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बड़ी खबर,सुशासन तिहार के बीच विधायक धरमलाल कौशिक और कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के मध्य सार्वजनिक मंच पर तीखी बहस छिड़ गई

बिल्हा के ‘सुशासन तिहार’ मंच पर उभरा राजनैतिक अंतर्विरोध: विधायक धरमलाल कौशिक के समर्थन में उतरे समर्थक, विपक्ष के दावों पर उठाए ऐतिहासिक सवाल
​बिलासपुर। बिल्हा विधानसभा के ग्राम गोढ़ी में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ शिविर में उस समय एक गंभीर वैचारिक और राजनैतिक गतिरोध की स्थिति निर्मित हो गई, जब क्षेत्रीय विधायक धरमलाल कौशिक और कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला के मध्य सार्वजनिक मंच पर तीखी बहस छिड़ गई। इस घटनाक्रम ने न केवल तात्कालिक प्रशासनिक व्यवस्था, बल्कि देश के राजनैतिक इतिहास और सात दशकों के शासनकाल की नीतियों पर भी एक बड़ा वैचारिक विमर्श छेड़ दिया है।

​ऐतिहासिक संदर्भों के साथ सत्ता पक्ष का प्रतिवाद और तीखा प्रहार
​कार्यक्रम के दौरान जब कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला ने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए, तो मंच पर मौजूद विधायक समर्थकों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इसे राजनैतिक दबाव बनाने का प्रयास करार दिया। सत्ता पक्ष के विचारकों और समर्थकों का मत था कि जो दल देश और प्रदेश में लगभग 70 वर्षों तक सत्ता के शीर्ष पर रहा और जिसके कार्यकाल में अनेक नीतिगत विफलताएं तथा प्रशासनिक विसंगतियां (कांड) सामने आईं, उस दल के नेताओं द्वारा वर्तमान जन-हितैषी सरकार पर अनर्गल दबाव बनाना तर्कसंगत नहीं है। समर्थकों का आरोप है कि सत्ता से बाहर होने के कारण विपक्ष अब प्रशासनिक कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करने और लोकप्रिय जनप्रतिनिधियों को लक्षित करने की राजनीति कर रहा है।
​लोकप्रिय जनप्रतिनिधि के प्रति जनता का अटूट विश्वास
​बहस के दौरान माहौल उस समय और अधिक संवेदनशील हो गया जब ग्रामीणों और विधायक समर्थकों ने क्षेत्रीय विधायक धरमलाल कौशिक के प्रति अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त की। समर्थकों का स्पष्ट मत था कि क्षेत्र के विकास के लिए निरंतर समर्पित और जनता के चहेते विधायक के विरुद्ध तीखी बयानबाजी करना और उन पर दबाव बनाना, लोकतांत्रिक मर्यादाओं के प्रतिकूल है। उपस्थित जनसमुदाय के एक बड़े वर्ग ने इसे क्षेत्रीय नेतृत्व को मानसिक रूप से प्रभावित करने और जनता के बीच उनकी छवि को धूमिल करने का एक सोचा-समझा राजनैतिक प्रयास बताया।

​विपक्ष के आरोपों पर उपजा जन-आक्रोश
​कांग्रेस नेता द्वारा उठाए गए मुद्दों का प्रतिवाद करते हुए भाजपा समर्थकों ने मंच के समीप ही नारेबाजी शुरू कर दी। समर्थकों का कहना था कि सुशासन शिविरों के माध्यम से वर्तमान सरकार सीधे जनता तक लाभ पहुंचा रही है, जिससे घबराकर विपक्ष अब जनसमस्याओं के समाधान का श्रेय लेने या उसमें बाधा डालने का प्रयास कर रहा है। समर्थकों ने मंच से ही अतीत की सरकारों की कार्यप्रणाली को याद दिलाते हुए कहा कि लंबे समय तक शासन करने वालों को आज जनता की बुनियादी समस्याओं पर राजनीति करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
​प्रशासनिक सूझबूझ से नियंत्रण में आई स्थिति
​पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते इस वैचारिक और राजनैतिक तनाव को देखते हुए वहां उपस्थित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने हस्तक्षेप किया। दोनों पक्षों को लोकतांत्रिक और संसदीय मर्यादाओं का स्मरण कराते हुए शांत कराया गया, जिसके बाद शिविर की कार्यवाही पुनः सुचारू रूप से संचालित हो सकी।
​निष्कर्ष:
‘सुशासन तिहार’ के मंच पर हुई यह घटना यह स्पष्ट करती है कि क्षेत्र में राजनैतिक चेतना अत्यंत प्रखर है। जहां एक ओर विपक्ष जनसमस्याओं को लेकर आक्रामक है, वहीं दूसरी ओर जनता और सत्ता पक्ष अपने लोकप्रिय विधायक के साथ सुदृढ़ता से खड़े होकर अतीत की राजनैतिक विसंगतियों पर विपक्ष को घेरने से पीछे नहीं हट रहे हैं। यह घटनाक्रम आगामी समय में क्षेत्र की राजनीति को एक नया मोड़ देने का संकेत है।

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