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​जनसरोकार की चौपाल: कलेक्टर ने संवेदनशीलता से सुनी जन-पीड़ा, त्वरित समाधान हेतु प्रशासन ने कसी कमर।

​जनसरोकार की चौपाल: कलेक्टर ने संवेदनशीलता से सुनी जन-पीड़ा, त्वरित समाधान हेतु प्रशासन ने कसी कमर।

​ न्याय धानी बिलासपुर छत्तीसगढ़ के प्रहरी और जनसेवा के संकल्प को चरितार्थ करते हुए आज कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित ‘जनदर्शन’ कार्यक्रम जन-समाधान का केंद्र बिंदु बना। कलेक्टर बिलासपुर ने एक संवेदनशील अभिभावक की भांति समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की फरियादों को न केवल सुना, बल्कि उनके त्वरित निराकरण हेतु “मौके पर ही न्याय” की परिपाटी को जीवंत किया।
​संवेदना और समाधान का संगम
​जनदर्शन में आज शिकायतों का सैलाब उमड़ा, जिसमें मुख्य रूप से सड़क, शुद्ध पेयजल, विद्युत आपूर्ति, जाति/निवास प्रमाण पत्र और जटिल भूमि विवाद जैसे मुद्दे छाए रहे। कलेक्टर ने प्रत्येक आवेदक से रूबरू होते हुए उनकी समस्याओं को पूरी आत्मीयता से सुना।
​”प्रशासन मात्र फाइलों का अंबार नहीं, बल्कि जनता की आशाओं का संबल है। हर आवेदन में एक व्यक्ति की उम्मीद छुपी होती है, जिसका समयबद्ध निराकरण हमारी संवैधानिक प्राथमिकता है।” कलेक्टर संजय अग्रवाल
​प्रशासनिक सक्रियता और कड़े निर्देश
​कलेक्टर ने ‘ऑन द स्पॉट’ कार्यशैली का परिचय देते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े शब्दों में निर्देशित किया। विज्ञप्ति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
​अधोसंरचना: जर्जर सड़कों और बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों के सुधार हेतु लोक निर्माण और विद्युत विभाग को समय-सीमा (Deadline) निर्धारित कर दी गई।
​पेयजल संकट: भीषण गर्मी/आगामी जल संकट को देखते हुए नलों के विस्तार और टैंकरों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
​राजस्व मामले: भूमि विवाद और सीमांकन के लंबित प्रकरणों पर पटवारियों और तहसीलदारों को मौका-मुआयना कर पारदर्शिता के साथ प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया।
​लोक सेवा: प्रमाण पत्रों की प्राप्ति में हो रहे विलंब को ‘सेवा के अधिकार’ का उल्लंघन मानते हुए अधिकारियों को तत्काल प्रक्रिया पूर्ण करने की हिदायत दी गई।
​समाधान की ओर बढ़ते कदम
​आज का जनदर्शन केवल शिकायतों के पंजीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह “सुशासन से समाधान” की दिशा में एक सक्रिय पहल सिद्ध हुआ। कई प्रकरणों में कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को फोन कर वस्तुस्थिति जानी और शाम तक रिपोर्ट तलब की।
​प्रशासन की इस संवेदनशीलता और कार्यकुशलता ने आमजन के मानस में व्यवस्था के प्रति अटूट विश्वास का संचार किया है।

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