धूमधाम से संपन्न हुआ गु़ड्डे-गुड़ियों का विवाह: परंपराओं की डोर थामे बच्चों ने बिखेरी अक्ति की छटा
मुंगेली संगवाकापा/अक्षय तृतीया (अक्ति) के शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ की गौरवशाली परंपरा और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। क्षेत्र क्रमांक 15 की जनपद सदस्य श्रीमती राजकुमारी राजेश साहू के नेतृत्व में उनके निजी निवास संगवाकापा में आयोजित ‘पुतरा-पुतरी’ विवाह ने इस बार भी सबका मन मोह लिया।

नन्हे बारातियों ने जमाया रंग
हर साल की भांति इस वर्ष भी छोटे-छोटे बच्चों ने उत्साह और उमंग के साथ गुड्डे-गुड़ियों के विवाह की रस्में निभाईं। बैंड-बाजे की मधुर धुन और गाजे-बाजे के साथ जब पुतरा-पुतरी की बारात निकली, तो पूरा गांव थिरक उठा। बच्चों ने न केवल दूल्हा-दुल्हन के रूप में अपने खिलौनों को सजाया, बल्कि शादी की हर रस्म को पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ निभाया।
छठवें वर्ष का ‘बेमिसाल’ आयोजन
जनपद सदस्य श्रीमती राजकुमारी राजेश साहू के मार्गदर्शन में यह आयोजन लगातार छठवें वर्ष भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हमारी लुप्त होती ग्रामीण संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ना है।
”हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है। बच्चों के माध्यम से अक्ति की इस परंपरा को जीवित रखना गौरव की बात है।”
— श्रीमती राजकुमारी राजेश साहू, जनपद सदस्य

ग्रामीणों में भारी उत्साह
इस पारंपरिक उत्सव को देखने के लिए ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। गाजे-बाजे के साथ संपन्न हुई इस शादी को देखकर ग्रामीण जन काफी उत्साहित नजर आए। बड़ों ने बच्चों के इस खेलनुमा आयोजन को अपना आशीर्वाद दिया और पुरानी यादें ताजा कीं।
प्रमुख आकर्षण:
- बैंड-बाजा और बारात: वास्तविक शादियों की तरह ही भव्य आयोजन।
- पारंपरिक रस्में: हल्दी, मड़वा और फेरों की रस्मों का पालन।
- सामूहिक भागीदारी: बच्चों के साथ-साथ बड़ों ने भी निभाया उत्साहवर्धक साथ।
यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बना, बल्कि इसने संदेश दिया कि यदि सही नेतृत्व मिले, तो हमारी गौरवशाली परंपराएं आने वाले कई वर्षों तक इसी तरह चमकती रहेंगी।
