सनातन, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय का महासंगम: 14 जून को मल्हार के महाकाली दरबार में जुटेंगे देश-विदेश के सनातनी
सनातन, स्वाभिमान और सामाजिक न्याय का महासंगम: 14 जून को मल्हार के महाकाली दरबार में जुटेंगे देश-विदेश के सनातनी।
बिलासपुर
गऊ प्रकोष्ठ प्रभारी छत्तीसगढ़ रामेश्वर पांडे उर्फ समसानी फक्कड़ बाबा एवं मल्हार काली मंदिर के प्रमुख की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सामाजिक संस्थाओं का मिला ऐतिहासिक समर्थन।

विश्व हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल की गरिमामयी सक्रियता से सनातनी अभियान को मिला नया संबल
धमनी में श्री रामेश्वर पांडे उर्फ श्मशान वासिनी फक्कड़ बाबा के पावन सानिध्य में गूंजेगा। लोक-कल्याण का शंखनाद
जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस के विशेष सहयोग से वैचारिक चेतना को मिलेगी अभूतपूर्व गति
बिलासपुर/धमनी। छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर राष्ट्र निर्माण, सनातन संस्कृति के संरक्षण और सामाजिक विसंगतियों के उन्मूलन हेतु एक अभूतपूर्व वैचारिक व व्यावहारिक क्रांति का सूत्रपात हुआ है। इस पुनीत सेवा कार्य में ‘जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस’ (बोदरी, बिलासपुर) तथा क्षेत्र के सम्मानित मार्गदर्शक ‘श्री रामेश्वर पांडे उर्फ श्मशान वासिनी फक्कड़ बाबा’ के पावन सानिध्य के साथ-साथ विश्व हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल का मुख्य वैचारिक एवं संस्थानिक सहयोग संपूर्ण समाज को नई चेतना प्रदान कर रहा है।
बिलासपुर के बोदरी चकरभाठा में अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण मंच (संस्कृति प्रकोष्ठ) के अध्यक्ष, प्रख्यात विद्वान पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री की गरिमामयी अध्यक्षता में आयोजित संयुक्त महा-वेबिनार में राष्ट्र निर्माण की भावी रूपरेखा तय की गई। इसी कड़ी में धमनी की धरा पर श्री रामेश्वर पांडे उर्फ श्मशान वासिनी फक्कड़ बाबा सहित प्रबुद्ध जनमानस की गरिमामयी उपस्थिति में आगामी 14 जून 2026, रविवार को ग्राम जैतपुर (मल्हार, मस्तूरी) स्थित माँ महाकाली दरबार, अघोर पीठ में आयोजित होने वाले विशाल भंडारा कार्यक्रम को लेकर रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित की गई, जिसमें संपूर्ण भारतवर्ष से भारी संख्या में सनातनी एकजुट होकर सहभागिता करेंगे।
लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती का स्वर्णिम संदेश (सोनारिका विमर्श)
बैठक के दौरान संस्कृति और राष्ट्र-धर्म की रक्षा पर चर्चा करते हुए हाल ही में मनाई गई न्याय, त्याग और सनातन धर्म रक्षिणी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी की जयंती का पुण्य स्मरण किया गया। इस गौरवशाली प्रसंग को रेखांकित करते हुए एक स्वर्णिम संदेश (सोनारिका रूप) के साथ संकल्प लिया गया कि:
”जिस प्रकार लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर जी ने महेश्वर से लेकर संपूर्ण अखंड भारत में सुशासन, न्याय और मंदिरों के जीर्णोद्धार की अलख जगाई थी, ठीक उसी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और मातृशक्ति के स्वाभिमान को आधार बनाकर आज का यह सनातनी समाज पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री के नेतृत्व में लोक-कल्याण और सामाजिक समरसता के पथ पर निरंतर अग्रसर रहेगा।”
प्रमुख सामाजिक संगठनों का मिला ऐतिहासिक संस्थागत समर्थन
राष्ट्र और समाज की मजबूती हेतु देश की अग्रणी सामाजिक संस्थाओं ने एक सुर में अपना संवैधानिक और नैतिक समर्थन घोषित किया है। इस महासंगम में जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस ने अपनी सशक्त प्रचार-प्रसार प्रणाली के माध्यम से इस पूरे लोक-कल्याणकारी आयोजन को जन-जन तक पहुँचाने की महत्वपूर्ण कमान संभाली है। पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री के आह्वान पर समाज में शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, रोजगार प्रशिक्षण, गुरुकुल एवं गौशाला स्थापना जैसे संवेदनशील विषयों पर एकजुटता जताई गई। समर्थन देने वाले मुख्य संगठनों में शामिल हैं:
विश्व मानव परमार्थ ट्रस्ट (संरक्षक: महर्षि मुरलीधर व्यास)
विश्व हिंदू सेवा दल (संरक्षक: श्री कैलाश राजपूत)
किसान समाज पार्टी (राष्ट्रीय अध्यक्ष: श्री एस. पी. मिश्रा)
भूतपूर्व सैन्य फाउंडेशन एवं वन मैन आर्मी सुरक्षा संस्था (संरक्षक: श्री राकेश कुमार सिंह)
इस पावन अवसर पर पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री तथा प्रदेश अध्यक्ष श्री लक्ष्मण पाल की उपस्थिति में समाज में ‘संस्कार दोहन’ को रोकने के लिए संस्थानिक संवैधानिक समर्थन प्रदान करने की आधिकारिक घोषणा की गई।
’धर्म संसद’ का वैचारिक अमृत: श्री दिनेश दुबे के मुख्य अंश
कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ता पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री ने अपने उद्बोधन में प्रखर चिंतक श्री दिनेश दुबे द्वारा संचालित ‘धर्म संसद’ के मुख्य अंशों को रेखांकित करते हुए छत्तीसगढ़ के स्वाभिमान, सुशासन और मानवाधिकारों की रक्षा पर एक विस्तृत संवैधानिक व्याख्या प्रस्तुत की:
1. मानवाधिकारों का संरक्षण और गरीबों का हक:
वर्तमान परिवेश में मजबूरी का फायदा उठाकर गरीबों के हक का हनन करना एक गंभीर नैतिक अपराध है। जब शक्तिशाली वर्ग द्वारा ह्यूमन राइट्स का वायलेशन (उल्लंघन) किया जाता है, तो समाज में द्वंद्व और असमानता बढ़ती है। सकारात्मक और समावेशी उपायों से ही इस शोषण को रोका जा सकता है।
2. सुशासन, नशामुक्ति und पारदर्शी प्रशासन:
छत्तीसगढ़ को किसी राजनीतिक प्रयोगशाला के रूप में इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा। भ्रष्टाचार पर कठोर नियंत्रण ही सुशासन की पहली शर्त है। फर्जी प्रकरण बनाने वाले और कर्तव्यहीन पुलिस कर्मियों के खिलाफ बर्खास्तगी व गंभीर धाराओं के तहत दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। राज्य को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के लिए अवैध व्यापार and तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध आवश्यक है।
3. ‘मेरा छत्तीसगढ़, मेरा स्वाभिमान’:
छत्तीसगढ़ केवल खनिजों की भूमि नहीं, बल्कि सरलता और संवेदनशीलता की पहचान है। राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि अंतिम छोर के व्यक्ति की सेवा का माध्यम बनाना होगा। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों को उपज का सही मूल्य और आदिवासी संस्कृति का संरक्षण हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
14 जून का पावन आमंत्रण: ‘असहायों की सेवा ही परम पुण्य’
आगामी 14 जून 2026 को माँ महाकाली दरबार, अघोर पीठ, जैतपुर (मल्हार) में होने वाले भव्य भंडारे की तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया गया है। अघोर पीठ के पावन संदेश को उद्धृत करते हुए समुद्रशास्त्री जी ने कहा कि—”सिर्फ अग्नि में घी की आहुति देने से कुछ नहीं होता, बल्कि उसी धन राशि से असहाय व्यक्तियों की सेवा करना ही सबसे बड़ा और अपार पुण्य है।”
इस भंडारा कार्यक्रम का विवरण निम्नानुसार है:
दिनांक: 14 जून 2026, दिन: रविवार
स्थान: ग्राम जैतपुर, मल्हार, तहसील – मस्तूरी, जिला – बिलासपुर (छ.ग.)
समय: सुबह 11:00 बजे से शाम तक
विनीत: स्वामी जगदीश महाराज जी (मो. 9111242470)
निष्कर्ष और आह्वान
पंडित श्रवण दुबे समुद्रशास्त्री, श्री रामेश्वर पांडे उर्फ श्मशान वासिनी फक्कड़ बाबा, प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण पाल एवं जन कल्याण पुनर्वास केंद्र मीडिया हाउस के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से देश-विदेश के नागरिकों से अपील की है कि समाज और राष्ट्र धर्म से जुड़ी इस वैचारिक चेतना को प्रसारित करने के लिए ‘धर्म संसद व्हाट्सएप ग्रुप’ से अवश्य जुड़ें। राष्ट्र निर्माण के इस महायज्ञ में धन से अधिक तन, मन, भाव, विचार और सकारात्मक शुभकामनाओं की आवश्यकता है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध, सुरक्षित और आत्मनिर्भर समाज का निर्माण किया जा सके।

