मुंगेली जनपद पंचायत और CEO का बड़ा कारनामा: कोर्ट से हारी हुई जमीन की कर दी नीलामी, ₹8.5 लाख हड़पकर किसान को कर रहे प्रताड़ित
मुंगेली जनपद पंचायत और CEO का बड़ा कारनामा: कोर्ट से हारी हुई जमीन की कर दी नीलामी, ₹8.5 लाख हड़पकर किसान को कर रहे प्रताड़ित
रिपोर्ट – वार्षिक
दिनांक: 01 जुलाई, 2026
श्रेणी: प्रशासनिक भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी एवं प्रताड़ना

मुंगेली। जनपद पंचायत मुंगेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) और प्रशासनिक तंत्र द्वारा एक सीधे-साधे ग्रामीण किसान के साथ धोखाधड़ी करने और उसे घोर मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जिस जमीन के मालिकाना हक का मुकदमा जनपद पंचायत मुंगेली माननीय जिला न्यायालय में साल 2019 में ही हार चुकी है, उस विवादित और बेजा-कब्जा वाली 33.01 एकड़ सरकारी जमीन की न केवल दोबारा ऊंची बोली लगवाकर नीलामी कर दी गई, बल्कि पीड़ित किसान से ₹8.50 लाख भी हड़प लिए गए। अब अधिकार पत्र देने के बजाय जनपद पंचायत के अधिकारी पीड़ित किसान को ही जेल भेजने और कुर्की करने की धमकी भरे नोटिस जारी कर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

पूरा मामला मुंगेली जिले के ग्राम कंतेली का है। पीड़ित किसान कमल नारायण शर्मा (उम्र 49 वर्ष), आत्मज श्री वेदप्रकाश शर्मा, निवासी ग्राम कंतेली ने अपनी मेहनत की कमाई को प्रशासनिक धोखाधड़ी के चक्रव्यूह में फंसा पाया है। थक-हारकर पीड़ित किसान ने अपने अधिवक्ताओं रवि सिंह क्षत्रिय एवं आदित्यराज सिंह क्षत्रिय के माध्यम से मुंगेली कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत मुंगेली को धारा 80 व्य.प्र.सं. (CPC) के तहत वैधानिक नोटिस भेजकर न्याय की गुहार लगाई है और उग्र कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
1. झूठे विज्ञापनों के जाल में फंसाया, लाखों रुपये ऐंठे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत मुंगेली (नोटीसी क्र. 1) द्वारा ग्राम पंचायत कंतेली के प.ह.नं. 6 स्थित भूमि खसरा नंबर 161/20, रकबा 33.01 एकड़ को कृषि कार्य हेतु 3 वर्ष के लिए नीलाम करने का शासकीय विज्ञापन प्रकाशित कराया गया था। सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करके किसान कमल नारायण शर्मा ने नीलामी में भाग लिया और दिनांक 31.07.25 से शुरू होने वाली 3 साल की अवधि के लिए अधिकतम बोली ₹24,15,000/- (चौबीस लाख पंद्रह हजार रुपये) लगाकर इसे प्राप्त किया।


नीलामी की शर्तों के मुताबिक, पीड़ित ने कुल तय राशि में से ₹8,50,000/- (आठ लाख पचास हजार रुपये) नगद जमा किए, जिसमें ₹50,000 अमानत राशि और शेष ₹8,00,000 शामिल थे। इसकी विधिवत रसीद भी जनपद पंचायत द्वारा दिनांक 27.06.25 को जारी की गई। लेकिन असली प्रताड़ना और धोखाधड़ी का खेल इसके बाद शुरू हुआ।
दस्तावेजी सबूत: खुद पत्र लिखकर फंसे जनपद पंचायत के अधिकारी
मामले में एक और नया और बेहद चौंकाने वाला दस्तावेजी सबूत सामने आया है, जो यह साबित करता है कि जनपद पंचायत के अधिकारी इस जालसाजी में पूरी तरह लिप्त थे।
कार्यालय जनपद पंचायत मुंगेली का सरकारी पत्र (क्र./1530/पंचा./ज.पं./2025, दिनांक 09.09.2025):
तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जनपद पंचायत मुंगेली के हस्ताक्षर से शाखा प्रबंधक, शासकीय सोसायटी कंतेली को एक पत्र भेजा गया था। इस पत्र के विषय में स्पष्ट लिखा था कि “कृषि कार्य हेतु यूरिया एवं अन्य खाद प्रदान किए जाने के संबंध में”। पत्र के अंदर अधिकारियों ने लिखित रूप से दावा किया कि:
“ग्राम पंचायत कंतेली में जनपद पंचायत की 32 एकड़ भूमि स्वामी हक की जमीन है जिसको कमलनारायण शर्मा को लीज पर प्रदान किया गया है। अतः श्री कमलनारायण शर्मा को उनकी आवश्यकता अनुसार यूरिया, राखड़ एवं अन्य खाद सामग्री देने का कष्ट करें।”
यह सरकारी पत्र इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि जो जमीन जनपद पंचायत कोर्ट में हार चुकी थी, उसे सरकारी दस्तावेजों में “स्वामी हक की जमीन” बताकर किसान को धोखे में रखा गया और बाद में उसे पूरी तरह लाचार छोड़ दिया गया।
बड़ा खुलासा: जिस जमीन को नीलाम किया, उसे 2019 में ही कोर्ट में हार चुकी है पंचायत!
वैधानिक नोटिस में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जिस भूमि (ख.नं. 161/20, रकबा 33.01 एकड़) की नीलामी कर जनपद पंचायत पैसे वसूल रही है, उसके संबंध में माननीय जिला न्यायाधीश मुंगेली (पीठासीन श्री जी.एस. कुंजाम) ने अपील प्रकरण क्रमांक 44ए/2018 (यशवंत कुमार सिंह विरुद्ध जनपद पंचायत मुंगेली) में दिनांक 20.02.19 को ही ऐतिहासिक निर्णय पारित कर दिया था। इस फैसले के तहत कोर्ट ने यशवंत कुमार सिंह को इस पूरी भूमि का स्वत्वाधिकारी (असली मालिक) घोषित कर दिया था। इस बात की पूरी जानकारी जनपद पंचायत के अधिकारियों को थी, फिर भी जानबूझकर धोखाधड़ी (Fraud) करते हुए इस जमीन को दोबारा नीलाम कर दिया गया।
2. न जमीन के कागज दिए, न धान बेचने दिया: चारों तरफ से किया लाचार
लाखों रुपये जमा कराने के बाद जब पीड़ित किसान कमल नारायण शर्मा ने खेती के लिए भूमि का अधिकार प्रमाण पत्र और राजस्व दस्तावेज (बी-1, खसरा आदि) मांगे, तो जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने अपने अड़ियल और तानाशाही स्वभाव का परिचय देते हुए साफ मना कर दिया। अधिकारियों ने मौखिक रूप से कहा कि “जो रसीद दी गई है वही पर्याप्त है।” अधिकार पत्र और खसरा दस्तावेज न होने के कारण पीड़ित किसान जिला सहकारी समिति कंतेली में धान विक्रय हेतु अपना पंजीयन भी नहीं करा सका। इसके कारण उसे अपनी फसल को औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे उसे भारी आर्थिक, मानसिक और शारीरिक क्षति उठानी पड़ी। इस गंभीर लापरवाही और प्रताड़ना की शिकायत जब पीड़ित ने वरिष्ठ अधिकारियों से की, तो उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
3. जमीन पर माफिया और बेजा-कब्जाधारियों का राज, प्रशासन ने वसूला ‘अवैध धन’
पीड़ित किसान जब पहली बार जमीन पर खेती करने पहुंचा, तो उसके होश उड़ गए। जिस 33.01 एकड़ जमीन का उसने ठेका लिया था, उसमें से महज 5 से 7 एकड़ भूमि ही कृषि योग्य बची थी। बाकी की जमीन पर पूरी तरह से अवैध कब्जे का साम्राज्य था:
लगभग 3-4 एकड़ की कीमती भूमि पर गांव के कुछ रसूखदारों ने बेजा-कब्जा करके अवैध रूप से शासकीय अस्पताल का निर्माण तक करवा दिया है।
लगभग 10 से 12 एकड़ की मुख्य भूमि पर कंतेली निवासी रसूखदार घनश्याम सिंह ठाकुर द्वारा पूर्व से ही अवैध कब्जा जमाकर धड़ल्ले से कृषि कार्य किया जा रहा है।
बाकी बची 10-12 एकड़ भूमि पूरी तरह से उबड़-खाबड़ और गड्ढों से भरी है, जो खेती के सर्वथा अयोग्य है।
नोटिस में साफ कहा गया है कि इन कब्जों और अदालती आदेश की जानकारी होने के बावजूद जनपद पंचायत मुंगेली के अधिकारियों ने पीड़ित से अवैध रूप से धन वसूला है, जो शासकीय कदाचरण और सीधे तौर पर उगाही (Extortion) की श्रेणी में आता है।


4. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे: अब पैसे वसूलने के लिए दे रहे धमकी भरे नोटिस
हद तो तब हो गई जब कब्जा दिलाने और कोर्ट केस सुलझाने के बजाय, जनपद पंचायत के अधिकारियों ने अपनी कमियों को छुपाने के लिए पीड़ित किसान पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। प्रशासन द्वारा दिनांक 30.04.26, 15.05.26 और 05.06.26 को लगातार तीन नोटिस भेजकर पीड़ित से शेष राशि की जबरन वसूली के लिए डराया-धमकाया जा रहा है। बिना जमीन का वैध कब्जा सौंपे इस तरह पैसे मांगना पूरी तरह अवैध और मानसिक प्रताड़ना की पराकाष्ठा है।
5. 2 महीने का अल्टीमेटम, वरना दर्ज होगा आपराधिक मुकदमा
पीड़ित कमल नारायण शर्मा ने इस नोटिस के माध्यम से मुंगेली प्रशासन और जनपद पंचायत को स्पष्ट चेतावनी दी है कि:
सूचना प्राप्ति के 2 माह के भीतर पीड़ित को हुई आर्थिक और मानसिक हानि की पूरी भरपाई की जाए।
विवादित 33.01 एकड़ रकबा से तत्काल प्रभाव से सभी बेजा-कब्जा हटाकर उसे विधिवत कृषि योग्य बनाकर पीड़ित को वास्तविक भौतिक कब्जा सौंपा जाए।
अथवा, विकल्प के रूप में जो 5-7 एकड़ कृषि योग्य भूमि बची है, केवल उसी के अनुपात में नीलामी राशि समायोजित कर बाकी की पूरी रकम पीड़ित को ब्याज सहित वापस की जाए।
यदि तय समय सीमा के भीतर जनपद पंचायत मुंगेली और जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा संतोषप्रद कार्रवाई या उत्तर नहीं दिया जाता, तो पीड़ित अधिकारीगण के विरुद्ध न्यायालय में पृथक से दीवानी और दांडिक (Criminal Case) परिवाद प्रस्तुत करेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस बड़े मामले के सामने आने के बाद अब देखना यह है कि मुंगेली कलेक्टर इस संगठित प्रशासनिक भ्रष्टाचार और किसान प्रताड़ना पर क्या एक्शन लेते हैं।
