अदालतों में हाई अलर्ट: NIC पर मिली धमकी के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम, बिलासपुर में पुलिस ने संभाला मोर्चा

छत्तीसगढ़ बिलासपुर में अदालतोबा हाई कोर्ट के अलर्ट के बाद पुलिस से संभाला मोर्चा

अदालतों में हाई अलर्ट निक पर मिली धमकी के पास सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अदालतों में हाई अलर्ट: NIC पर मिली धमकी के बाद सुरक्षा के कड़े इंतजाम, बिलासपुर में पुलिस ने संभाला मोर्चा


अदालत परिसर के मुख्य द्वारों पर पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की गई है। कोर्ट आने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। पुलिस आने वालों से उनके आने का कारण, संबंधित मामले की जानकारी और उनके अधिवक्ता का नाम भी पूछ रही है। सुरक्षा के लिहाज से न केवल कोर्ट कैंपस, बल्कि जजों के कक्षों (कोर्ट रूम) के बाहर भी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के न्यायिक परिसरों में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) के माध्यम से एक गंभीर सुरक्षा संदेश प्राप्त हुआ। मद्रास हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर देशभर के साथ छत्तीसगढ़ की पुलिस भी अलर्ट मोड पर आ गई है। प्रदेश के रायपुर और बिलासपुर सहित सभी जिला न्यायालयों की सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है।

जानकारी के अनुसार, NIC नेटवर्क पर एक संदेश प्रसारित हुआ जिसमें सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरे का उल्लेख था। इस इनपुट के मिलते ही छत्तीसगढ़ पुलिस के आला अधिकारी सक्रिय हो गए।

बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने बताया कि संदेश मिलते ही तत्काल प्रभाव से जिला न्यायालय और अन्य अधीनस्थ अदालतों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

चप्पे-चप्पे पर पुलिस की पैनी नजर
अदालत परिसर के मुख्य द्वारों पर पुलिस अधिकारियों और जवानों की तैनाती की गई है। कोर्ट आने वाले हर व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है। पुलिस आने वालों से उनके आने का कारण, संबंधित मामले की जानकारी और उनके अधिवक्ता का नाम भी पूछ रही है। सुरक्षा के लिहाज से न केवल कोर्ट कैंपस, बल्कि जजों के कक्षों (कोर्ट रूम) के बाहर भी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं।
SSP रजनेश सिंह का बयान: ‘सुरक्षा और सजगता के लिए मॉक ड्रिल’
बिलासपुर एसएसपी रजनेश सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, “सुरक्षा की दृष्टि से और अपराधियों की पहचान के लिए यह एक व्यापक स्तर की कार्रवाई है। हाई कोर्ट में साल में एक बार ऐसी प्रक्रिया अपनाई जाती है, लेकिन इस बार इसे जिला न्यायालयों में भी सख्ती से लागू किया जा रहा है।

हम इसे एक मॉक ड्रिल के रूप में भी देख रहे हैं ताकि हमारी सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को दूर किया जा सके और पुलिस बल की तत्परता जांची जा सके

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