शिव महापुराण के दिव्य संदेश से आलोकित हुआ ग्राम रहंगी: व्यक्तित्व और समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त।
शिव महापुराण के दिव्य संदेश से आलोकित हुआ ग्राम रहंगी: व्यक्तित्व और समाज के कल्याण का मार्ग प्रशस्त
”
बिलासपुर/रहंगी |
न्यायधानी के समीपस्थ ग्राम रहंगी में आज महिला स्व-सहायता समूह ‘दुर्गा समिति’ के तत्वावधान में आयोजित ‘शिव महापुराण कथा’ का दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। इस भक्तिमय अनुष्ठान में मुख्य अतिथि के रूप में विशिष्ट समुद्र शास्त्री (Physiognomy Expert) और प्रबुद्ध जन सम्मिलित हुए, जहाँ उन्होंने शिव तत्व और मानव जीवन के अंतर्संबंधों पर अपनी गहरी दृष्टि साझा की।
समुद्र शास्त्रीय दृष्टिकोण और आध्यात्मिक संगम:
आयोजन में सम्मिलित होते हुए समुद्र शास्त्र के मर्मज्ञों ने रेखांकित किया कि जिस प्रकार यह शास्त्र मनुष्य के बाहरी लक्षणों से उसके आंतरिक गुणों की पहचान करता है, ठीक उसी प्रकार भगवान शिव का स्वरूप—मस्तक पर चंद्रमा (शीतलता), कंठ में विष (सहनशीलता) और जटाओं में गंगा (पवित्रता)—एक पूर्ण और संतुलित व्यक्तित्व का ‘मेटा-फिजिकल’ ढांचा प्रस्तुत करता है। शिव महापुराण का श्रवण मनुष्य के आभा मंडल (Aura) में सकारात्मक परिवर्तन लाकर उसके आत्मविश्वास और आत्मिक शांति को सुदृढ़ करता है।
संवैधानिक और सामाजिक मूल्यों का समावेश:
विज्ञप्ति में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि शिव कथा केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A (e) के अनुरूप ‘समान भाईचारे और समरसता’ की भावना को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त माध्यम है। भगवान शिव, जो सबको साथ लेकर चलते हैं, समाज को त्याग, करुणा और ऊंच-नीच के भेदभाव से परे रहने का संदेश देते हैं, जो एक आदर्श लोकतंत्र की आधारशिला है।
मुख्य अतिथि के विचार:
”शिव महापुराण जीवन जीने की वह अनुपम विधा है जो विषमता में भी समता सिखाती है। दुर्गा समिति की महिलाओं द्वारा किया गया यह प्रयास नारी शक्ति के उस स्वरूप को दर्शाता है, जो समाज के आध्यात्मिक और सामाजिक उत्थान के लिए कटिबद्ध है। यहाँ की ऊर्जा और श्रद्धालुओं के मुखमंडल पर झलकता संतोष यह प्रमाणित करता है कि भक्ति जब लोक-कल्याण से जुड़ती है, तो वह साक्षात शिवत्व बन जाती है।”
समिति का योगदान:
महिला स्व-सहायता समूह ‘दुर्गा समिति’ के इस अनुकरणीय आयोजन की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक चेतना जगाने वाला एक मील का पत्थर बताया गया। कथा के श्रवण से उपस्थित जनसमूह भावविभोर रहा और पूरे क्षेत्र का वातावरण शिवमय हो गया।
