रूपेश पांडे; बेदाग छवि और कड़क कार्यशैली से बौखलाए राजनीतिक तत्वों ने रची घिनौनी साजिश,षड्यंत्र का शिकार।
रूपेश पांडे; बेदाग छवि और कड़क कार्यशैली से बौखलाए राजनीतिक तत्वों ने रची घिनौनी साजिश,षड्यंत्र का शिकार।
कड़क कार्यशैली से बौखलाए राजनीतिक तत्वों ने रची घिनौनी साजिश, एकतरफा निलंबन पर फूटा सामाजिक संस्थाओं का जनआक्रोश!
विश्व हिंदू सेवा दल, विश्व हिंदू महासभा और अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना की दोटूक: निष्पक्ष जांच के बिना कार्रवाई बर्दाश्त नहीं, अन्यथा देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
दुर्ग/रायपुर:
दुर्ग जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) रूपेश कुमार पांडे के खिलाफ हुई एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक रूप ले लिया है। अपनी समझौताविहीन कड़क कार्यशैली, अदम्य प्रशासनिक धाक और अद्वितीय सामाजिक सरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले एक बेहद ईमानदार अधिकारी को जिस प्रकार सोची-समझी रणनीति के तहत निशाना बनाया गया है, उससे साफ है कि यह न्याय नहीं, बल्कि व्यवस्था को ढाल बनाकर किया गया एक घिनौना षड्यंत्र है। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई के खिलाफ अब देश के प्रमुख हिंदू संगठनों ने भी मोर्चा खोल दिया है।
प्रमुख हिंदू संगठनों की ललकार: निष्पक्ष जांच के बिना सजा मंजूर नहीं
जनपद सीईओ रूपेश पांडे के समर्थन में आते हुए विश्व हिंदू सेवा दल, विश्व हिंदू महासभा और अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना ने संयुक्त रूप से इस कार्रवाई पर गहरा रोष व्यक्त किया है। संगठनों के शीर्ष पदाधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि एक निष्पक्ष, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी के ऊपर बिना किसी ठोस आधार के, महज राजनीतिक दबाव में आकर उकसाने की यह दंडात्मक कार्रवाई पूरी तरह से अनुचित है।
संगठनों की खुली चेतावनी: “प्रशासन पहले इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च-स्तरीय संवैधानिक जांच करे, दोनों पक्षों को सुना जाए, और उसके बाद ही कोई निर्णय लिया जाए। यदि बिना किसी विस्तृत जांच के एकतरफा दबाव में आकर इस देशभक्त और लोकप्रिय अधिकारी को बलि का बकरा बनाया गया, तो पूरे भारत में जहां-जहां हिंदुत्व और न्यायप्रिय जनता है, वहां उग्र और व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
कड़क प्रशासनिक तेवर और बेदाग रिकॉर्ड: जहां रहे, वहां बनाई लोकप्रियता की नई मिसाल
प्रशासनिक गलियारों में रूपेश कुमार पांडे की गिनती एक ऐसे ‘कड़क अफसर’ के रूप में होती है, जो नियमों से रत्ती भर भी समझौता नहीं करते। सरकारी धन का सदुपयोग और शासकीय योजनाओं को बिना किसी भ्रष्टाचार के धरातल पर उतारना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है। वे अपनी पूरी शासकीय जीवन यात्रा में जहां भी पदस्थ रहे, वहां अपनी अमिट छाप छोड़ी और हमेशा सुर्खियों में रहे। विभाग में उनकी इसी कड़क नीति और अनुशासनप्रियता के कारण भ्रष्ट और अनुचित लाभ लेने की मंशा रखने वाले तत्वों में हमेशा खौफ का माहौल रहता था।
एक कड़क अफसर होने के साथ-साथ रूपेश पांडे व्यक्तिगत जीवन में अत्यंत संवेदनशील और समाज सेवा (Social Work) के प्रति समर्पित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान दफ्तर की चारदीवारी से बाहर निकलकर वंचितों, ग्रामीणों और जरूरतमंदों की मदद के लिए अनगिनत सामाजिक कार्य किए हैं। यही कारण है कि वे जनता के बीच बेहद लोकप्रिय और एक रक्षक के रूप में जाने जाते हैं।
बिना पद के रसूखदारों का तांडव: जानबूझकर सरकारी अधिकारी को उकसाया और नीचा दिखाया
विभागीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों का स्पष्ट कहना है कि ग्राम थनौद के ‘सुशासन तिहार’ शिविर में जो कुछ भी हुआ, वह एक सुनियोजित पटकथा का हिस्सा था। अधिकारी की कड़क छवि से बौखलाए और व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध न होने से नाराज तत्वों ने उन्हें सार्वजनिक रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित करने और उकसाने का प्रयास किया। सबसे गंभीर और हैरान करने वाली बात यह है कि शासकीय कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने और एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी को सरेआम नीचा दिखाने वाला व्यक्ति वर्तमान में किसी भी संवैधानिक, वैधानिक या प्रशासनिक
जनप्रतिनिधि के पद पर आसीन नहीं है।
एक पूरी तरह से पदविहीन व्यक्ति द्वारा सुशासन के मंच का दुरुपयोग करके एक ऑन-ड्यूटी राजपत्रित अधिकारी के आत्मसम्मान पर चोट की गई। जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां निर्मित की गईं कि अधिकारी गरिमा की रक्षा के लिए तीखी प्रतिक्रिया देने पर विवश हो जाए। इसके बाद, सोची-समझी साजिश के तहत केवल अधिकारी की प्रतिक्रिया का वीडियो वायरल कर दिया गया, जबकि अधिकारी को उकसाने और उनके साथ की गई बदसलूकी के हिस्से को गायब कर दिया गया।
कार्रवाई में दोहरा मापदंड: आखिर बिल्हा के बड़े विवाद पर क्यों मौन रहा प्रशासन?
रूपेश पांडे के इस आनन-फानन में किए गए निलंबन ने शासन-प्रशासन की न्याय प्रणाली और दोहरे मापदंड को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है।
अभी कुछ ही समय पहले बिलासपुर के बिल्हा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और कांग्रेस पदाधिकारी राजेंद्र शुक्ला के बीच सरेआम इससे कहीं अधिक उग्र और गंभीर विवाद हुआ था। लेकिन चूंकि वहां रसूखदार राजनेता शामिल थे, इसलिए प्रशासन ने पूरी तरह चुप्पी साध ली और कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इसके विपरीत, दिन-रात जनता की सेवा में लगे एक बेदाग और कर्तव्यनिष्ठ लोक सेवक (Public Servant) को बिना किसी निष्पक्ष, उच्च-स्तरीय या संवैधानिक जांच के, मात्र 24 घंटे के भीतर एकतरफा कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांतों की सरेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है।
पुनर्विचार और निष्पक्ष जांच की उठती मांग
इस अन्यायपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण निलंबन के बाद अब सामाजिक और धार्मिक संगठनों के मैदान में उतरने से मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। यदि एक बेदाग और कड़क अधिकारी को इसी तरह राजनीतिक षड्यंत्रों की बलि चढ़ाया जाता रहा, तो पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पंगु हो जाएगी। विश्व हिंदू सेवा दल, विश्व हिंदू महासभा और अखिल भारतीय हिंदू राष्ट्र निर्माण सेना सहित आम जनता ने मांग की है कि इस दोषपूर्ण निलंबन आदेश को तत्काल स्थगित रखा जाए, भड़काने वाले तत्वों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज हो, और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्च-स्तरीय जांच कराकर रूपेश पांडे को ससम्मान बहाल किया जाए।
