी में सरपंच द्वारा अभद्र भाषा व धमकियों का उपयोग करना, इस संगठित अपराध का स्पष्ट प्रमाण है।
​3. विभाग की ‘मौन स्वीकृति’ और प्रशासनिक चुनौतियां
​सैकड़ों सबूतों और 20 से अधिक फोन कॉल्स के बावजूद जिला खनिज (माइनिंग) विभाग की चुप्पी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और संदेहास्पद है। यह मौन स्पष्ट रूप से उस गठजोड़ की ओर इशारा करता है, जो कानून के राज को दरकिनार कर अवैध राजस्व वसूली को बढ़ावा दे रहा है।
​4. संवैधानिक और कानूनी आधार
​यह मामला केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर कानूनों का उल्लंघन है:
​BNS धारा 106(1): लापरवाही से मौत के मामले में 5 साल तक की सख्त सजा।
​MV Act 199A: नाबालिग से वाहन चलवाने पर 3 साल की कैद, जुर्माना और वाहन पंजीकरण निरस्तीकरण का प्रावधान।
​हत्या का प्रयास: पत्रकार को ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास सीधे तौर पर ‘अटेम्प्ट टू मर्डर’ की श्रेणी में आता है।
अपेक्षा और प्रतिबद्धता
​क्षेत्र के प्रबुद्धजन, ग्रामीण और पत्रकार इस स्थिति को लेकर अत्यंत चिंतित हैं। शासन-प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि:
​नाबालिग चालक ‘पब्बजी’ व मालिक सुनील नायक को अभिलंब गिरफ्तार कर कठोर वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
​सरपंच व उपसरपंच की संदिग्ध भूमिका तथा ‘सरपंच टैक्स’ के आरोपों की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो।
​पत्रकारों पर हमले के दोषियों को बेनकाब कर कानून का राज स्थापित किया जाए।
​हमारी प्रतिबद्धता:
हम इस चुनौतीपूर्ण समय में संयम और कानून के प्रति पूर्ण आस्था रखते हैं। प्रशासन को 48 घंटों का समय दिया जा रहा है। यदि इन 48 घंटों के भीतर दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो जनहित में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के साथ विचार-विमर्श करके संवैधानिक दायरे में रहते हुए शांतिपूर्ण आंदोलनात्मक कार्यवाही पर विचार किया जाएगा।
​प्रशासन से अनुरोध है कि वे इस ‘जंगलराज’ को समाप्त कर आमजन और पत्रकारों के विश्वास को पुनः बहाल करें।

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