धान खरीदी से ठीक पहले छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक हठधर्मिता और तकनीकी पेचीदगियों के बीच पिस रहे अन्नदाता और पटवारी!

मुंगेली (छत्तीसगढ़): फलित के साथ वार्षिक की रिपोर्ट

राज्य में एक तरफ जहाँ धान खरीदी का सीजन सिर पर है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी खामियों के कारण अन्नदाता किसानों और राजस्व पटवारियों के बीच भारी संकट और असमंजस की स्थिति बन गई है। धान खरीदी से ठीक पहले होने वाली गिरदावली और फसल के भौतिक सत्यापन में ‘PV ऐप’ (PV App) की व्यावहारिक व तकनीकी समस्याओं को लेकर राजस्व पटवारी संघ, छत्तीसगढ़ (जिला मुंगेली) ने आक्रामक रुख अपना लिया है। समस्याओं का समाधान करने के बजाय शासन-प्रशासन द्वारा पटवारियों पर की जा रही दमनकारी कार्रवाइयों के विरोध में पटवारियों ने 13 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का बड़ा ऐलान कर दिया है।

​धान खरीदी से पहले गिरदावली का पेच और किसानों की फजीहत

​हर साल धान खरीदी के समय किसानों के लिए ‘गिरदावली’ (फसल का रकबा और भौतिक सत्यापन) का कार्य जीवन-मरण जैसा होता है। यदि समय पर गिरदावली दुरुस्त न हो, तो किसानों को अपनी मेहनत की फसल बेचने में बिचौलियों के चक्कर काटने पड़ते हैं या उनका धान समर्थन मूल्य पर बिकने से छूट जाता है। वर्तमान में डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक पंजीयन, किसान पंजीयन और बांकेट क्लेम जैसे भारी-भरकम कार्यों के बीच ‘PV ऐप’ की तकनीकी बाधाओं ने पटवारियों की कमर तोड़ दी है। जब अन्नदाता किसान अपनी गिरदावली सुधरवाने के लिए पटवारियों के पास दौड़ते हैं और तकनीकी खामियों के चलते काम अटकता है, तो सीधा गुस्सा किसानों का अन्नदाता पर और शासन का गुस्सा पटवारियों पर फूटता है। इस तकनीकी अराजकता का खामियाजा अंततः सीधे तौर पर गरीब किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

​प्रशासन का दमनकारी रवैया: संवादहीनता या तानाशाही?

​पत्र के अनुसार, पटवारी संघ ने पहले ही शासन और विभाग को PV ऐप की व्यावहारिक समस्याओं से अवगत करा दिया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया। हद तो तब हो गई जब ऐप की अव्यवहारिक व्यवस्था का विरोध करने पर प्रशासन ने बलौदाबाजार, महासमुंद, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जैसे जिलों में पटवारियों और संघ के पदाधिकारियों को कारण बताओ नोटिस थमा दिए, उनका ट्रांसफर कर दिया और यहाँ तक कि निलंबित भी कर दिया।

​यह एक तीखा सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन संवाद के जरिए समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल दमन के बल पर तंत्र चलाना चाहता है? पटवारियों पर की गई ये दमनात्मक कार्रवाईयां इस बात का प्रमाण हैं कि नौकरशाही अपनी जमीनी नाकामियों को छिपाने के लिए मैदानी कर्मचारियों को बलि का बकरा बना रही है।

​वर्षों पुरानी मांगें और चेतावनी

​राजस्व पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल तकनीकी समस्याओं से ही नहीं, बल्कि अपनी वर्षों लंबित वेतन विसंगति और पदोन्नति के अधिकारों की उपेक्षा से भी आहत हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि द्वेषपूर्ण और पूर्वाग्रह से ग्रसित आदेशों को तुरंत शून्य नहीं किया गया और लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो 13 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले अनिश्चितकालीन आंदोलन की संपूर्ण जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी।

​निष्कर्ष: नुकसान किसका?

​एक तरफ किसानों को धान बेचने से पहले गिरदावली और रकबे के सत्यापन की चिंता सता रही है, तो दूसरी तरफ पटवारियों का कलम छोड़ हड़ताल पर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं। यदि समय रहते शासन ने जिद छोड़कर पटवारियों की जायज मांगों और ऐप की तकनीकी कमियों को दूर नहीं किया, तो इसका सीधा प्रहार छत्तीसगढ़ के मेहनतकश किसानों के धान पंजीयन और खरीदी प्रक्रिया पर पड़ेगा। अब देखना यह होगा कि शासन इस गंभीर स्थिति को भांपकर समझदारी दिखाता है या फिर किसानों और पटवारियों को और अधिक मुसीबत में धकेलता है।

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