नगर पालिका बोदरी में कोयला परिवहन बना जानलेवा, जनता रोज़ कर रही मौत से मुठभेड़ बोदरी |
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ के नगर पालिका बोदरी क्षेत्र की जनता हर दिन जान जोखिम में डालकर जीवन जीने को मजबूर है। बोदरी, जो बिलासपुर जिले की सबसे बड़ी नगर पालिकाओं में शामिल है, जहां हाईकोर्ट, एयरपोर्ट और जिले का सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला बाजार क्षेत्र स्थित है, वहीं प्रशासनिक लापरवाही अब आम लोगों के लिए घातक साबित हो रही है।

बिलासपुर से एयरपोर्ट को जोड़ने वाला यह मुख्य मार्ग अत्यंत व्यस्त है। इसी मार्ग पर बोदरी से चकरभाठा, नयापारा और दाधापारा को जोड़ने वाली कच्ची सड़क से प्रतिदिन 70–80 टन कोयला लदी भारी गाड़ियां 24 घंटे गुजर रही हैं। इस अनियंत्रित कोयला परिवहन के कारण अब तक सैकड़ों सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक नागरिक स्थायी रूप से विकलांग हो चुके हैं।
बीती रात भी एक युवक गंभीर दुर्घटना में मौत के मुंह से बाल-बाल बचा।
कोयला डस्ट से खेती और स्वास्थ्य दोनों पर संकट
कोयले की उड़ती धूल से बोदरी, दाधापारा, अचानकपुर और चकरभाठा क्षेत्र की कृषि भूमि बुरी तरह प्रभावित हो रही है। फसल उत्पादन घटने से किसान आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो वे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर, कोयला डस्ट के कारण क्षेत्र के लोग दमा, सांस की बीमारी और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि लोग अपने घरों के भीतर भोजन करते समय भी कोयले की धूल से सुरक्षित नहीं हैं।

प्रशासन को कई बार दी गई जानकारी, फिर भी नहीं बनी गाइडलाइन
स्थानीय लोगों ने इन समस्याओं को लेकर कई बार शासन-प्रशासन को अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस गाइडलाइन या नियंत्रण व्यवस्था लागू नहीं की गई।
इस विषय को लेकर सुनील साहू, जो बिल्हा विधानसभा के युवा कांग्रेस अध्यक्ष हैं, ने वरिष्ठ पत्रकार पंडित श्रवण दुबे एवं अमर स्तंभ के माध्यम से जनसमस्याओं को सामने रखते हुए आम जनता के हित में सहयोग की मांग की।
इसके साथ ही, बोदरी के मुख्य नगर पालिका अधिकारी, तहसीलदार बोदरी एवं एसडीएम बिल्हा को ज्ञापन सौंपा गया।
15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो होगा चक्का जाम
सुनील साहू ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर कोयला परिवहन को लेकर निर्देशित गाइडलाइन लागू नहीं की गई, तो क्षेत्र में चक्का जाम के रूप में बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
