धान की फसल जलाकर किसानों को किया बर्बाद, बेमेतरा के ग्राम भरदा में न्याय की गुहार
धान की फसल जलाकर किसानों को किया बर्बाद, ग्राम भरदा में न्याय की गुहार


बेमेतरा/भरदा | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के ग्राम भरदा में किसानों के साथ हुई एक गंभीर आपराधिक घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि गांव निवासी दिलीप निषाद द्वारा जानबूझकर खेतों में आग लगाकर कई किसानों की धान की फसल और सिंचाई संसाधनों को जला दिया गया, जिससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
पीड़ित किसानों के अनुसार, दिनांक 09 दिसंबर 2025 को दिलीप निषाद ने अपने पिता सगुन निषाद के साथ मिलकर ग्राम भरदा के किसानों के खेतों में आग लगा दी। इस घटना में धनेश्वर, नरोत्तम, नरेश पटेल, परदेशी यादव, तोरण निषाद, श्यामसुंदर सहित कई किसानों की पूरी फसल जलकर राख हो गई।
10 लाख रुपये से अधिक का नुकसान
किसानों ने बताया कि इस आगजनी में लगभग 8.37 लाख रुपये की धान की फसल और करीब 2 लाख रुपये के पाइप, केबल, मोटर व सिंचाई उपकरण नष्ट हो गए। कुल मिलाकर किसानों को लगभग 10 से 12 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।
समझौता हुआ, फिर मुकर गया आरोपी
घटना के बाद ग्राम पंचायत भरदा में पंचायत एवं पुलिस की मौजूदगी में आरोपी पक्ष द्वारा लिखित समझौता किया गया था। इसमें प्रति क्विंटल 3100 रुपये की दर से मुआवजा देने का वादा किया गया था। भुगतान की तारीख 31 जनवरी 2026 तय हुई थी।
लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि निर्धारित दिन आरोपी ने मात्र डेढ़ लाख रुपये देने की बात कहकर शेष राशि देने से इंकार कर दिया।

पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप
पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने पुलिस चौकी कंडरका में कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे आरोपियों के हौसले और बढ़ गए हैं।
कर्ज में डूबे किसान, परिवार पर संकट
किसानों ने बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर बीज, खाद और मशीनरी खरीदी थी। फसल जलने के बाद अब उनके सामने परिवार के पालन-पोषण और कर्ज चुकाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।
किसानों की प्रशासन से मांग
पीड़ित किसानों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और गृह मंत्री से मांग की है कि—
✔️ आरोपियों पर IPC की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया जाए
✔️ तत्काल गिरफ्तारी हो
✔️ किसानों को उचित मुआवजा मिले
✔️ पुलिस की भूमिका की जांच हो
✔️ भविष्य में ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए
बड़ा सवाल
जब किसान अपनी मेहनत से देश का पेट भरते हैं, तब उनके साथ हुई इस तरह की घटनाओं पर प्रशासन की चुप्पी क्यों?
क्या दोषियों को संरक्षण मिला हुआ है?
या फिर गरीब किसानों की आवाज़ यूं ही दबा दी जाएगी?
