अघोषित कटौती का ‘करंट’: अंधकार में डूबा मुंगेली का ग्रामीण अंचल

मुंगेली जिला। छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में बिजली विभाग की घोर लापरवाही और तानाशाही रवैये ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। भयंकर गर्मी की मार झेलने के बाद, जब ग्रामीणों और किसानों को उम्मीद थी कि बारिश के आगमन से कुछ राहत मिलेगी, तब बिजली विभाग ने ‘मेंटेनेंस’ और ‘सुधार’ के नाम पर अघोषित कटौती का नया तांडव शुरू कर दिया है। थोड़ी सी हवा चलते ही घंटों के लिए बत्ती गुल हो जाना अब मुंगेली की नियति बन चुकी है।

​इस गंभीर समस्या पर विभाग की नाकामी और सरकार की खामोशी को उजागर करती एक विशेष तीखी रिपोर्ट:

​मेंटेनेंस का ढोंग: झाड़ियां छीलकर छोड़ रहे ठेकेदार

​बिजली विभाग के लिए ‘मेंटेनेंस’ का नाम जनता को तंग करने का सिर्फ एक बहाना बन चुका है। हर साल मॉनसून से पहले मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काटी जाती है, लेकिन धरातल पर काम शून्य है।

​नाममात्र की छंटाई: सड़कों के किनारे लगे जिन पेड़ों और झाड़ियों की टहनियां बिजली के तारों को छूती हैं, उनकी छंटाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। ठेकेदार के कर्मचारी झाड़ियों को थोड़ा-बहुत ऊपर से छांटकर जस का तस छोड़ देते हैं। नतीजा यह होता है कि कुछ ही दिनों में ये टहनियां फिर बड़ी हो जाती हैं और हल्की हवा चलते ही तारों से टकराकर फॉल्ट पैदा कर देती हैं।

​अंधकार में डूबा ग्रामीण अंचल: २४ घंटों में से महज कुछ घंटे ही बिजली नसीब हो रही है, बाकी समय गांवों में मातम की तरह अंधेरा पसरा रहता है। रात होते ही अघोषित कटौती का सिलसिला शुरू हो जाता है, जिससे बूढ़े, बच्चे और बीमार लोग उमस भरी गर्मी में तड़पने को मजबूर हैं। रही-सही कसर ‘लो-वोल्टेज’ की समस्या पूरी कर देती है।

​केबल सप्लाई में बड़ा खेल: घटिया क्वालिटी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी व्यवस्था

​नियमों के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में दुर्घटनाओं और फॉल्ट को रोकने के लिए नंगे तारों को हटाकर मोटे और मजबूत इंसुलेटेड केबल लगाए जाने थे, लेकिन यहाँ भी घोर धांधली और भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है।

​घटिया क्वालिटी के केबल: सूत्रों की मानें तो कई क्षेत्रों में बेहद कम गुणवत्ता (Low Quality) के केबल लगा दिए गए हैं। इनमें जरा सा लोड बढ़ते ही फॉल्ट आ जाता है और ये जल जाते हैं। सुधार के नाम पर कर्मचारी इन केबलों को फिर से जोड़-तोड़ कर (पृथक-पृथक) लगा देते हैं, जिससे समस्या कभी खत्म ही नहीं होती।

​सिंगल फेज की जगह थ्री-फेज की जरूरत: आज के समय में जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली की खपत बढ़ी है, वहां सिंगल फेज की सप्लाई देकर खानापूर्ति की जा रही है। जरूरत इस बात की है कि केबलों की गुणवत्ता की कड़ाई से मॉनिटरिंग की जाए और ग्रामीण अंचलों में सिंगल फेज की जगह थ्री-फेज कनेक्शन दिया जाए। वो भी ऐसे मजबूत कवर्ड केबल के माध्यम से, जो आपस में शॉर्ट होकर जले नहीं और निर्बाध सप्लाई दे सकें।

​अव्यवस्थित वायरिंग से बढ़ी मुसीबत: सड़कों पर रेंगते मौत के तार और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक भार

​ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग की सबसे बड़ी लापरवाही उनकी अव्यवस्थित वायरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम है, जो अब किसानों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है।

​सड़कों के ऊपर तारों का जाल: बिना किसी ठोस प्लानिंग के, गांवों में बार-बार सड़कों को क्रॉस कराकर अव्यवस्थित तरीके से नंगे तार दौड़ा दिए गए हैं। ये तार सड़कों पर इतनी कम ऊंचाई पर लटक रहे हैं कि हर वक्त बड़े हादसे का डर बना रहता है।

​हार्वेस्टर और बड़ी गाड़ियों पर ब्रेक: खरीफ और रबी सीजन में किसानों के लिए ‘हार्वेस्टर’ जैसी बड़ी कृषि गाड़ियों का गांवों में आना अनिवार्य है। लेकिन सड़कों के ऊपर लटकते इन नंगे और नीचे तारों की वजह से हार्वेस्टर और ऊंची गाड़ियां गांवों के भीतर प्रवेश नहीं कर पातीं।

​किसानों पर पड़ रहा अतिरिक्त भार: जब खेतों तक हार्वेस्टर नहीं पहुंच पाते, तो किसानों को मजबूरन पारंपरिक तरीकों या अन्य महंगे विकल्पों का सहारा लेना पड़ता है। बिजली विभाग की इस अव्यवस्था की सीधी मार किसानों की जेब पर पड़ रही है और उन्हें अतिरिक्त आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

​कटघरे में सरकार और सिस्टम: कब जागेगा प्रशासन?

​जनता को चौबीस घंटे निर्बाध बिजली देने का दम भरने वाली सरकार और उसके नुमाइंदे आज मुंगेली की इस दुर्दशा पर मौन क्यों हैं? ठेकेदारी प्रथा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर सरकार ने बिजली जैसे मूलभूत अधिकार को निजी स्वार्थ की बलिवेदी पर चढ़ा दिया है।

​अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद और ठेकेदारों की मनमानी ने पूरे मुंगेली जिले को अंधकार की ओर धकेल दिया है। अगर आने वाले दिनों में केबलों को व्यवस्थित नहीं किया गया, नंगे तारों के जाल को सड़कों से नहीं हटाया गया और थ्री-फेज की मजबूत सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो यह जन-आक्रोश जल्द ही सड़कों पर चक्काजाम और उग्र आंदोलन के रूप में फूटने वाला है।

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