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31 मई को मनेगी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती: चकरभाठा में सामाजिक संगठनों ने भरी हुंकार, लक्ष्मण पाल के नेतृत्व को मिला भारी समर्थन।

31 मई को मनेगी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती: चकरभाठा में सामाजिक संगठनों ने भरी हुंकार, लक्ष्मण पाल के नेतृत्व को मिला भारी समर्थन

“नेतृत्व का मुख्य आधार सिर्फ नेतागिरी नहीं, बल्कि धर्म और लोककल्याण होना चाहिए”: वरिष्ठ पत्रकार समुद्र शास्त्री


बिलासपुर/बोदरी: लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की आगामी 31 मई को आयोजित होने वाली गरिमामयी जयंती महोत्सव को लेकर चकरभाठा में संपन्न हुई बैठक अब एक विशाल सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष बैठक में क्षेत्र की प्रमुख सामाजिक संस्थाओं ने एक मंच पर आकर अपनी वैचारिक और संगठनात्मक सहभागिता सुनिश्चित करते हुए पूर्ण समर्थन की घोषणा की।

इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से विश्व हिंदू महासभा, विश्व हिंदू सेवा दल, अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना और विश्व मानव परोपकार ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारी एवं प्रबुद्ध कार्यकर्ता बड़ी संख्या में सम्मिलित हुए।

वरिष्ठ पत्रकार ‘समुद्र शास्त्री’ की बौद्धिक गोष्ठी: “नेतृत्व का आधार हो धर्म”

बैठक के दौरान आयोजित बौद्धिक गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, वरिष्ठ पत्रकार एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव पंडित श्रवण दुबे ‘समुद्र शास्त्री’ ने रामचरितमानस के कालजयी सूत्रों के माध्यम से आदर्श समाज और कुशल नेतृत्व की विशद व्याख्या की। उन्होंने अपने ओजस्वी विचारों को रेखांकित करते हुए कहा:

“किसी भी नेतृत्व का सबसे मुख्य आधार सिर्फ सत्ता या ‘नेतागिरी’ नहीं, बल्कि धर्म, सत्य और मर्यादा होना चाहिए। महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में स्पष्ट किया है कि जो शासक करुणा और लोककल्याण के मार्ग पर चलता है, वही सच्चा जननायक है।”

समुद्र शास्त्री ने मानस की चौपाइयों का संदर्भ देते हुए समझाया कि:

“धरम न दूसर सत्य समाना” के अनुसार नेतृत्व की वास्तविक शक्ति सत्यनिष्ठा में निहित है।

“परहित सरिस धरम नहि भाई” को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति का हित करना ही सबसे बड़ा धर्म है।

“दैहिक दैविक भौतिक तापा…” के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म आधारित सर्वसमावेशी नेतृत्व ही समाज में ‘रामराज्य’ की तरह सुख, सुरक्षा और समृद्धि स्थापित कर सकता है।

“रघुकुल रीति सदा चलि आई…” के जरिए उन्होंने भावी पीढ़ी और सामाजिक प्रभारियों को ईमानदारी, वचनबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा का संकल्प दिलाया।

मां अहिल्याबाई होल्कर के आदर्शों पर चलने का आह्वान

गोष्ठी के समापन पर समुद्र शास्त्री ने आम जनमानस से आह्वान किया कि जगत माता के पद को सुशोभित करने वाली मां अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में लोककल्याण, न्याय और धर्म स्थापना के जो अनुकरणीय कार्य किए, उन्हीं की वजह से आज भी पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करता है। 31 तारीख को आयोजित होने वाला यह मुख्य महोत्सव चकरभाठा बस्ती में पूरी भव्यता के साथ संपन्न होगा।

करतल ध्वनि से गूंजा प्रेक्षागृह, एकजुटता का संकल्प

जब आगामी कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की गई, तब उपस्थित सभी संगठनों के प्रमुखों ने करतल ध्वनि (तालियों की गड़गड़ाहट) के साथ अध्यक्ष लक्ष्मण पाल के कुशल नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताया। ‘समुद्र शास्त्री’ ने इस ऐतिहासिक एकजुटता की सराहना करते हुए कहा कि जब विभिन्न सामाजिक शक्तियां एक नेक और राष्ट्रभक्ति के कार्य के लिए हाथ मिलाती हैं, तो वह आयोजन समाज के लिए मील का पत्थर साबित होता है।

आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल ने सभी सहयोगी संस्थाओं और शीर्ष नेतृत्व का सहृदय आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह महोत्सव केवल एक समिति का नहीं, बल्कि पूरे समाज की अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों ने जय श्री राम और मां अहिल्याबाई के जयघोष के साथ आगामी महोत्सव को भव्य, ऐतिहासिक और अनुशासित रूप से सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।

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