श्मशान बासनी मंदिर में राष्ट्र निर्माण का शंखनाद: ‘जड़ बुद्धि से विवेक की ओर’ यात्रा का शुभारंभ।
श्मशान बासनी मंदिर में राष्ट्र निर्माण का शंखनाद: ‘जड़ बुद्धि से विवेक की ओर’ यात्रा का शुभारंभ।
बिलासपुर स्थित श्मशान बासनी मंदिर प्रांगण में एक ऐतिहासिक बौद्धिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बना, बल्कि श्मशान बासनी परिसर के समीप प्रस्तावित ‘गौशाला एवं सांस्कृतिक प्रोजेक्ट’ के शुभारंभ हेतु एक मील का पत्थर सिद्ध हुआ। इस अवसर पर समुद्र शास्त्री और सनसनी फक्कड़ बाबा (श्मशानी बाबा) ने राष्ट्र की सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना को नई दिशा देने हेतु 11-सूत्रीय कार्यक्रम का महा-संकल्प लिया।
आध्यात्मिक केंद्र और गौ-संरक्षण का समन्वय
मंदिर की पवित्रता और गौ-सेवा की महत्ता को रेखांकित करते हुए समुद्र शास्त्री ने कहा कि श्मशान बासनी की यह तपोभूमि सत्य और वैराग्य का प्रतीक है। यहाँ से प्रारंभ होने वाली गौशाला का प्रोजेक्ट केवल एक निर्माण नहीं, अपितु भारतीय संस्कृति के पुनरुत्थान का संकल्प है, जो गौ-वंश को पशु नहीं, अपितु सम्मानजनक स्थान प्रदान करेगा। सनसनी फक्कड़ बाबा (श्मशानी बाबा) ने अपने संबोधन में कहा कि जहाँ श्मशान नश्वरता का बोध कराता है, वहीं गौशाला जीवन पोषण का मार्ग दिखाती है। यह प्रोजेक्ट ‘जड़ बुद्धि’ को बदलकर ‘विवेक’ और ‘सेवा’ के मार्ग पर ले जाने वाला है।
राष्ट्र-हित में 11-सूत्रीय ‘अमर संकल्प’
गोष्ठी में गौ-संस्कृति, शिक्षा और सेवा के एकीकरण हेतु 11-सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की गई। इसमें गुरुकुल, गौशाला, वृद्धाश्रम, महिला सशक्तिकरण, जैविक कृषि एवं युवा कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण आयाम शामिल हैं। इस महा-अभियान को विश्व हिंदू महासभा, अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना, विश्व हिंदू सेवा दल, विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट और जन कल्याण पुनर्वास केंद्र, बोदरी (मीडिया हाउस) का पूर्ण समर्थन प्राप्त है।
संवैधानिक एवं संगठनात्मक भूमिका
इस संकल्प को वैधानिक एवं संगठनात्मक मजबूती प्रदान करने हेतु लक्ष्मण पाल (वरिष्ठ समाज रणनीतिकार), राजपाल (अध्यक्ष, जन-कल्याण समन्वय) और पुखराज सिंह (संवैधानिक सलाहकार) की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रति उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया गया। इसी कड़ी में ‘अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना’ द्वारा लक्ष्मी साध्वी को उनकी अनुकरणीय नेतृत्व क्षमता, समाज सुधार और सनातन संस्कृति के प्रति अटूट निष्ठा के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ (राष्ट्रीय संरक्षक एवं अध्यक्ष) द्वारा प्रदान किया गया।
संपादकीय टिप्पणी
अमर स्तंभ की संपादकीय टिप्पणी के अनुसार, श्मशान बासनी मंदिर के समीप गौशाला प्रोजेक्ट का शुभारंभ मात्र निर्माण नहीं, बल्कि ‘जड़ बुद्धि’ से ‘विवेक’ की ओर जाने वाली एक वैचारिक क्रांति है। समुद्र शास्त्री और सनसनी फक्कड़ बाबा का यह साझा प्रयास समाज को आत्मनिर्भर और संस्कारित बनाने में एक मानक स्थापित करेगा।
